प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में शंकराचार्य विवाद के बीच एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “बहुत से कालनेमि धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर कर रहे हैं”। यह टिप्पणी प्रयागराज के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद के संदर्भ में आई है, जहां शंकराचार्य की उपाधि और संबंधित मुद्दों पर तनाव है। यह विवाद मुख्य रूप से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य) से जुड़ा है। प्रयागराज मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर ‘शंकराचार्य’ शब्द के इस्तेमाल पर स्पष्टीकरण मांगा था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का हवाला दिया गया।
हिंदू एकता की अपील की और समाधान
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे अपमानजनक बताया और योगी सरकार पर आरोप लगाए, जिसमें मानहानि और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के दावे शामिल हैं। इस दौरान कुछ संतों और विपक्षी नेताओं (जैसे अखिलेश यादव) ने योगी सरकार की आलोचना की, जबकि प्रवीण तोगड़िया जैसे नेताओं ने हिंदू एकता की अपील की और समाधान की उम्मीद जताई।
योगी आदित्यनाथ का बयान
सीएम योगी ने बिना किसी का नाम लिए कहा “धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने वाले कई “कालनेमि” (रामायण में रावण के छल से जुड़े राक्षस का नाम, जो छद्मवेश में आता है) सक्रिय हैं। समाज को ऐसे तत्वों से सतर्क रहना होगा। संन्यासी या योगी के लिए धर्म और राष्ट्र सर्वोपरि होते हैं, निजी संपत्ति नहीं। धर्म को आचरण से साबित करना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया जब विवाद राजनीतिक और धार्मिक रंग ले चुका है, और कुछ लोग इसे सनातन धर्म के भीतर दरार पैदा करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। योगी ने जोर दिया कि सनातन धर्म की रक्षा सर्वोपरि है और विरोधी ताकतें इसे निशाना बना रही हैं।







