नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में बीजेपी का सपना आखिरकार पूरा होने जा रहा है। पार्टी ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है और वह अपने दम पर बहुमत (148) से कहीं ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब होती दिख रही है। वैसे तो पार्टी की जीत के लिए कई वजहों को गिनाया जा रहा है लेकिन पांच ऐसे बड़े कारण हैं जिनके चलते वह टीएमसी को पश्चिम बंगाल की सत्ता से हटा सकी है।
1- महिला वोटर्स का रोल
केंद्र की एनडीए सरकार ने पिछले महीने महिलाओं के लिए विधानसभाओं और लोकसभा में आरक्षण से जुड़ा विधेयक पेश किया था। बीजेपी के नेताओं का कहना है कि इसका अच्छा संदेश गया है। यह विधेयक पारित नहीं हुआ था और बीजेपी के द्वारा विपक्षी दलों को महिला विरोधी बताने का जमीनी स्तर पर काफी असर हुआ।
बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि बीजेपी को मिले महिलाओं के वोटों में कम से कम 5% की बढ़ोतरी हुई है। पश्चिम बंगाल में महिला और पुरुष मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है।
2- सरकारी कर्मचारियों को साधने में कामयाबी
दिल्ली की तरह ही पश्चिम बंगाल में भी केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों की बड़ी संख्या है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, सरकारी कर्मचारियों को उनके हकों से वंचित करना और सातवें वेतन आयोग को लागू करने के वादे की वजह से लगभग 20 से 50 लाख मतदाताओं पर असर पड़ा है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के कर्मचारी शामिल हैं। साथ ही ऐसे युवा मतदाता जो सरकारी नौकरी चाहते हैं, उन पर भी इसका असर हुआ।
शाह ने किया था वादा
बीजेपी ने जब राज्य में ‘परिवर्तन यात्रा’ शुरू की थी तो केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने वादा किया था कि अगर राज्य में बीजेपी की सरकार बनी तो 45 दिनों के अंदर सातवें वेतन आयोग को लागू कर दिया जाएगा और खाली पड़ी सरकारी नौकरियों को भी भर दिया जाएगा।
3- केंद्र का विकास मॉडल और युवा मतदाता
बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की योजनाओं के राज्य में लागू न होने और राज्य में औद्योगिक ढांचे की कमी को पार्टी ने मुद्दा बनाया। भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनाम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नैरेटिव का भी पार्टी को फायदा मिला है। चुनाव आयोग के मुताबिक 5.23 लाख मतदाता ऐसे थे जिन्हें पहली बार वोट डालना था, 1.31 करोड़ मतदाता ऐसे थे, जिनकी उम्र 20 से 29 साल के बीच है। बीजेपी ने सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर काम कर इस वर्ग तक पहुंचने की कोशिश की।
4- सुरक्षा बलों की तैनाती, कानून व्यवस्था का मुद्दा
बीजेपी के सूत्रों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को इस बात का क्रेडिट दिया कि उन्होंने लोगों को वोट डालने के लिए प्रेरित किया। संघ ने लोगों से अपील की कि उन्हें बिना किसी डर के वोट डालना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने पश्चिम बंगाल में केंद्रीय बलों की तैनाती की बात को भी सामने रखा।
चुनाव आयोग ने घोषणा की थी कि चुनाव के बाद भी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 500 कंपनियां राज्य में तैनात रहेंगी। इसके अलावा स्ट्रांग रूम और मतगणना केंद्रों की सुरक्षा के लिए भी सीएपीएफ की 200 कंपनियां राज्य में रहेंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाया और टीएमसी सरकार पर हमला बोला। राज्य में हुए आरजी कर बलात्कार और हत्या जैसे मामलों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठे।
5- एसआईआर/‘बाहरी लोगों’ का मुद्दा
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी की जीत की एक बड़ी वजह एसआईआर भी है। बीजेपी ने इस बात को तय किया कि केवल वास्तविक मतदाता ही अपना वोट दे सकें। बीजेपी ने मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण के लिए अभियान चलाया। पार्टी ने कहा कि मतदाता सूची में बड़ी संख्या में ‘बाहरी लोगों’ के नाम थे। तमाम गड़बड़ियों की वजह से मतदाता सूची से 23 लाख से ज्यादा नाम हटा दिए गए। इस विधानसभा चुनाव में पिछले चुनाव की तुलना में लगभग 30 लाख वोट ज्यादा डाले गए हैं।






