प्रकाश मेहरा
एक्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती ताकत का एक और उदाहरण सामने आया है। मिडटर्म चुनाव के नतीजों में तीन भारतीय-अमेरिकी नेताओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की है। पीया डंडिया, अरुणा मिलर और सुहास सुब्रमण्यम की सफलता ने अमेरिकी राजनीति में भारतीय समुदाय की मजबूत होती भागीदारी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजे सामने आने के साथ ही भारतीय मूल के नेताओं की उपलब्धियों ने सबका ध्यान आकर्षित किया है। इन चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े पीया डंडिया, अरुणा मिलर और सुहास सुब्रमण्यम ने अपनी-अपनी सीटों पर जीत दर्ज की है।
पीया डंडिया ने फ्लोरिडा में दर्ज की बड़ी जीत
भारतीय मूल की पिया डंडिया ने फ्लोरिडा से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीतकर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार और पूर्व मरीन सैनिक केसी अस्कर को कड़े मुकाबले में पराजित किया।
घोषित नतीजों के अनुसार, पिया डंडिया को 51.9 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी केसी अस्कर को 49.1 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। इस जीत के साथ पीया डंडिया अमेरिकी कांग्रेस की नई भारतीय-अमेरिकी सदस्य बन गई हैं।
पिया डंडिया के माता-पिता भारत से अमेरिका आकर बसे थे। उन्होंने कम आय वाले परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक हाई स्कूल की स्थापना भी की थी। उनकी यह पहल शिक्षा के माध्यम से सामाजिक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया में दोहराया जीत का प्रदर्शन
भारतीय मूल के सुहास सुब्रमण्यम ने भी वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से शानदार जीत दर्ज की है। 40 वर्षीय सुहास डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हैं और उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस में एक बार फिर अपनी जगह सुनिश्चित की है।
चुनावी नतीजों के मुताबिक, सुहास को कुल मतों में 61.5 प्रतिशत से अधिक वोट मिले, जबकि उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी डेव बेकविथ को 36.4 प्रतिशत मत प्राप्त हुए।
सुहास के माता-पिता भारतीय मूल के हैं। वह पहले राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके हैं। उनकी लगातार चुनावी सफलता अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की बढ़ती राजनीतिक स्वीकार्यता और प्रभाव को दर्शाती है।
अरुणा मिलर ने फिर हासिल की जीत
भारतीय-अमेरिकी नेता अरुणा मिलर ने भी अपनी राजनीतिक सफलता का सिलसिला जारी रखा है। वह मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में एक बार फिर चुनी गई हैं।
अरुणा मिलर ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब क्रॉप को हराकर जीत हासिल की। रॉब क्रॉप राज्य के पूर्व डेलीगेट डैन कॉक्स के साथी उम्मीदवार थे।
अरुणा मिलर की यह जीत मैरीलैंड की राजनीति में उनकी मजबूत स्थिति को दर्शाती है। भारतीय मूल से जुड़ी उनकी राजनीतिक यात्रा अमेरिका में प्रवासी समुदाय की बढ़ती भागीदारी का भी उदाहरण है।
अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती ताकत
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में पिया डंडिया, अरुणा मिलर और सुहास सुब्रमण्यम की जीत केवल तीन नेताओं की व्यक्तिगत राजनीतिक सफलता नहीं है, बल्कि यह अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी और प्रभाव को भी रेखांकित करती है।
शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक कार्य और राजनीतिक नेतृत्व के विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय-अमेरिकी समुदाय अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। इन नेताओं की जीत से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था में भारतीय मूल के नागरिकों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।







