नई दिल्ली। भारत जल्द ही कुछ जरूरी कच्चे माल के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी में दी गई छूट को 30 जून के बाद भी जारी रखने पर फैसला करेगा। सरकार के एक सीनियर अधिकारी के हवाले से इकोनॉमिक टाइम्स (ईटी) ने यह जानकारी दी है। डेडलाइन बढ़ाने का यह बड़ा फैसला इसलिए लिया जाएगा ताकि कंपनियों की उत्पादन लागत न बढ़े। बाजार में चीजों के दाम काबू में रहें। साथ ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मदद मिल सके।
अगले हफ्ते होनी है बैठक
- ईरान युद्ध के असर पर नजर रखने वाली अलग-अलग मंत्रालयों की एक कमेटी अगले हफ्ते बैठक करेगी।
- इसमें जरूरी इनपुट पर इंपोर्ट पाबंदियों में ढील देने पर विचार होगा।
- साथ ही स्थानीय स्तर पर बनने वाले कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान और पार्ट्स पर नए इंपोर्ट ड्यूटी लगाने के प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी।
- कमेटी फार्मास्युटिकल और स्टील सेक्टर, खासकर जरूरी दवाओं के लिए इनपुट पर ड्यूटी में कटौती की मांगों पर भी चर्चा करेगी।
अप्रैल में सरकार ने दी थी राहत
ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई में रुकावट के बीच केंद्र ने अप्रैल में प्लास्टिक और फार्मा जैसे डाउनस्ट्रीम सेक्टर को मदद देने के लिए 40 पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी हटा दी थी। प्लास्टिक और दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले इनपुट के लिए अप्रैल में घोषित छूट इस महीने के आखिर में खत्म हो रही है।
अधिकारी ने कहा कि ड्यूटी में कटौती के अलावा कमेटी युद्ध के कारण इनपुट की ज्यादा लागत से प्रभावित उद्योगों, खासकर कच्चे तेल से जुड़े सेक्टर के लिए राहत उपायों पर भी विचार करेगी।
बैठक में वित्त मंत्रालय, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधिकारी और अहम मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
एजेंडे में 3 चीजें होंगी शामिल
अधिकारी ने कहा, ‘एजेंडे में तीन चीजों पर चर्चा होगी। जहां जरूरत हो वहां राहत उपायों को बढ़ाना, कुछ और औद्योगिक इनपुट पर राहत देना और कुछ इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और उत्पादों पर ड्यूटी लगाना जिनमें भारत आत्मनिर्भर है और उनका निर्माण कर सकता है।’
अधिकारी ने आगे कहा कि केंद्र ने उद्योग और छोटे व्यवसायों को किसी भी बाहरी झटके से बचाने के लिए पहले ही कई राहत उपाय किए हैं।
सितंबर तक बढ़ सकती है छूट
अधिकारी के मुताबिक, जहां केंद्र पेट्रोकेमिकल्स पर ड्यूटी में छूट को सितंबर तक बढ़ा सकता है। वहीं, राहत चाहने वाले अन्य उद्योगों में सिरेमिक और डायमंड पॉलिशिंग, पॉलिएस्टर टेक्सटाइल, स्पेशलिटी केमिकल्स, फ्लेक्सिबल पैकेजिंग और ऑटो कंपोनेंट्स शामिल हैं।
अधिकारी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स के इंपोर्ट को सीमित करने का फैसला इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और वाणिज्य मंत्रालय से मिलने वाले इनपुट पर निर्भर करेगा।
इंपोर्ट बास्केट में इलेक्ट्रॉनिक सामान का बड़ा हिस्सा
भारत के इंपोर्ट बास्केट में इलेक्ट्रॉनिक सामान और कंपोनेंट के इंपोर्ट का बड़ा हिस्सा है। वित्त वर्ष 2025-26 में इलेक्ट्रॉनिक सामान का इंपोर्ट कुल 116.2 अरब डॉलर का था। यह सोने के इंपोर्ट से भी ज्यादा है।
सरकार ने गुरुवार को परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए इंपोर्ट किए गए सामान पर कस्टम ड्यूटी माफ कर दी। इसमें 1 अप्रैल, 2019 और 31 जनवरी, 2026 के बीच किए गए इंपोर्ट शामिल हैं।
यह कदम देश के परमाणु ऊर्जा सेक्टर में इस्तेमाल होने योग्य इंपोर्ट के लिए पिछली तारीख से टैक्स में राहत देता है। इससे ऑपरेटरों और उपकरण सप्लायरों के लिए प्रोजेक्ट की लागत कम होने की उम्मीद है।







