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Home राज्य

सुप्रीम कोर्ट का राज्यों को कड़ा संदेश, ‘SIR में कोई रुकावट बर्दाश्त नहीं करेंगे’

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 9, 2026
in राज्य, राष्ट्रीय
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Supreme court
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि राज्यों में चल रही मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कुछ अराजक तत्वों की ओर से निर्वाचन आयोग के नोटिस जलाने के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के डीजीपी को हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग की इस दलील पर गौर किया कि अब तक उपद्रवियों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि यह संदेश जाना चाहिए कि देश का संविधान सभी राज्यों पर लागू होता है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण संबंधी अंतिम निर्णय हमेशा मतदाता सूची अधिकारियों की ओर से ही लिए जाएंगे।

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ममता ने की थी अपील
दरअसल सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल की एसआईआर से जुड़े कई मामलों पर सुनवाई कर रहा है। इनमें ममता बनर्जी की एक याचिका भी शामिल थी। इसमें उन्होंने अन्य मुद्दों के साथ-साथ ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ सूची में मतदाताओं को जिस तरह से कैटेगरी में बांटा गया है, उसे चुनौती दी गई थी।

ममता बनर्जी का चुनाव आयोग से टकराव
चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का चुनाव आयोग के साथ लंबा टकराव पिछले सप्ताह और बढ़ गया, जब वह खुद सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए दखल देने की अपील की। एसआईआर प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने अपनी याचिका में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) पर राजनीतिक पक्षपात से काम करने का आरोप लगाया है।

ममता ने लगाए हैं ये आरोप
उनका आरोप है कि जिस तरह से वोटर रिविजन एक्सरसाइज की जा रही है, उससे समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों के लाखों वोटरों के नाम हटा दिए जाएंगे। उन्होंने चुनाव निकाय को एसआईआर एक्सरसाइज के दौरान किसी भी वोटर का नाम हटाने से रोकने के लिए अंतरिम निर्देश मांगे हैं, खासकर उन लोगों के नाम जो ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ कैटेगरी में रखे गए हैं। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सीएम ममता की याचिका पर ईसीआई को नोटिस जारी किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि स्थानीय बोलियों के कारण स्पेलिंग में अंतर पूरे भारत में होता है और यह असली वोटरों को बाहर करने का आधार नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट को संबोधित करते हुए सीएम बनर्जी ने दावा किया कि शादी के बाद सरनेम बदलने वाली महिलाओं और घर बदलने वाले लोगों पर इसका असमान रूप से असर पड़ रहा है।

पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप
विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि असम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में इसी तरह के वोटर रिवीजन एक्सरसाइज नहीं किए जा रहे हैं और ईसीआई को बार-बार दिए गए रिप्रेजेंटेशन का कोई जवाब नहीं मिला है। इन दलीलों पर जवाब देते हुए सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने भरोसा दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट एक व्यावहारिक समाधान ढूंढेगा। साथ ही, किसी भी असली वोटर का अधिकार छीना नहीं जा सकता।

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