नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका/इजरायल के बीच चल रही लड़ाई का असर अब पूरी दुनिया पर दिखने लगा है। होर्मुज स्टेट से जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। दुनिया का 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इस कारण तेल और गैस सप्लाई पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कच्चे तेल की कीमत में शनिवार से अब तक करीब 20% तेजी आ चुकी है। इसी तरह गैस की कीमत में भी भारी उछाल देखी जा रही है। इराक में तेल के रोजाना उत्पादन में 15 लाख बैरल की कटौती कर दी है। कतर ने एलएनजी का उत्पादन बंद कर दिया है। सऊदी अरब की एक बड़ी रिफाइनरी ने भी प्रोडक्शन बंद है। ईरान ने इस रिफाइनरी पर हाल में दो बार हमला किया।
कच्चे तेल की कीमत आज तीन फीसदी से ज्यादा तेजी आई और यह 84 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। जानकारों का कहना है कि अगर ईरान में लड़ाई जल्दी खत्म नहीं हुई तो कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच जाएगी। इससे भारत, चीन और जापान जैसे देशों को भारी नुकसान हो सकता है जो अपना ज्यादातर तेल बाहर से खरीदते हैं। तेल महंगा होने से इन देशों की इकॉनमी बुरी तरह गड़बड़ा सकती है और महंगाई के बेकाबू होने का खतरा है।
चीन-जापान पर असर
जापान की तेल रिफाइनरी कंपनियों ने सरकार के नेशनल रिजर्व से तेल जारी करने का अनुरोध किया है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण तेल सप्लाई टाइट हो गई है। इसी तरह चीन की सरकार ने अपनी बड़ी रिफाइनरी कंपनियों को पेट्रोल और डीजल का निर्यात बंद करने को कहा है। ईरान से एक्सपोर्ट होने वाला 90 फीसदी तेल चीन के खाते में आता है।
इसी तरह साउथ कोरिया का कहना है कि उसके सात जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने में नाकाम रहे हैं। इस स्ट्रेट से गुजरने वाला 80 फीसदी तेज एशियाई देशों को जाता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई और ईरान समेत कई देश इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में केवल अमेरिका, इजरायल और यूरोप के जहाजों के लिए रास्ता बंद किया गया है।
- जापान की तेल रिफाइनरी कंपनियों ने सरकार के नेशनल रिजर्व से तेल जारी करने का अनुरोध किया है
- चीन की सरकार ने अपनी बड़ी रिफाइनरी कंपनियों को पेट्रोल/डीजल की निर्यात बंद करने को कहा है
- साउथ कोरिया का कहना है कि उसके कम से कम सात जहाज होर्मुज स्ट्रेट को पार करने में नाकाम रहे हैं
भारत का हाल
दुनिया में एलएनजी के दूसरे बड़े उत्पादक देश कतर ने गैस का उत्पादन रोक दिया है। उसके एक प्लांट पर हाल में हमला हुआ था। भारत और चीन कतर की गैस के सबसे बड़ी खरीदार हैं। इससे भारत को होने वाली आपूर्ति प्रभावित हुई है और प्रमुख घरेलू क्षेत्रों के लिए ईंधन की उपलब्धता का संकट खड़ा हो गया है। भारत सालाना 2.7 करोड़ टन एलएनजी का आयात करता है, जिसमें से 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले कतर से आता है।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण भारत की सबसे बड़ी एलएनजी आयातक पेट्रोनेट एलएनजी कतर में अपने जहाज नहीं भेज पा रही है। इसका मुख्य कारण हॉर्मुज स्ट्रेट का लगभग बंद होना है। भारत के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 50% और एलएनजी आपूर्ति का 54% इसी रास्ते से होकर आता है। भारत के पास 18 दिन का क्रूड, 21 दिन का पेट्रोल-डीजल और 12 दिन की गैस का स्टॉक है। अगर यह लड़ाई लंबी खिंची तो भारत की मुश्किल बढ़ सकती है।







