नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग से केंद्रीय कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी सैलरी में बड़ा जंप आए. लेकिन दूसरी तरफ एक ऐसी खबर है जिसे जानकर थोड़ी मायूसी हाथ लग सकती है. दरअसल 8वें वेतन आयोग को लागू होने में जितनी देरी होगी, उससे कर्मचारियों को लाखों का नुकसान हो सकता है. ये नुकसान जुड़ा है हाउस रेंट अलाउंस और ट्रांसपोर्ट अलाउंस को लेकर. इस खबर में आपको इस पूरा मामले के बारे में जानकारी देते हैं.
कैसे हो सकता है कर्मचारियों को नुकसान?
पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को देखें तो सरकार बेसिक पे के साथ महंगाई भत्ते के बैकडेटेड एरियर कर्मचारियों को दे सकती है, लेकिन एचआरए और ट्रांसपोर्ट के साथ दूसरे कई भत्तों के मामले में एरियर देने से अपने हाथ खींच सकती है. यानी कर्मचारियों को इन बड़े भत्तों का कोई भी एरियर नहीं मिलेगा. अगर ऐसा होता है तो कर्मचारियों को लाखों का सीधे नुकसान होगा.
एरियर का क्या है समीकरण?
जैसा आप जानते हैं कि 7वें वेतन आयोग का समय दिसंबर 2025 में पूरा हो गया है. हर 10 साल में नया आयोग गठन किया जाता है. यानी नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाती हैं. ऐसे में 1 जनवरी 2026 से नया 8वां वेतन आयोग लागू होना चाहिए. लेकिन दूसरी तरफ सरकार ने आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया है. इसका मतलब ये कि मार्च 2027 में सरकार को आयोग सिफारिशें देगा. फिर कैबिनेट इसकी स्टडी करेगी. यानी कह सकते हैं कि नियमों को लागू करने में सरकार को 3 से 4 महीने का और समय लग सकता है. यानी नया वेतन आयोग अगस्त 2027 से ही जमीन पर उतर पाएगा. 1 जनवरी 2026 से देखें तो कर्मचारियों का 20 से 22 महीने का एरियर बन रहा है.
कौन-कौन से भत्ते एरियर से हो सकते हैं बाहर
सरकार के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो हाउस रेंट के साथ ट्रांसपोर्ट अलाउंस, यूनिफॉर्म अलाउंस और चिल्ड्रेन एजुकेशन अलाउंस जैसे फिक्स्ड या पॉलिसी-ड्रिवन भत्तों पर एरियर नहीं दिया जाता. इसे हमेशा प्रॉस्पेक्टिवली यानी जब से इसे लागू किया जाता है, तभी से सरकार देना शुरू करती है. हालांकि सरकार इसके लिए बैरडेटेड पेमेंट की नॉटिफिकेशन जारी कर इनका एरियर दे सकती है. सरकार बेसिक पे के साथ महंगाई भत्ते का एरियर अमूमन देती है. अभी के समय में एचआरए शहरों के हिसाब से दिया जाता है. 7वें वेतन आयोग में एचआरए की जदरें 30%, 20% और 10% तय की गईं थीं. हालांकि 8वें वेतन आयोग में इन दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद है. ऐसे में जितनी देरी 8वें वेतन आयोग को लागू करने में होगी, उतना ही कर्मचारियों का नुकसान बढ़ता जाएगा.
बेसिक पे और डीए पर कोई खतरा नहीं
इतिहास देखें तो सरकार हमेशा बेसिक पे और डीए पर कर्मचारियों को एरियर पाने की सुविधा देती है. 1 जनवरी 2026 से लेकर 8वें वेतन आयोग लागू होने की तारीख तक, सरकार इस पीरियड के दौरान बढ़े हुए बेसिक पे और पुराने रेट्स के बीच के अंतर का पूरा एरियर कर्मचारियों के अकाउंट्स में ट्रांसफर करेगी. दूसरी तरफ महंगाई भत्ता हमेशा बेसिक पे के हिस्से के तौर पर तय होता है. इसलिए बेसिक पे के बढ़ते ही डीए का एरियर भी की कैलकुलेट करके कर्मचारियों को दिया जाएगा.
एरियर देना सरकार के लिए बड़ी चुनौती
देश में करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों के साथ 69 लाख से ज्यादा पेंशनहोल्डर्स मौजूद हैं. इसलिए एक साथ 2 साल का सैलरी और पेंशन का एरियर देना सरकार के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती हो सकती है. कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार, जहां 7वें वेतन आयोग को लागू करने पर सरकारी खजाने पर 1.02 लाख करोड़ का बोझ पड़ा था, वहीं 8वें वेतन आयोग में फाइनेंशियल ईयर 2027-28 में सरकार पर 2.4 लाख करोड़ से लेकर 3.2 लाख करोड़ रुपये तक का बोझ पड़ने का अनुमान है.






