Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home विशेष

अभद्रता का महिमामंडन : क्या हम अपनी सामाजिक संस्कृति खो रहे हैं?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 31, 2026
in विशेष
A A
भारतीय समाज
26
SHARES
858
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नितिन सक्सेना


नई दिल्ली: भारतीय समाज की आत्मा उसकी सभ्यता, शिष्टता और संवाद की परंपरा में निहित रही है। यहां मतभेदों का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि विचारों का इतिहास, किंतु इन मतभेदों को व्यक्त करने की एक मर्यादा भी रही है। दुर्भाग्य से, वर्तमान समय में हम एक ऐसी प्रवृत्ति को बढ़ते हुए देख रहे हैं, जिसमें अभद्रता को न केवल स्वीकार किया जा रहा है, बल्कि उसका महिमामंडन भी किया जा रहा है। यह प्रवृत्ति किसी एक वर्ग, विचारधारा अथवा मंच तक सीमित नहीं है; यह सार्वजनिक जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में दिखाई देने लगी है।

इन्हें भी पढ़े

us midterm elections

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के नेताओं का दबदबा, पिया डंडिया, अरुणा मिलर और सुहास सुब्रमण्यम ने दर्ज की शानदार जीत

November 4, 2026
cm dhami

CM धामी ने केंद्रीय वन मंत्री से की भेंट, हल्द्वानी में उच्च न्यायालय के स्थायी परिसर निर्माण के प्रस्ताव पर की चर्चा

November 4, 2026
pm modi

पुणे मेट्रो को मिली विकास की नई रफ्तार, पीएम मोदी ने 21,800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का किया शुभारंभ

November 4, 2026
Energy Stack Taskforce

इंडिया एनर्जी स्टैक टास्कफोर्स ने अंतिम रिपोर्ट की समीक्षा की और राष्ट्रीय स्तर पर इसे लागू करने की रूपरेखा तैयार की

October 30, 2026
Load More

आज स्थिति यह है कि जितनी तीखी भाषा, उतनी अधिक चर्चा; जितना बड़ा विवाद, उतनी अधिक लोकप्रियता। सोशल मीडिया के युग में यह समीकरण और भी स्पष्ट दिखाई देता है। संयमित और तथ्यपूर्ण वक्तव्य अक्सर भीड़ में दब जाते हैं, जबकि उत्तेजक, अपमानजनक और अशोभनीय टिप्पणियां देखते ही देखते लाखों लोगों तक पहुंच जाती हैं। इससे एक खतरनाक संदेश समाज में प्रसारित होता है यदि आपको सुर्खियों में रहना है, तो मर्यादा छोड़ दीजिए।

यह प्रश्न केवल भाषा का नहीं है, बल्कि सामाजिक चरित्र का भी है। किसी भी राष्ट्र का निर्माण केवल सड़कों, भवनों और आर्थिक विकास से नहीं होता; उसका वास्तविक निर्माण उसके नागरिकों के आचरण और मूल्यों से होता है। जब सार्वजनिक जीवन में अभद्रता को सामान्य बना दिया जाता है, तब धीरे-धीरे समाज की सामूहिक संवेदनशीलता क्षीण होने लगती है।

चिंता का विषय यह है कि अभद्रता को अब कई बार “निर्भीकता” और “स्पष्टवादिता” का पर्याय बना दिया जाता है। किसी का अपमान करना, कटाक्ष के नाम पर व्यक्तिगत हमले करना, सार्वजनिक मंचों पर अश्लील भाषा का प्रयोग करना इन सबको एक वर्ग द्वारा साहसिक आचरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। जबकि सत्य यह है कि निर्भीकता और अभद्रता दो अलग-अलग बातें हैं। निर्भीक व्यक्ति अपनी बात दृढ़ता से कहता है; अभद्र व्यक्ति अपनी भाषा से स्वयं को कमजोर सिद्ध करता है।

लोकतंत्र में असहमति का सम्मान किया जाता है। लोकतंत्र की शक्ति ही यह है कि वह भिन्न विचारों को स्थान देता है। किंतु असहमति को यदि अपमान का रूप दे दिया जाए, तो संवाद की संभावनाएं समाप्त होने लगती हैं। जब तर्क समाप्त हो जाते हैं, तब अक्सर अभद्रता आरंभ होती है। यह स्थिति किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए शुभ संकेत नहीं मानी जा सकती।

