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Home राजनीति

शिवसेना यूबीटी को लगेगा एक और झटका! छिन सकता है संसद भवन का ऑफिसशिव

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 24, 2026
in राजनीति, राज्य
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shiv sena ubt
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नई दिल्ली। लोकसभा सांसदों की बग़ावत के झटके से उबर रही शिवसेना यूबीटी को एक और बड़ा झटका लगने जा रहा है. सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार उसके छह सांसदों के शिवसेना शिंदे में विलय के बाद संसद भवन परिसर में मिले उसके ऑफ़िस के छिनने की संभावना भी बढ़ जाएगी. इस घटनाक्रम को स्पीकर की औपचारिक मंज़ूरी मिलने के बाद शिवसेना यूबीटी के संसदीय दल में केवल चार सांसद ही बचेंगे.

जबकि सामान्यतः केवल पांच या उससे अधिक सांसदों वाले दलों को ही संसद भवन परिसर में ऑफिस मिलता है. साथ ही, महत्वपूर्ण विषयों पर बुलाई जाने वाली सर्वदलीय बैठकों में उसकी भागीदारी पर भी प्रश्न चिन्ह लगेगा क्योंकि सामान्यतः पांच से कम सांसदों वाले दलों को इन बैठकों में नहीं बुलाया जाता है. अभी शिवसेना यूबीटी के संसदीय दल का ऑफ़िस संविधान सदन (पुराने संसद भवन) के रूम नंबर 128 A में है. यह अविभाजित शिवसेना के ऑफ़िस 128 के बग़ल में ही है.

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दरअसल, शिवसेना में हुई ऐतिहासिक टूट का संसद भवन परिसर में उनके पार्टी ऑफिस पर बहुत सीधा और बड़ा असर पड़ा था. संसद भवन परिसर (संविधान सदन) का कमरा नंबर 128 पारंपरिक रूप से अविभाजित शिवसेना का संसदीय दल कार्यालय हुआ करता था. 2022 में जब पार्टी में दोफाड़ हुई, तो शुरुआती कुछ महीनों तक दोनों गुटों (उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट) के सांसद इसी एक कमरे का इस्तेमाल करते रहे.

फ़रवरी 2023 में चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को ‘असली शिवसेना’ के रूप में मान्यता दी. उन्हें “तीर-कमान” का चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया. इसके तुरंत बाद, शिंदे गुट के लोकसभा नेता राहुल शेवाले ने लोकसभा सचिवालय को पत्र लिखकर संसद कार्यालय पर दावा ठोका.

चुनाव आयोग के फैसले को आधार बनाते हुए लोकसभा सचिवालय ने फरवरी 2023 में कमरा नंबर 128 आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट (शिवसेना) को आवंटित कर दिया. इसके चलते उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट (शिवसेना यूबीटी) को इस मूल कार्यालय से हाथ धोना पड़ा और वहां से हटना पड़ा. द में संसद भवन परिसर में शिवसेना (यूबीटी) को कमरा नंबर 128-ए आवंटित किया गया. यह उनके पुराने मूल कार्यालय (कमरा नंबर 128) के बिल्कुल बगल में ही स्थित है.

क्या है नियम?

संसद भवन परिसर में राजनीतिक दलों को कार्यालय आवंटित करने की प्रक्रिया और नियम मुख्य रूप से सदन में पार्टी की सदस्य संख्या और लोकसभा अध्यक्ष व राज्यसभा सभापति के विवेकाधिकार पर निर्भर करते हैं. इसके लिए कोई तयशुदा लिखित वैधानिक कानून नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से चली आ रही संसदीय परंपराओं, दिशा-निर्देशों और ‘हाउस कमिटी’  के नियमों के तहत तय होता है. इसमें मुख्य रूप से सांसदों की संख्या ही मुख्य आधार है. संसद भवन के भीतर किसी भी राजनीतिक दल को कमरा या कार्यालय मिलने का सबसे पहला और बड़ा पैमाना यह है कि दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) को मिलाकर उस दल के पास कितने सांसद हैं. जिस दल के जितने अधिक सांसद होंगे, उसे उसी अनुपात में बड़ा या प्रमुख स्थान आवंटित किया जाता है.

राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के लिए वरीयता दी जाती है. चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों (जैसे बीजेपी , कांग्रेस आदि) को संसद परिसर में अनिवार्य रूप से कार्यालय आवंटित किया जाता है. जिन क्षेत्रीय दलों के पास संसद में पाँच से अधिक सांसद होते हैं (जैसे डीएमके, टीएमसी, एसपी आदि), उन्हें भी उनकी सदस्य संख्या के आधार पर परिसर में जगह मिलती है.

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