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Home धर्म

भारत का ऐसा मंदिर, जहां आज भी बिना पुजारी के होती है आरती!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 18, 2026
in धर्म
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ज्वालामुखी मंदिर
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नई दिल्ली। भारत के मंदिर केवल आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि अपने रहस्यों और अनोखी परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध हैं. इन्हीं में से एक है ज्वालामुखी मंदिर, जिसे मां ज्वाला देवी का पवित्र शक्तिपीठ माना जाता है. यहां सदियों से एक ऐसी परंपरा प्रचलित है, जिसने लाखों श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया है.

मान्यता है कि इस मंदिर में मां ज्वाला स्वयं अनंत ज्योति के रूप में विराजमान हैं. इसी कारण यहां आरती का केंद्र कोई मूर्ति नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से प्रज्वलित दिव्य ज्योतियां हैं.

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क्या है बिना पुजारी के आरती की परंपरा?

इस मंदिर को लेकर कई लोग कहते हैं कि यहां “बिना पुजारी के आरती होती है”. वास्तव में इसका अर्थ यह नहीं है कि मंदिर में पुजारी नहीं होते. मंदिर में दैनिक पूजा और आरती पुजारियों द्वारा ही संपन्न कराई जाती है, लेकिन धार्मिक मान्यता यह है कि मां की दिव्य ज्योतियां स्वयं प्रज्वलित रहती हैं और उनकी महिमा स्वयं प्रकट होती है. इसलिए कई श्रद्धालु इसे प्रतीकात्मक रूप से “स्वयं होने वाली आरती” या “बिना पुजारी के आरती” की परंपरा के रूप में वर्णित करते हैं.

क्यों है यह मंदिर इतना विशेष?

इस शक्तिपीठ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां देवी की पारंपरिक प्रतिमा नहीं है. गर्भगृह में धरती से निकलती प्राकृतिक अग्नि की कई ज्योतियों की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि ये ज्योतियां कभी बुझती नहीं हैं और इन्हें मां ज्वाला का साक्षात स्वरूप माना जाता है.

पुराणों के अनुसार, जब माता सती ने योगाग्नि में अपना शरीर त्याग दिया, तब भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करने लगे. भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के विभिन्न अंग अलग किए, जो पृथ्वी पर अलग-अलग स्थानों पर गिरे. इन्हीं स्थानों को शक्तिपीठ कहा जाता है.

मान्यता है कि ज्वालामुखी मंदिर में माता सती की जिह्वा (जीभ) गिरी थी. इसलिए यहां देवी अग्नि की ज्योति के रूप में विराजमान हैं.

ज्योतिषाचार्य नीतिका शर्मा के अनुसार, ज्वाला देवी की अखंड ज्योति केवल अग्नि नहीं, बल्कि दिव्य शक्ति, आत्मबल और चेतना का प्रतीक मानी जाती है. उनका कहना है कि इस मंदिर में श्रद्धा से दर्शन और पूजा करने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा भय और नकारात्मकता दूर होने की धार्मिक मान्यता है.

यहां आने वाले श्रद्धालु क्या मानते हैं?

भक्तों का विश्वास है कि मां ज्वाला के दर्शन से-

  • मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
  • जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.
  • साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है.
  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
  • नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है.

ये धार्मिक मान्यताएं हैं और विभिन्न श्रद्धालुओं की आस्था पर आधारित हैं.

मंदिर से जुड़ी रोचक बातें

  • यह 51 प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है.
  • यहां देवी की मूर्ति नहीं, बल्कि प्राकृतिक ज्योतियों की पूजा होती है.
  • नवरात्रि में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
  • मंदिर भारत के प्रमुख शक्ति उपासना केंद्रों में गिना जाता है.

ज्वालामुखी मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं, अखंड ज्योति और धार्मिक महत्व के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. हालांकि “बिना पुजारी के आरती” को अक्सर प्रतीकात्मक रूप में कहा जाता है, वास्तविकता यह है कि मंदिर में नियमित पूजा-पद्धति पुजारियों द्वारा ही संपन्न होती है, जबकि मां की स्वयं प्रज्वलित ज्योतियां इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती हैं.

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