इस प्रवृत्ति का सबसे अधिक प्रभाव युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है। बच्चे और युवा अपने समय के सार्वजनिक व्यक्तित्वों को देखकर सीखते हैं। यदि वे यह देखेंगे कि मर्यादा का पालन करने वाले लोगों की अपेक्षा आक्रामक और अभद्र भाषा का प्रयोग करने वालों को अधिक प्रसिद्धि और समर्थन प्राप्त हो रहा है, तो वे स्वाभाविक रूप से उसी को सफलता का मानक मानने लगेंगे। यह स्थिति आने वाले समय में सामाजिक संवाद को और अधिक विषाक्त बना सकती है।

भारतीय परंपरा ने सदैव वाणी को विशेष महत्व दिया है। हमारे शास्त्रों में वाणी को तप कहा गया है। संतों और महापुरुषों ने सिखाया कि कठोर से कठोर सत्य भी गरिमामय भाषा में कहा जा सकता है। हमारे सार्वजनिक जीवन में भी अनेक ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जहाँ तीव्र वैचारिक और राजनीतिक संघर्ष के बावजूद भाषा की मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया गया। विरोध हुआ, तीखी आलोचना भी हुई, परंतु शब्दों की शालीनता और संवाद की गरिमा बनी रही। यह परंपरा हमें स्मरण कराती है कि विचारों की दृढ़ता का प्रमाण कटु भाषा नहीं, बल्कि संयमित और तर्कपूर्ण अभिव्यक्ति है। शब्द जितने मर्यादित होते हैं, उनका प्रभाव उतना ही गहरा और स्थायी होता है।

मीडिया और डिजिटल मंचों की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। यदि समाज का ध्यान केवल उन्हीं व्यक्तियों और घटनाओं की ओर आकर्षित किया जाएगा, जो विवाद और कटुता को बढ़ावा देते हैं, तो यह प्रवृत्ति और मजबूत होगी। इसलिए मीडिया संस्थानों, सामाजिक मंचों और नागरिकों सभी को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम यह तय करें कि हम किस प्रकार का समाज आने वाली पीढ़ियों को सौंपना चाहते हैं। क्या हम ऐसा समाज चाहते हैं, जहां असहमति का उत्तर अपमान से दिया जाए? जहां लोकप्रियता का आधार शिष्टाचार नहीं, बल्कि अशिष्टता हो? या फिर हम ऐसा समाज चाहते हैं, जहां विचारों का संघर्ष हो, लेकिन मनुष्यता और मर्यादा सुरक्षित रहे?

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आधारशिला है, किंतु प्रत्येक स्वतंत्रता अपने साथ उत्तरदायित्व भी लेकर आती है। यदि हम अभद्रता को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पर्याय मानने लगेंगे, तो अंततः हम संवाद की उस संस्कृति को खो देंगे, जिसने भारतीय समाज को सदियों तक जीवंत बनाए रखा है।

समय आ गया है कि अभद्रता के महिमामंडन को सामाजिक स्वीकृति देने के बजाय उसे चुनौती दी जाए। असहमति बनी रहनी चाहिए, आलोचना भी होनी चाहिए, किंतु उसके केंद्र में तर्क, तथ्य और शालीनता होनी चाहिए। क्योंकि किसी समाज की वास्तविक शक्ति उसके शब्दों की ऊंचाई में नहीं, बल्कि उसके संस्कारों की गहराई में निहित होती है।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
kedarnath

चारधाम यात्रा : उत्तराखण्ड सरकार की व्यवस्थाओं से श्रद्धालु प्रफुल्लित

May 4, 2025
CM Dhami

CM धामी ने लिया उत्तराखण्ड में चल रहे विकास कार्यों का जायजा

March 27, 2023

वेकोलि ने मनाया सोल्लास ‘विश्व पर्यावरण दिवस’

June 5, 2024
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • विराट कोहली के तूफान में उड़ा न्यूजीलैंड, टीम इंडिया ने जीता पहला वनडे मुकाबला
  • बिहार में विकसित होंगे 5 नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर? 13 हजार एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू
  • 30 साल तक बंद रहा खाद कारखाना, अब गोरखपुर बना रहा नई पहचान : नितिन नवीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.