नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है. वह इसलिए क्योंकि इस बार का चुनाव शायद उन 294 सीटों के गणित से तय न हो, जिनका जिक्र चुनावी भाषणों में ज्यादा होता है. बल्कि, यह उन करीब 65-70 सीटों से तय हो सकता है, जहां जीत और हार का फैसला कुछ ही बूथों के अंतर से होता है और जहां वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR ने अचानक चुनावी मैदान का नक्शा ही बदल दिया है.
इनमें नंदीग्राम से भवानीपुर जैसी अहम सीटें शामिल हैं. इनमें उत्तरी 24 परगना का मतुआ बेल्ट भी आता है. साथ ही मुर्शिदाबाद और मालदा के वे इलाके भी आते हैं, जहां अल्पसंख्यकों की आबादी ज्यादा है. 2024 के लोकसभा चुनाव में यहां की विधानसभा सीटों में हार-जीत का अंतर 8 हजार से 15 हजार था. 2021 के विधानसभा चुनावों में इन इलाकों में कई विधायक 1 हजार से 8 हजार वोटों के अंतर से बमुश्किल जीत पाए थे. और अब वोटर लिस्ट से हजारों नाम गायब हो गए हैं.
यही वजह है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बार 2021 से भी बड़ी जीत का दावा कर रही हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दावा कर रहे हैं कि पिछली बार बीजेपी 77 सीटें जीती थीं लेकिन इस बार 170 सीटों का आंकड़ा पार कर लेगी. दोनों ही पार्टियां एक-एक बूथ, एक-एक हटाए गए वोटर और एक-एक करीबी मुकाबले वाली सीट के लिए लड़ रही है. 7 अप्रैल तक पूरे बंगाल में 90.83 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं. यानी, पिछले अक्टूबर तक जितने वोटर थे, उनमें से 11.85% का नाम हट चुका है. इनमें से 27.83 लाख नाम अकेले ‘अंडर एडजुडिकेशन’ यानी ‘जांच के दायरे में’ श्रेणी में हटाए गए हैं.







