नई दिल्ली। प्रशांत महासागर में दो बेहद छोटे-छोटे देश हैं, मगर वो रणनीतिक रूप से बहुत बड़े हैं। ये देश हैं तुआलु और वनआतु, जहां हाल ही में केंद्रीय विदेश और टेक्सटाइल राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा 22 से 25 अप्रैल तक चार दिवसीय यात्रा रहे। विदेश मंत्रालय ने इसे प्रशांत द्वीपीय देशों से भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के नजरिये से काफी अहम करार दिया है। इस यात्रा का मकसद द्विपक्षीय रिश्तों के साथ-साथ विकास, कारोबार और हेल्थ सर्विसेज को बढ़ावा देना भी है।
ओशिनिया द्वीप समूह के इन देशों में भारत ने रखा कदम
मार्गेरिटा की यह यात्रा 22 से 25 अप्रैल तक ओशिनिया द्वीप समूह के इन देशों की हुई है। विदेश मंत्रालय ने भी मार्गेरिटा के पोस्ट को रिट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने कहा है-‘मैं तुआलु के कार्यवाहक प्रधानमंत्री और विदेश, श्रम और कारोबार मंत्री पॉलसन पनापा से मुलाकात कर बेहद खुश हूं। भारत और तुआलु की जड़ें काफी गहरी भागीदारी में रही हैं, जिसमें मूल्यों और प्रतिबद्धताओं की अहमियत है।’
मार्गेरिटा ने कहा-हम दोनों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने को लेकर सार्थक चर्चा हुई। इसमें सेहत के साथ-साथ जलवायु रोधी ढांवे को विकसित करने पर भी बात हुई। भारत तुवालू की विकास यात्रा का साथी रहा है।
वनआतु में द्विपक्षीय सहयोग की मजबूती पर बात
इससे पहले 22-23 अप्रैल, 2026 को पबित्रा मार्गेरिटा रिपब्लिक ऑफ वनुआतु पहुंचे थे, जहां उन्होंने वनआतु के पीएम जॉथम नापत से मुलाकात की। उन्होंने लिखा-गर्मजोशी के बीच सार्थक चर्चा हुई।
इसमें भारत-वनआतु के बीच मुख्य सेक्टरों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत किए जाने को लेकर चर्चा हुई। इसके साथ ही हमने अपने लोगों की प्रगति और रहन-सहन की बेहतरी को लेकर प्रतिबद्धता भी जताई।
भारत का यह दौरा बढ़ते जुड़ाव और सक्रिय कूटनीति
विदेश राज्य मंत्री का यह दौरा प्रशांत द्वीप देशों के साथ भारत के बढ़ते जुड़ाव और सक्रिय कूटनीति का संकेत है, जहां चीन अपना दबदबा बढ़ा रहा है और अमेरिका भी चीन को रोकने के लिए भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर क्वॉड को मजबूत करना चाहता है। यह पहल FIPIC Summit 2023 (पोर्ट मोरेस्बी) में लिए गए निर्णयों की निरंतरता भी है।
भारत की हिंद-प्रशांत के लिए रणनीति
भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को और मजबूत कर रहा है। वनुआतु और तुवालु जैसे छोटे देश समुद्री रास्तों और रणनीतिक स्थिति के कारण महत्वपूर्ण हैं।
यह यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ (Act East) नीति और प्रशांत द्वीप देशों (PICs) के साथ गहरे जुड़ाव के लिए रणनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
दोनों देशों की आबादी बेहद कम
वनुआतु की वर्तमान आबादी 3,41,000 से 3,43,000 के बीच है। यह प्रशांत क्षेत्र के अधिक आबादी वाले द्वीप देशों में से एक है। वहीं, तुवालु दुनिया के सबसे कम आबादी वाले देशों में से एक है, जिसकी कुल जनसंख्या मात्र 9,300 से 10,600 के आसपास है।
चीन की चुनौती से पार पाने में ये दोनों अहम
प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन अपना प्रभाव काफी बढ़ा रहा है। भारत भी प्रशांत क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है। भारत प्रशांत क्षेत्र के छोटे से छोटे देशों को अपने रणनीतिक विजन में महत्वपूर्ण मानता है। यह ‘स्मार्ट डिफेंस’ की ओर एक बड़ा कदम है।
FIPIC में भारत और 14 पैसिफिक आइलैंड कंट्रीज शामिल
2014 में लॉन्च हुए एफआईपीआईसी में भारत और 14 पैसिफिक आइलैंड कंट्रीज (पीआईसी) शामिल हैं। इनके नाम कुक आइलैंड्स, फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया, फिजी, किरिबाती, नाउरू, नियू, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, रिपब्लिक ऑफ मार्शल आइलैंड्स, समोआ, सोलोमन आइलैंड्स, टोंगा, तुवालु और वनुआतु हैं।







