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Home राज्य

बिहार के इस म्यूजियम में है दुनिया के अनोखे रहस्य!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
May 18, 2026
in राज्य
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म्यूजियम 
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पटना: सरकारी प्रयासों से इतर, ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी के लिए सुरक्षित करने का एक अनोखा जुनून बिहार में देखने को मिल रहा है. राज्य में दो ऐसी शख्सियतें हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की गाढ़ी कमाई को सिर्फ और सिर्फ इतिहास को सहेजने में लगा दिया है. पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रांतोष कुमार दास (पीके दास) और आदित्य जालान ने निजी स्तर पर ऐसे अद्भुत संग्रहालय बनवाए हैं, जो आज वैश्विक स्तर पर बिहार का मान बढ़ा रहा है.

म्यूजियम में मौजूद हैं दुनिया के अनोखे रहस्य: पूर्व आईपीएस पीके दास ने भागलपुर में दास ड्रिप वुड म्यूजियम और फॉसिल म्यूजियम स्थापित किया है. इस म्यूजियम में विज्ञान और इतिहास के ऐसे अनमोल रत्न मौजूद हैं, जो दुनिया में कहीं और मिलना मुश्किल है. पीके दास का दावा है कि फॉसिल म्यूजियम में शिशु पृथ्वी का पहला पत्थर, 390 मिलियन साल पुराने पेड़ के अवशेश, डायनासोर के पेड़ों पर काटने के दांतों कि निशान मौजूद हैं.

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जिंदगी भर की कमायी से बनाया म्यूजियम 

3 करोड़ के लागत से बनाया संग्रहालय: पूर्व आईपीएस प्रांतोष कुमार दास ने भागलपुर में एक संग्रहालय स्थापित कर रखी है. पीके दास ने अपने जीवन की पूरी कमाई संग्रहालय को स्थापित करने में लगा दिया है. पीके दास बताते हैं कि मुझे जो पैसे रिटायरमेंट के बाद मिले थे, वह भी संग्रहालय में लगा दिया. इसके अलावा खर्च करने के बाद जो वेतन के पैसे बचते थे, उसे भी संग्रहालय में लगा दिया करते थे. अब तक वह 3 करोड़ से अधिक संग्रहालय में लगा चुके हैं.

शिशु पृथ्वी का प्रथम पत्थर है मौजूद: पीके दास कहते हैं कि पहले मैंने दास ड्रिप वुड म्यूजियम स्थापित किया, उसके बाद फॉसिल म्यूजियम स्थापित करने का काम किया. दास फॉसिल म्यूजियम अपने आप में अकेला म्यूजियम है, जहां ऐसी चीज रखी हुई है जो दुनिया के लिए अनोखी हो सकती है. पीके दास बताते हैं कि हमारे म्यूजियम में शिशु पृथ्वी का प्रथम पत्थर मौजूद है. वह पत्थर टेक्निक्स टकराव के बाद बना था. इसके हमारे पास साक्ष्य भी मौजूद हैं.

शिशु पृथ्वी का प्रथम पत्थर
शिशु पृथ्वी का प्रथम पत्थर, वह प्राचीनतम चट्टान या अवशेष है जो पृथ्वी के निर्माण के शुरुआती दौर, यानी उसके ‘शिशु काल’ में वजूद में आया था. पूर्व आईपीएस प्रांतोष कुमार दास का दावा है कि भागलपुर स्थित फॉसिल म्यूजियम में एक ऐसा अत्यंत दुर्लभ भूवैज्ञानिक पत्थर है जो प्रारंभिक टेक्टोनिक प्लेटों के आपसी टकराव के कारण बना था.

बाल मनोहर जालान म्यूजियम

सबसे पुराना पेड़ का अवशेष: पूर्व आईपीएस पीके दास बताते हैं कि जंगल का स्ट्रक्चर अमेरिका में माना जाता है जो 390 मिलियन साल पुराना है. मेरे पास पहले जंगल के पेड़ का फॉसिल मौजूद है. जब पहली बार ऋतु (मौसम) की शुरुआत हुई थी, तब का जो साक्षी पेड़ था, उसके अवशेष भी हमारे पास मौजूद हैं.

