मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक भूचाल आने की संभावना जताई जा रही है। खबरें हैं कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 से 7 सांसद पार्टी छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं या फिर अलग गुट बना सकते हैं। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने खुलकर इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम ने इन अटकलों को तेज कर दिया है। आइये इस पूरे विश्लेषण को एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से विस्तार में समझते हैं।
मातोश्री की बैठक से शुरू हुई अटकलें
14 जून को उद्धव ठाकरे ने अपने निवास ‘मातोश्री’ पर पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में नौ में से केवल चार सांसद ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए, जबकि पांच सांसद ऑनलाइन जुड़े। इसके बाद से ही पार्टी में संभावित टूट की चर्चाएं शुरू हो गईं।
ऑनलाइन शामिल होने वाले सांसदों में संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), नागेश पाटील (हिंगोली), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी) और ओमराजे निंबालकर (धाराशिव) शामिल थे। वहीं अरविंद सावंत, अनिल देसाई, संजय दीना पाटिल और राजाभाऊ वाजे बैठक में प्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहे।
सांसदों की आपात बैठक बुलाई गई
बढ़ती अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) सांसद अनिल देसाई ने सभी सांसदों की बैठक 18 जून को सुबह 11 बजे संसद भवन स्थित पार्टी कार्यालय में बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में मौजूदा राजनीतिक स्थिति और सांसदों की निष्ठा पर चर्चा होगी।
संजय राउत के बयानों से बढ़ीं चर्चाएं
16 जून को सांसदों की संभावित बगावत की खबरों के बीच शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए करोड़ों रुपये की पेशकश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रत्येक सांसद को 15 करोड़ रुपये एडवांस दिए जाने की जानकारी मिली है। बाद में उन्होंने दावा किया कि कुछ सांसदों की “बेस प्राइस” 50 करोड़ रुपये तक तय की गई है।
राउत ने यह भी कहा कि “शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस जैसे दल आज भी राजनीतिक रूप से मजबूत ब्रांड हैं, इसलिए उनके जनप्रतिनिधियों को तोड़ने की कोशिशें की जा रही हैं।”
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि “शिवसेना ने अपने 60 साल के इतिहास में कई बड़े झटके झेले हैं और पार्टी केवल सांसदों या विधायकों पर नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की ताकत पर खड़ी है।”
लोकसभा अध्यक्ष को भेजा गया महत्वपूर्ण पत्र
दक्षिण मुंबई से सांसद और शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भेजा है। पत्र में मांग की गई है कि संसद में शिवसेना (यूबीटी) को ही आधिकारिक राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जाती रहे और किसी संभावित अलग गुट या बागी समूह को कोई विशेष दर्जा या सुविधा न दी जाए।
साथ ही पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि दल-बदल की कोई स्थिति उत्पन्न होती है तो वह संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का उपयोग करेगी। राजनीतिक गलियारों में इस पत्र को संभावित बगावत की आशंका से जोड़कर देखा जा रहा है।
सुषमा अंधारे का भाजपा पर आरोप
शिवसेना (यूबीटी) नेता सुषमा अंधारे ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भाजपा की राजनीतिक रणनीति होने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि “यह केवल उद्धव ठाकरे की पार्टी का मामला नहीं है, बल्कि देशभर में विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा विपक्षी दलों को तोड़कर राजनीतिक बढ़त हासिल करना चाहती है।
शिंदे गुट क्या कह रहा है?
एकनाथ शिंदे गुट के सांसद नरेश म्हस्के ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे से उनके अपने सांसद, विधायक और कार्यकर्ता नाराज हैं। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस के साथ गठबंधन और हिंदुत्व की मूल विचारधारा से दूरी इसकी प्रमुख वजह है।”
वहीं शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता कृपाल तुमाने ने दावा किया कि “तथाकथित “ऑपरेशन टाइगर” अंतिम चरण में पहुंच चुका है और 7 सांसदों तथा 16 विधायकों के दल-बदल को लेकर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है।”
हालांकि महाराष्ट्र सरकार में मंत्री उदय सामंत ने ऐसे सभी दावों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि शिवसेना को किसी सांसद को तोड़ने की आवश्यकता नहीं है और न ही शिंदे गुट की ओर से यूबीटी सांसदों के साथ कोई औपचारिक बातचीत हुई है।
क्या है ‘ऑपरेशन टाइगर’?
पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में “ऑपरेशन टाइगर” चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि “उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसद शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।”
हालांकि अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से दल बदलने की घोषणा नहीं की है। यही वजह है कि पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक अटकलें और दावे-प्रतिदावे जारी हैं।
उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका ?
महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना पहले ही 2022 में बड़ी टूट का सामना कर चुकी है। अब यदि लोकसभा सांसदों का एक बड़ा वर्ग भी पार्टी से अलग होता है तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
फिलहाल सभी निगाहें 18 जून को होने वाली सांसदों की बैठक और संभावित राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह केवल राजनीतिक अटकल है या फिर महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा सत्ता समीकरण बदलने वाला घटनाक्रम।







