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Home राष्ट्रीय

क्या हम फिर पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक के लिए तैयार हैं? जानें सेना की नई ताकत

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
May 6, 2026
in राष्ट्रीय
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indian army ai
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नई दिल्ली: मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल दुश्मन के दांत खट्टे किए थे, बल्कि भारतीय सुरक्षा नीति को एक नई दिशा भी दी थी. भारत की सैन्य तैयारी पहले से कहीं अधिक घातक और आधुनिक हो चुकी है. अगर आज फिर से सीमा पार किसी बड़ी कार्रवाई या एयर स्ट्राइक की जरूरत पड़ती है, तो भारत की सेनाएं- भारतीय थल सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना – दुश्मन को पलक झपकते ही मिट्टी में मिलाने की क्षमता रखती हैं.

पिछले 12 महीनों में मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत हमारी सेना में जो बदलाव आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं. आइए विस्तार से समझते हैं कि पिछले एक साल में हमारी ताकत कितनी बढ़ी है.

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वायु सेना: आसमान में ‘तेजस’ और ‘प्रचंड’ का राज

वायु सेना किसी भी स्ट्राइक की पहली पसंद होती है. पिछले एक साल में भारतीय वायु सेना ने अपनी आक्रमण क्षमता में भारी इजाफा किया है.

नए फाइटर जेट्स: पिछले एक साल में LCA तेजस Mk-1A के नए बैच वायुसेना में शामिल किए गए हैं. ये विमान अब और भी एडवांस रडार और मिसाइल सिस्टम से लैस हैं.

प्रचंड हेलिकॉप्टर: दुनिया का इकलौता स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ अब पूरी तरह युद्ध के लिए तैयार है. यह 5000 मीटर की ऊंचाई पर भी दुश्मन के बंकरों को तबाह कर सकता है.

प्रोजेक्ट कुशा: भारत ने अपना स्वदेशी S-400 जैसा एयर डिफेंस सिस्टम ‘प्रोजेक्ट कुशा’ तैयार कर लिया है, जो 350 किमी दूर से ही दुश्मन की मिसाइल को हवा में मार गिरा सकता है.

ड्रोन ताकत: तपस और आर्चर जैसे सशस्त्र ड्रोन्स की तैनाती ने पाकिस्तान की हर हरकत पर 24 घंटे नजर रखना आसान कर दिया है.

नौसेना: समंदर में अभेद्य दीवार

हिंद महासागर और अरब सागर में भारत की वर्चस्व अब निर्विवाद है. पाकिस्तान की छोटी सी नौसेना अब भारत के सामने कहीं नहीं टिकती.

नए युद्धपोत: पिछले एक साल में नौसेना ने INS तारागिरी और INS दूनागिरी जैसे ‘स्टील्थ फ्रिगेट्स’ (दुश्मन की नजर से बचने वाले जहाज) को बेड़े में शामिल किया है.

पनडुब्बी ताकत: परमाणु क्षमता से लैस INS अरिदमन अब समंदर की गहराइयों में गश्त कर रही है, जो दुश्मन के लिए एक खामोश मौत की तरह है.

राफेल-M डील: आईएनएस विक्रांत के लिए 26 राफेल फाइटर जेट (Rafale-M) विमानों का सौदा अंतिम चरण में है, जिसने नौसेना के प्रहार को और भी जानदा बना दिया है.

थलसेना: जमीन पर ‘वज्र’ जैसा प्रहार

जमीनी कार्रवाई के लिए भारतीय सेना ने पिछले एक साल में अपनी तकनीक को पूरी तरह बदल दिया है.

आधुनिक तोपखाना: पहाड़ों पर सटीक निशाना लगाने वाली K9-वज्र और स्वदेशी धनुष तोपों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है.

ड्रोन आर्मी: अब हर बटालियन के पास अपने खुद के आत्मघाती ड्रोन हैं, जो बिना किसी सैनिक को खतरे में डाले दुश्मन के ठिकानों पर जाकर फट जाते हैं.

AK-203 और सुरक्षा: सेना ने लाखों की संख्या में स्वदेशी AK-203 राइफल्स और नई पीढ़ी के बुलेटप्रूफ जैकेटों का इंडक्शन पूरा कर लिया है, जिससे हमारे जवान अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हैं.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद कितना बदला भारत?

मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने हमें एक सबसे बड़ा सबक दिया- कोऑर्डिनेशन का. पिछले एक साल में भारत ने थिएटर कमांड की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं. अब थल सेना, वायु सेना और नौसेना एक ही जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर (JOC) से जुड़ी हुई हैं. इसका मतलब है कि अगर वायुसेना स्ट्राइक करती है, तो नौसेना और थलसेना को रीयल-टाइम डेटा मिलता है.

आज भारत केवल विदेशी हथियारों पर निर्भर नहीं है. पिछले एक साल में हमने 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के हथियार खुद बनाए हैं. आज की तारीख में भारतीय सेना पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ या ‘एयर स्ट्राइक’ को अंजाम देने के लिए 100% तैयार है. हमारी तैयारी अब केवल बचाव की नहीं, बल्कि दुश्मन के घर में घुसकर उसे खत्म करने की है.

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