नई दिल्ली। भारत में सोमवार (9 मार्च) को सोने और चांदी की कीमतों में मिला जुला रुख देखने को मिला। इसकी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, तेल की कीमतों में तेजी, डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक संकेत माने जा रहे हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना लगभग 1.61 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं मई डिलीवरी वाली चांदी करीब 2.65 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रही थी। चांदी एक वक्त दिन के हाई लेवल से करीब 2.52% यानी 6755 रुपये नीचे थी। सोना भी 1.04% यानी 1685 रुपये तक टूट गया था। बाद में दोनों धातुओं में कुछ रिकवरी दिखी, फिर भी दोनों लाल निशान में थे।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। Augmont के मुताबिक यह संकट ऊर्जा बाजार के साथ साथ कीमती धातुओं को भी प्रभावित कर रहा है।
आमतौर पर ऐसे हालात में सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन हाल की अस्थिरता के कारण कई निवेशक मुनाफा वसूली कर रहे हैं या नकदी बढ़ा रहे हैं। इसी वजह से भारत में सोने की कीमतों में तुरंत बड़ी तेजी नहीं दिखी।
बढ़ती तेल कीमतें और महंगाई की चिंता
कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। इसकी एक बड़ी वजह हॉर्मूज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्तों में सप्लाई बाधित होने की आशंका है।
Augmont का कहना है कि फिलहाल भू राजनीतिक जोखिम का असर सबसे ज्यादा ऊर्जा बाजार में दिखाई दे रहा है। इसी वजह से अभी तेल की कीमतों में ज्यादा हलचल दिख रही है।
डॉलर की मजबूती और ब्याज दर की उम्मीदें
मजबूत अमेरिकी डॉलर ने भी सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बनाया है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अन्य करेंसी रखने वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है।
VT Markets के सीनियर मार्केट एनालिस्ट जस्टिन खू के मुताबिक US Dollar Index महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस स्तर के करीब पहुंच रहा है। इसकी मजबूती USDJPY को सपोर्ट दे रही है और कमोडिटी बाजार पर भी असर डाल रही है।
निवेशक अमेरिका के आने वाले महंगाई आंकड़ों पर भी नजर रख रहे हैं। CPI लगभग 2.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति पर असर पड़ सकता है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं।
भारत में मांग और सप्लाई की स्थिति
भारत में फिलहाल भौतिक सोने की मांग मध्यम स्तर पर बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार बढ़ती शिपिंग और बीमा लागत के कारण ट्रेडर्स अंतरराष्ट्रीय कीमतों से नीचे डिस्काउंट पर सोना ऑफर कर रहे हैं। साल की शुरुआत में भारी आयात होने के कारण बाजार में स्टॉक भी ज्यादा है। इसी वजह से घरेलू बाजार में नई खरीदारी सीमित रही है।
वहीं RiddiSiddhi Bullions के मैनेजिंग डायरेक्टर पृथ्वीराज कोठारी के मुताबिक, चांदी में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। इसकी वजह सोलर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टरों से बढ़ती औद्योगिक मांग है।
लंबी अवधि का नजरिया
विशेषज्ञों का मानना है कि सोना और चांदी दोनों लंबी अवधि में मजबूत ट्रेंड में बने हुए हैं। Augmont के अनुसार तकनीकी तौर पर सोने के लिए करीब 5,000 डॉलर प्रति औंस और चांदी के लिए 80 डॉलर प्रति औंस के आसपास अहम सपोर्ट स्तर हैं। अगर कीमतों में गिरावट आती है तो इन स्तरों पर खरीदारी देखने को मिल सकती है।
बाजार की अस्थिरता और सेंटीमेंट
भू राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के कारण फिलहाल बाजार में उतार चढ़ाव बना हुआ है। हालांकि व्यापक बाजार संकेतक अभी ज्यादा घबराहट नहीं दिखा रहे हैं। VIX और अन्य डेरिवेटिव संकेतकों में मध्यम स्तर की हलचल दिख रही है, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार में डर नहीं बल्कि सतर्कता का माहौल है।
निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश की मांग, ऊर्जा कीमतों से जुड़ी महंगाई और केंद्रीय बैंकों की नीति के बीच संतुलन बनाकर फैसले ले रहे हैं। इसी वजह से मध्यम अवधि में सोना और चांदी दोनों के लिए रुख सकारात्मक माना जा रहा है।