संग्रहालय स्थापित करने में एक करोड़ इन्वेस्टमेंट:आदित्य जालान ने राजधानी पटना के डाक बंगला चौराहे पर एक संग्रहालय स्थापित किया है. लगभग एक करोड़ की लागत से डुमरांव पैलेस में आदित्य ने संग्रहालय स्थापित किया है. संग्रहालय में कई तरह के ऐतिहासिक विरासत को संभाल कर रखा गया है.

संग्रहालय बचाने के लिए गहने रखे थे गिरवी: आदित्य बताते हैं कि मैंने अपने दादाजी से प्रभावित होकर संग्रहालय स्थापित किया है. बाल मनोहर जालान के नाम से संग्रहालय अस्तित्व में आया है. हमारे दादाजी ऐतिहासिक विरासत को संभाल कर रखते थे. पटना सिटी में हमारे दादाजी ने एक संग्रहालय स्थापित कर रखा है जो किसी कारणवश अभी नहीं खुल रहा है.

परिवार में एक बार संकट की स्थिति आ गई थी. तब मेरे दादाजी ने दादी जी से कहा कि संग्रहालय के सामान बेचने होंगे. दादी जी ने संग्रहालय के समान को बेचने के बजाय अपने गहने को गिरवी रख दिये थे.

पटना का शीशा देश भर में था प्रचलित: बाल मनोहर जालान संग्रहालय इन दिनों में लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के मौके पर आदित्य ने मेहमानों के लिए चाय की व्यवस्था की है और एंट्री निशुल्क रखा है. आदित्य के संग्रहालय में 200 से 300 साल पुराने समान जहां उपलब्ध है, वहीं कई पुरानी ऐतिहासिक दस्तावेज भी पटना के इतिहास को कुरेद रहे हैं.

सबसे पुराना पेड़ का अवशेष 

शीशे के ऊपर सोने के पानी की कलाकृति: पटना में बनाया हुआ गिलास एक जमाने में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर कर का हुआ करता था. खास बात यह है कि शीशे के ऊपर सोने के पानी से कलाकृति बनाई जाती थी.

क्यों जरूरी है निजी संग्रहालय?: भारत जैसे देश में हजारों ऐतिहासिक वस्तुएं समय के साथ नष्ट हो रही हैं. सरकारी संग्रहालयों की अपनी सीमाएं हैं. ऐसे में निजी संग्रहालय और व्यक्तिगत संग्रह इतिहास को बचाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.

निजी पहल के कारण कई दुर्लभ दस्तावेज, सिक्के, पांडुलिपियां, हथियार, पुरानी तस्वीरें और सांस्कृतिक वस्तुएं संरक्षित रह पाती हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर हैं. इन सबके बावजूद कई ऐतिहासिक धरोहरें उपेक्षा का शिकार हैं. ऐसे में निजी स्तर पर संग्रहालय खोलना और विरासत को संरक्षित करना बिहार की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

कैसे खोल सकते हैं निजी संग्रहालय: आपको बता दें कि भारत में निजी संग्रहालय स्थापित करने के लिए किसी विशेष केंद्रीय लाइसेंस की अनिवार्यता नहीं है, लेकिन कुछ कानूनी प्रक्रियाओं का पालन जरूरी होता है. संग्रहालय चलाने के लिए संस्था को ट्रस्ट, सोसाइटी या कंपनी के रूप में पंजीकृत होना जरूरी है.

भवन के लिए स्थानीय नगर निकाय से अनुमति, अग्निशमन विभाग की एनओसी और सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी होता है. यदि संग्रहालय में 100 वर्ष से अधिक पुराने पुरावशेष रखे जाएं तो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नियम लागू हो सकते हैं. दुर्लभ ऐतिहासिक वस्तुओं की खरीद-बिक्री और संरक्षण में Antiquities and Art Treasures Act 1972 का पालन करना अनिवार्य होता है.

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