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मध्य भारत में बढ़ रहा है संघकार्य, शताब्दी वर्ष के आयोजनों में समाज की सज्जनशक्ति ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में चलनेवाली शाखाओं की संख्या में वृद्धि, 3842 शाखाएं हो रही हैं संचालित

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
March 18, 2026
in राज्य, विशेष
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centenary year celebrations
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भोपाल। हरियाणा के पट्टीकल्याणा (समालखा) में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संपूर्ण देश के संघकार्य का वृत्त प्रस्तुत किया गया, जिसके अनुसार देश के विभिन्न भागों सहित मध्यभारत प्रांत में भी तेजी से संघकार्य बढ़ रहा है। बैठक में शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित कार्यक्रमों का वृत्त भी प्रस्तुत किया गया, जिसके अनुसार शताब्दी वर्ष में आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में समाज की सज्जनशक्ति के संघ के साथ आई है।

वर्तमान समय में मध्यभारत प्रान्त में संघ की रचना से महानगरीय एवं ग्रामीण जिलों के 2481 स्थानों पर 3842 शाखाएं चल रही हैं। जिनमें महानगर में 37 स्थानों पर 544 शाखाएं एवं ग्रामीण जिलों में 2444 स्थानों पर 3298 शाखाएं चल रही हैं। इसके साथ ही 689 स्थानों पर 736 साप्ताहिक मिलन के रूप में संघकार्य चल रहा है। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में शाखाओं द्वारा 271 सेवा उपक्रम किए जा रहे हैं। संघ ने जिन बस्तियों को सेवा बस्ती के रूप में चिह्नित किया है, ऐसी 1013 सेवा बस्तियों में से 367 में शाखाएं चल रही हैं, 970 बस्तियों में सेवा कार्यों का संचालन किया जा रहा है और 611 सेवा बस्तियों में स्वयंसेवकों का नियमित संपर्क है।

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संघकार्य की समझ बढ़ाने एवं कार्यकताओं के व्यक्तित्व विकास की दृष्टि से संघ प्रतिवर्ष संघशिक्षा वर्गों को आयोजन करता है। तीन दिवस के 179 प्रारंभिक वर्ग आयोजित किए गए, जिनमें 8021 स्वयंसेवक शामिल हुए। 7 दिवस की अवधि के 61 प्राथमिक वर्गों में 3485 स्वयंसेवक शामिल हुए। इसी तरह, 15 दिन के 02 संघ शिक्षा वर्गों (सामान्य) में 589 और संघ शिक्षा वर्ग (विशेष) में 184 स्वयंसेवकों ने संघकार्य का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

समाज परिवर्तन के कार्यों में जुटे हैं स्वयंसेवक 
संघ के कार्यकर्ता समाज परिवर्तन के कार्यों में संलग्न हैं। स्वयंसेवकों द्वारा 78 बाल गोकुलम्, 9 अध्ययन केंद्र और 13 मासिक कुटुम्ब मिलन भी चलाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त ग्वालियर में समाज की सज्जनशक्ति को साथ लेकर नशामुक्ति और सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति के विशेष प्रयत्न किए जा रहे हैं। लहार जिले के सीगपुरा मण्डल मे व्यसन मुक्ति का अभियान चलाया गया। प्रत्येक ग्राम मे ग्राम सभा आयोजित की गई। अब तक 80 लोग नशा छोड़ चुके हैं। मदनपुरा ग्राम शराब मुक्त हो गया है।

शिवपुरी नगर की केशव शाखा के स्वयंसेवकों द्वारा प्लास्टिक (डिस्पोजल) मुक्त शाखा क्षेत्र अभियान एक वर्ष पूर्व प्रारंभ किया गया, जिसके सुखद परिणाम दिखायी दे रहे हैं। कई स्थानों पर शाखाओं ने और उनकी प्रेरणा से सामाजिक संगठनों ने बर्तन बैंक प्रारंभ किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण में उपयोगी हो रहे हैं। सीहोर जिले के जावर खंड की माधव शाखा ने गोवंश के लिए रात्रि विश्राम गृह बनाया है। गाँव हाइवे से लगा है। रात्रि में गाय यहाँ बैठी रहती थी और प्रायः दुर्घटना में घायल या मृत हो जाती थी। गायों के विश्राम गृह से समाज को सीधे जोड़ने के लिए एक घर-एक रोटी का उपक्रम चलाया जाता है। मोहल्ले के लोग घर से रोटी लाकर देते है। इस तरह समाज में गाय संरक्षण की भावना को बल मिला है। इस तरह के कई उपक्रम शाखाओं द्वारा चलाए जा रहे हैं।

