प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
पटना : पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। यह फैसला बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले लिया गया है, जिसे एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। इस नीति के तहत अब केवल बिहार की मूल निवासी (डोमिसाइल) महिलाओं को ही यह आरक्षण लाभ मिलेगा। यह निर्णय 2016 की नीति में संशोधन है, जिसमें पहले किसी भी राज्य की महिलाएं इस आरक्षण का लाभ ले सकती थीं।
महिलाओं को 35% आरक्षण का दायरा
यह आरक्षण सभी सरकारी सेवाओं और सभी स्तरों की सीधी नियुक्तियों पर लागू होगा। केवल बिहार की स्थायी निवासी महिलाएं ही इस कोटे का लाभ उठा सकेंगी। अन्य राज्यों की महिलाएं सामान्य श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करेंगी। इस नीति का उद्देश्य स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसरों में प्राथमिकता देकर उनके सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।
डोमिसाइल नीति का लागू होना
बिहार सरकार ने पहली बार इस आरक्षण में डोमिसाइल नीति को सख्ती से लागू किया है। पहले शिक्षक भर्ती जैसे मामलों में डोमिसाइल नीति न लागू करने पर सरकार की आलोचना हुई थी। अतिरिक्त मुख्य सचिव (कैबिनेट) एस. सिद्धार्थ ने स्पष्ट किया कि यह नीति बिहार की महिलाओं को प्राथमिकता देने के लिए बनाई गई है।
बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले दिव्यांग उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी के लिए 50,000 रुपये और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) पास करने वालों को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
बिहार युवा आयोग का गठन
युवाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और सामाजिक चेतना से जोड़ने के लिए बिहार युवा आयोग का गठन किया गया है। आयोग में एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष और सात सदस्य होंगे, जिनकी अधिकतम आयु 45 वर्ष होगी।
कम बारिश के कारण किसानों को सिंचाई के लिए डीजल पर सब्सिडी दी जाएगी। कैबिनेट ने कुल 43 प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिसमें पुणौरा धाम (देवी सीता की जन्मस्थली) के विकास के लिए बड़े बजट को स्वीकृति दी गई। ये निर्णय युवाओं, महिलाओं, किसानों और वंचित वर्गों के लिए नए अवसर लाने के उद्देश्य से लिए गए हैं।
क्या महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति ?
यह निर्णय विधानसभा चुनाव 2025 से पहले लिया गया है, जिसे महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। नीतीश कुमार को पहले से ही महिला हितैषी नेता के रूप में जाना जाता है, और यह फैसला उनकी इस छवि को और मजबूत कर सकता है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता मृत्युंजय तिवारी ने इस फैसले को “लॉलीपॉप” करार दिया, जिससे इसकी राजनीतिक संवेदनशीलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियां !
यह नीति बिहार की महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में अधिक अवसर प्रदान करेगी, जिससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार की उम्मीद है। डोमिसाइल नीति लागू होने से स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता मिलेगी, लेकिन अन्य राज्यों की महिलाओं के लिए यह एक झटका हो सकता है। बिहार युवा आयोग और दिव्यांगों के लिए वित्तीय सहायता जैसे कदम युवाओं और वंचित वर्गों के लिए नए अवसर खोल सकते हैं।
न्याय की दिशा में एक कदम
नीतीश कुमार सरकार का यह फैसला बिहार में महिला सशक्तिकरण और रोजगार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। डोमिसाइल नीति के साथ 35% आरक्षण लागू करने से स्थानीय महिलाओं को लाभ मिलेगा, लेकिन इसका प्रभाव बिहार की राजनीति और सामाजिक संरचना पर कितना गहरा होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। इस निर्णय को चुनावी रणनीति के साथ-साथ सामाजिक न्याय की दिशा में एक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है।







