नई दिल्ली। सीएनएन ने वॉशिंगटन, DC में मौजूद थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज का हवाला देते हुए बताया कि ईरान से अमेरिका की लड़ाई में हर दिन लगभग 891.4 मिलियन डॉलर (करीब ₹8,216 करोड़ ) का खर्च आ रहा है। यानी पिछले 10 दिनों में अमेरिका के करीब 82,000 रुपए करोड़ स्वाहा हो गए हैं। इस थिंक टैंक ने पेंटागन द्वारा शेयर की गई जानकारी का एनालिसिस किया है, जिसमें उसने उन टारगेट और ऑपरेशन में शामिल एसेट्स के बारे में बताया है जिन पर उसने हमला किया था।
भविष्य में कम हो सकता है खर्च
सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के शुरुआती 100 घंटों में खर्च लगभग 34000 करोड़ रुपए (3.7 बिलियन डॉलर) रहा है। वहीं, एक दिन का औसत खर्च लगभग 891.4 मिलियन डॉलर(करीब ₹8,216 करोड़ ) है। CSIS (Center for Strategic and International Studies) का अनुमान है कि भविष्य में खर्च थोड़े कम हो सकते हैं, अगर अमेरिका कम महंगे हथियार और ड्रोन्स का इस्तेमाल बढ़ाता है और ईरान की रिटेलिएशन कम होती है।
एयर, नेवल और ग्राउंड ऑपरेशन्स पर खर्च
युद्ध के सबसे बड़े खर्च एयर, नेवल और ग्राउंड ऑपरेशन्स पर हैं। एयर ऑपरेशन की लागत लगभग 30 मिलियन डॉलर प्रति दिन, नेवल ऑपरेशन पर 15 मिलियन डॉलर प्रति दिन और ग्राउंड ऑपरेशन पर 1.6 मिलियन डॉलर प्रति दिन आती है। एयर ऑपरेशन्स में टैंकर और कार्गो विमान 9 मिलियन डॉलर, कैरियर एयर विंग 5 मिलियन डॉलर, स्टील्थ और नॉन‑स्टील्थ फाइटर 5 मिलियन डॉलर प्रति दिन खर्च होते हैं। नेवल ऑपरेशन में एयरक्राफ्ट कैरियर 6 मिलियन डॉलर और डिस्ट्रॉयर 5 मिलियन डॉलर प्रति दिन खर्च होता है। ग्राउंड ऑपरेशन में आर्टिलरी ब्रिगेड 1 मिलियन डॉलर और नेशनल गार्ड बटालियन एक मिलियन से कम प्रति दिन खर्च करता है।
कितना महंगा पड़ रहा युद्ध
पिछले साल जून 2025 में ईरान के न्यूक्लियर फैसिलिटी पर किए गए ऑपरेशन मिडनाइट हैमर की तुलना में, इस युद्ध की शुरुआती लागत कहीं अधिक है। उस ऑपरेशन में कुल लगभग 18,830- 20,860 करोड़ रुपए (2.04 से 2.26 बिलियन डॉलर) खर्च हुए थे, जबकि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के पहले 100 घंटों में 34000 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
8.76 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है लागत
पेन व्हार्टन बजट मॉडल के अनुसार, अगर युद्ध दो महीने तक चलता है और अमेरिकी बलों को जमीन पर उतारा जाता है तो इसकी कुल लागत लगभग 3.69 लाख करोड़- 8.76 लाख करोड़ रुपए (40 बिलियन से 95 बिलियन) तक हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह खर्च अमेरिका के लिए भारी है, लेकिन ईरान के पास परमाणु हथियार आने की स्थिति में होने वाली संभावित क्षति इससे कहीं अधिक ट्रिलियन्स ऑफ डॉलर तक हो सकती है।
इसलिए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की वास्तविक लागत न केवल अरबों डॉलर में मापी जा रही है, बल्कि यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक राजनीतिक स्थिरता पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है।