शताब्दी वर्ष के निमित्त अब तक हुए कार्यक्रमों से उत्साहित हैं स्वयंसेवक 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने के प्रसंग पर शताब्दी वर्ष में अखिल भारतीय योजना से छह और प्रांत की योजना से दो कार्यक्रमों की योजना की गई, जिनमें से अब तक विजयादशमी उत्सव, व्यापक गृह संपर्क अभियान, हिन्दू सम्मेलन एवं प्रमुखजन गोष्ठी का आयोजन हो चुका है। अब सद्भाव बैठकें, अधिकतम स्थानों पर शाखा एवं युवाओं से संवाद के कार्यक्रमों का आयोजन होना है। यह कार्यक्रम विजयादशमी-2026 तक चलेंगे।

विजयादशमी उत्सव से बना शताब्दी वर्ष का वातावरण
शताब्दी वर्ष के सबसे पहले कार्यक्रम ‘विजयादशमी उत्सव एवं पथ संचलन’ में पुराने स्वयंसेवकों के साथ ही नये स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश के साथ उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विजयादशमी उत्सव ने शताब्दी वर्ष का वातावरण बना दिया। प्रांत में कुछ 2124 स्थानों पर विजयादशमी उत्सवों का आयोजन किया गया, जिनमें 2 लाख 80 हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश के साथ सहभागिता की। वहीं, 1818 स्थानों पर पथ संचलन निकाले गए, जिनमें 2 लाख 73 हजार से अधिक स्वयंसेवक शामिल हुए। भोपाल में श्रेणी मिलन का विशेष पथ संचलन भी निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में भोपाल के प्रतिष्ठित चिकित्सक, अधिवक्ता, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी, खिलाड़ी, प्राध्यापक एवं व्यवसायी सहित अन्य प्रोफेशन के स्वयंसेवक शामिल हुए।

हिन्दू सम्मेलनों में शामिल हुए 52 लाख से अधिक नागरिक
मध्य भारत प्रांत में 20 दिसंबर 2025 से 20 जनवरी 2026 के मध्य 1814 मंडलों एवं 759 बस्तियों में 1569 हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन कर समाज जागरण का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है। इन सम्मेलनों में 52 लाख 63 हजार से अधिक समाजजनों की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि समाज का संघ के प्रति विश्वास कितना प्रगाढ़ हुआ है। इन सम्मेलनों के लिए प्रभात फेरी, कलश यात्रा, वाहन रैली, मैराथन, मानव श्रृंखला और सेवा बस्तियों में संत प्रवास जैसे आयोजनों से एक अभूतपूर्व वातावरण का निर्माण हुआ। गाय पूजा, तुलसी पूजा, भारत माता की आरती, पंच परिवर्तन प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया। सम्मेलनों में मातृशक्ति की अभूतपूर्व सक्रियता, संत समाज व संघ कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन और अंत में समरसता का प्रतीक ‘सहभोज’ ऐसे प्रयास रहे, जिन्होंने इन आयोजनों को सही मायनों में सामाजिक महाकुंभ बना दिया।

80 हजार स्वयंसेवकों ने 27 लाख से अधिक परिवारों से किया संपर्क 
संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त चलाए गए व्यापक गृह संपर्क अभियान ने समाज के हर द्वार तक दस्तक दी। पूरे प्रांत में लगभग 80 हजार स्वयंसेवकों ने 23 हजार से अधिक टोलियां बनाकर लगभग 27 लाख 46 हजार परिवारों से सीधा संपर्क कर एक भगीरथ कार्य संपन्न किया। इसके साथ ही समाज के प्रबुद्ध वर्ग को संघ विचार से जोड़ने के लिए अखिल भारतीय से लेकर विभाग स्तर तक के कार्यकर्ताओं ने 7922 प्रमुखजनों से संपर्क साधा। इस अभियान के दौरान परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के भोपाल प्रवास के समय पद्म श्री से अलंकृत महानुभावों के साथ और माननीय सह सरकार्यवाह श्री रामदत्त जी के ग्वालियर प्रवास के समय शोध वैज्ञानिकों के साथ हुई ‘चाय पर चर्चा’ समाज की बौद्धिक शक्ति को राष्ट्र कार्य से जोड़ने के अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुए।

