अयोध्या। अयोध्या की व्यवस्था और विकास मॉडल पर अब संत समाज की ओर से ही सवाल उठाए जाने लगे हैं, ये सवाल बेहद तीखे हैं. दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित अयोध्या पर्व के मंच से अयोध्या हनुमत निवास की पीठाधीश्वर मिथलेश शरण नंदिनी ने ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है.
अयोध्या के विद्वान संत मिथलेश नंदिनी शरण ने अयोध्या के मौजूदा हालात को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि अयोध्या में ‘सांस्कृतिक विध्वंस’ हो रहा है. विकास के नाम पर असल पहचान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. संत ने तंज कसते हुए कहा कि अब लोग हनीमून मनाने के लिए गोवा की जगह अयोध्या आने लगे हैं. ‘क्या यही अयोध्या का विकास है?’
संत ने प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल
अयोध्या के विद्वान संत मिथलेश नंदिनी शरण ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि यहां अगर प्रशासन से तालमेल न हो तो आम आदमी का जीना मुश्किल हो जाता है. यहां तक कि उन्होंने आरोप लगाया कि आपात स्थिति में भी बैरियर नहीं हटाए जाते.
संत परंपरा पर की तीखी टिप्पणी
इसके अलावा उन्होंने संत परंपरा को लेकर भी तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि अयोध्या में संतों को सम्मान देने के बजाय उन्हें गनर देकर “आसामी” बना दिया जाता है. कार्यक्रम के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और पूर्व सांसद लल्लू सिंह भी मंच पर मौजूद थे. अपने संबोधन के अंत में संत मिथलेश नंदिनी शरण ने कहा कि अयोध्या अजेय है. वह अपने साथ हुए हर अन्याय का जवाब समय आने पर जरूर देती है.
अयोध्या के विद्वान संत मिथलेश नंदिनी शरण ने के बयान के बाद बड़ा सवाल यह है कि जिस अयोध्या को आध्यात्म और आस्था की राजधानी के तौर पर विकसित किया जा रहा है. वहीं अगर संत समाज ही इस तरह के आरोप लगाए तो क्या ये संकेत है किसी बड़े असंतोष का है?







