नई दिल्ली: रुपये के मुकाबले डॉलर मजबूत होने और महंगे सोने से भले ही आम आदमी को झटका लगा हो. लेकिन इससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को फायदा हुआ है. जी हां, बीता फाइनेंशियल ईयर 2025-26 रिजर्व बैंक की इनकम के लिहाज से बेहद शानदार रहा है. इस दौरान आरबीआई (RBI) की कुल आमदनी 26 प्रतिशत बढ़कर 4.3 लाख करोड़ के पार पहुंच गई. पिछले फाइनेंशियल ईयर में कमाई का यह आंकड़ा 3.4 लाख करोड़ रुपये था. आरबीआई (RBI) को हुई बंपर कमाई का सबसे बड़ा फायदा केंद्र सरकार को होने जा रहा है. आरबीआई के आंकड़े को देखकर एक बार तो डोनाल्ड ट्रंप भी माथा पकड़ लेंगे.
दरअसल, रिजर्व बैंक सरकार को करीब 2.9 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड सरप्लस (डिविडेंड) ट्रांसफर करने जा रहा है. आरबीआई (RBI) की छप्परफाड़ कमाई के पीछे डॉलर इन्वेस्टमेंट पर मिला बेहतरीन रिटर्न, विदेशी करेंसी मार्केट में सही समय पर किया गया हस्तक्षेप और घरेलू बॉन्ड से हुई आमदनी अहम वजह रहे. रिजर्व बैंक (RBI) की बंपर डिजिटल छलांग में सबसे बड़ा योगदान विदेशी सोर्स का रहा. विदेशी निवेश और असेट्स से होने वाली आरबीआई (RBI) की आमदनी 26.6 प्रतिशत बढ़कर 3.3 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई.
आरबीआई को 1.7 लाख करोड़ का सीधा एक्सचेंज गेन
फॉरेन करेंसी मार्केट में किये गए कामकाज और डॉलर की खरीद-बिक्री से रिजर्व बैंक को 1.7 लाख करोड़ रुपये का सीधा एक्सचेंज गेन (प्रॉफिट) हुआ. दरअसल, आरबीआई (RBI) ने डॉलर को उस कीमत से कहीं अधिक दाम पर बेचा, जिस कीमत पर उसने इन्हें खरीदा था. इसके अलावा, ग्लोबल लेवल पर बढ़ी ब्याज दर, अमेरिकी सरकारी बॉन्डों पर मिलने वाले रिटर्न के चलते विदेशी मुद्रा संपत्तियों पर आरबीआई का यील्ड (रिटर्न) 5.3 प्रतिशत से बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो गया.
घरेलू मोर्चे पर भी भर गई आरबीआई की झोली
विदेशी कमाई के साथ देश के अंदर यानी घरेलू मोर्चे पर भी आरबीआई की झोली जमकर भरी है. आरबीआई (RBI) ने इस दौरान रुपया सिक्योरिटीज पर ब्याज के रूप में 1.2 लाख करोड़ रुपये कमाए. यह पिछले साल के मुकाबले 37.7 प्रतिशत का इजाफा दिखाता है. बाजार में नकदी की स्थिति संभालने और मार्केट ऑपरेशंस को सपोर्ट देने के लिए आरबीआई (RBI) ने बड़े पैमाने पर सरकारी सिक्योरिटीज की खरीदारी की. इससे घरेलू सरकारी सिक्योरिटीज की होल्डिंग 44.9 प्रतिशत बढ़कर 22.6 लाख करोड़ पर पहुंच गई.
92 लाख करोड़ पर पहुंची रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट
शानदार प्रदर्शन के दम पर आरबीआई की बैलेंस शीट 20.6 प्रतिशत बढ़कर करीब 92 लाख करोड़ हो गई. ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमत बढ़ने के कारण आरबीआई की गोल्ड होल्डिंग (Gold Holdings) की वैल्यू 63.8 प्रतिशत बढ़कर 10.9 लाख करोड़ हो गई. इसके अलावा, प्रमुख ग्लोबल करेंसी के मुकाबले भारतीय रुपये में आई गिरावट ने भी आरबीआई की विदेशी संपत्तियों की घरेलू कीमत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. इससे करेंसी और गोल्ड रीवैल्यूएशन अकाउंट 8.7 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 21.7 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया.