193 प्रमुखजन गोष्ठी में शामिल हुए 17 हजार से अधिक महानुभाव 
शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ के विचार को समाज के प्रमुख जनों के बीच लेकर जाने के लिए प्रमुखजन गोष्ठियों का आयोजन किया गया। प्रतिनिधि सभा के पहले तक प्रांत में महानगरीय स्तर के 61 स्थानों सहित 193 स्थानों पर प्रमुख जन गोष्ठियों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें 17 हजार 494 प्रमुखजन शामिल हुए। भोपाल में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का प्रवास हुआ, इस अवसर पर प्रमुखजन गोष्ठी, युवा संवाद, सामाजिक सद्भाव बैठक और स्त्री शक्ति संवाद का आयोजन किया गया।

संपूर्ण देश में संघ कार्य का विस्तार 
प्रतिनिधि सभा में सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले जी ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि संपूर्ण देश में पिछले वर्ष 51,740 स्थानों पर 83,129 शाखाएं संचालित थीं जो अब बढ़कर 55,683 स्थानों पर 88,949 शाखाओं का आंकड़ा हो गया है। इस प्रकार एक वर्ष में 3943 नए स्थान जुड़े हैं और शाखाओं की संख्या 5820 की वृद्धि हुई है। संगठन कार्य में विस्तार को इस प्रकार देखना भी आवश्यक है कि अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में भी संघ की शाखाएं संचालित हो रही हैं। संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में भी इस सांगठनिक विस्तार को स्पष्टता से देखा जा सकता है। प्रतिवेदन के अनुसार देश में अब तक 37,048 हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें लगभग साढ़े तीन करोड़ लोगों ने सहभाग किया है।

यह सम्मेलन शहरी, ग्रामीण, जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में भी आयोजित हुए हैं। इनमें प्रमुखता से समाज में सामाजिक समरसता, पर्यावरण चेतना, कुटुम्ब प्रबोधन, स्व का बोध तथा नागरिक कर्तव्यों की पालना के लिए पंच परिवर्तन के लिए आह्वान किया गया। उन्होंने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष में दो प्रकार के कार्यक्रमों की योजना की गई, जिनमें एक संगठन विस्तार और दूसरा समाज की सज्जन शक्ति को सदभाव, समरसता के लिए संगठित करने का उद्देश्य रखा गया।

इस दृष्टि से गृह संपर्क अभियान चल रहा है, जिसके अन्तर्गत अभी तक देश के कुछ प्रांतों में ही 10 करोड़ घरों तथा 3 लाख 90 हजार गांवों तक संपर्क किया जा चुका है और अन्य प्रांतों में यह अभियान जारी है। गृह सम्पर्क में वर्ग और समुदाय के किसी पूर्वाग्रह के बिना घरों में जाकर परिवारों से मिलकर संघ के विषय में संवाद किया गया। सिर्फ केरल राज्य का ही उदाहरण लें तो वहां 55 हजार से ज्यादा मुस्लिम घरों में तथा 54 हजार से ज्यादा ईसाई परिवारों में सम्पर्क किया गया और इन सभी परिवारों ने स्वयंसेवकों का स्वागत किया।

सरकार्यवाह जी ने कहा कि समाज में महापुरुषों के कार्यों को जाति, पंथ के भेद से ऊपर उठकर स्वीकार करना चाहिए और उनके माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए आगे बढ़ना चाहिए। संघ के स्वयंसेवकों ने इसी दिशा में नवम गुरु श्री तेग बहादुर जी के बलिदान के 350वें वर्ष के अवसर पर देशभर में 2 हजार से अधिक कार्यक्रम किए, जिनमें 7 लाख से अधिक लोग सम्मिलित हुए। इसी प्रकार राष्ट्रगीत वंदेमातरम की 150 वर्षगांठ भी उत्साहपूर्वक मनाई गई। आगामी वर्ष में संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के 650वें प्राकट्य वर्ष पर कार्यक्रमों की योजना बनी है।

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