Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

विपक्ष क्‍यों कर रहा FCRA बिल का विरोध?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 10, 2026
in राष्ट्रीय
A A
fcra bill
20
SHARES
677
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के तीन हफ्ते हंगामे की भेंट चढ़ गए. आज यानी 10 अगस्त से मानसून सत्र का चौथा और आखिरी हफ्ता शुरू होने जा रहा है. इसी बीच विदेश अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA) बिल पर लोकसभा में 12 अगस्त को चर्चा हो सकती है. इस बिल का विरोध विपक्षी दल शुरू से करते आ रहे हैं. मार्च 2026 में लोकसभा में रखे गए इस बिल पर अभी चर्चा नहीं हो सकी है.

ऐसे में सवाल है कि साल 1976 में पहली बार विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम बिल लाने वाली कांग्रेस पार्टी आखिर FCRA संशोधन बिल का विरोध क्यों कर रही है. बता दें कि कांग्रेस के साथ डीएमके, टीएमसी समेत कई विपक्षी दल इस बिल के विरोध में एकजुट नजर आ रहे हैं.

इन्हें भी पढ़े

Ladakh

भारत सरकार ने लद्दाख की 28 जगहों के आधिकारिक नाम तय किए, अक्साई चिन भी शामिल

October 3, 2026
Dr. Ambedkar

एकात्म मानवदर्शन के बहुत निकट था डॉ अम्बेडकर का आर्थिक दृष्टिकोण

October 3, 2026
RSS

संघ को समझने का प्रयास है पुस्तक – आरएसएस @100

October 3, 2026
stock market

भारत में आर्थिक विकास की गति तेज रहने के बावजूद क्यों गिर रहा है शेयर बाजार

October 3, 2026
Load More

क्या है सरकार की कोशिश?

केंद्र सरकार की कोशिश है कि विदेश अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 संसद से पास हो जाए. माना जा रहा है कि इस बिल पर चर्चा के लिए सदन में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रह सकते हैं. विपक्ष ने एफसीआरए बिल का विरोध करना शुरू कर दिया है.

हालांकि, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि सरकार परिसीमन के लिए डीएमके और एनसीपी (एसपी) को लुभाने के उद्देश्य से एफसीआरए बिल पर धीमी गति से काम कर रही है. ऐसा करके सरकार एक ‘नरम’ रास्ता खोजने की कोशिश में है.

FCRA बिल के विरोध में क्यों है विपक्ष?

हाल में ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट किया था कि कांग्रेस पार्टी एफसीआरए बिल का विरोध करेगी. आज यानी सोमवार को विपक्षी दलों के फ्लोर नेताओं की बैठक के दौरान इस विषय पर चर्चा होने की संभावना है.

असली विवाद यहां है

रिपोर्ट्स के अनुसार, एफसीआरए बिल के तीन सेक्शन पर विवाद हो रहा है. इनमें सेक्शन 14B, सेक्शन 16A और सेक्शन 16B शामिल है. इसमें सेक्शन 14B FCRA सर्टिफिकेट के खत्म होने की बात करता है. इस सेक्शन के अनुसार, अगर कोई भी संस्था नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं करती है, तो उसका नवीनीकरण मंजूर नहीं किया जाएगा.

वहीं, अगर बिना रिन्यू किए अगर समयसीमा खत्म होती है, तो उसका सर्टिफिकेट भी खत्म हो जाएगा. इसके अलावा 16A में प्रस्ताव है कि किसी भी संस्था का सर्टिफिकेशन अगर समाप्त हो जाता है, तो उसको मिलने वाले विदेशी फंड या उसकी संपत्तियां एक निर्धारित अथॉरिटी के अधिकार में आएंगी. इसका सीधा मतलब है कि संस्था की संपत्ति पर किसी एक निर्धारित अथॉरिटी का कंट्रोल दिखेगा.

रिपोर्ट्स के अनुसार, विवाद का असली मुद्दा बिल का सेक्शन 16B है. यहा पुराने कानून के तहत पहले से किसी अथॉरिटी के अधिकार में आई संपत्तियों पर नया नियम लागू करता है. इसका सीधा असर उन संस्थाओं पर पड़ेगा, जिनका रजिस्ट्रेशन सालों पहले खत्म हो गया है और वह वर्तमान में घरेलू फंड पर काम कर रही हैं.

कांग्रेस ने बिल को बताया असंवैधानिक

कांग्रेस महासचिव के.सी वेणुगोपाल का दावा है कि एफसीआरए बिल असंवैधानिक है. उन्होंने यहां तक आशंका जता दी है कि इस नए कानून के लागू होने के बाद एनजीओ और कम्यूनिटी ग्रुप्स को काफी नुकसान हो सकता है. उन्होंने चिंता जताई कि नए बिल के बाद अल्पसंख्यक संगठनों की ओर से चलाए जा रहे एनजीओ को नुकसान होने का खतरा है.

कांग्रेस नेता का कहना है कि इस बिल की मदद से संगठन, विशेषकर केरलम में ईसाई समूहों को डराने और उन पर नियंत्रण करने की जानबूझकर कोशिश की गई है. उन्होंने दावा किया कि इस बिल का असर स्वैच्छिक सेवा संगठनों पर देखने को मिल सकता है.

टीएमसी ने लिखा पीएम मोदी को पत्र

इधर, तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने इस बिल के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है. हाल में ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. टीएमसी नेता का कहना है कि प्रस्तावित कानून से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्रों में काम करने वाले एनजीओ और अन्य संगठनों पर कार्यपालिका का अत्यधिक नियंत्रण देखने को मिल सकता है. जिसका बुरा प्रभाव संगठनों पर पड़ने की उम्मीद है.

ड्रविण मुनेत्र कड़गम (DMK) के अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व सीएम एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार से एफसीआरए बिल वापस लेने और कानून की 2010 की धारा 15 को रद्द करने की डिमांड रखी है. वहीं, डीएमके ने बिल को संयुक्त संसदीय समिति यानी (JPC) में भेजने की वकालत की है. केरल में कैथोलिक चर्च ने भी मौजूदा FCRA कानून में होने वाले बदलावों को लेकर चिंता जताई है.

DMK और NCP-SP को साधने में क्यों जुटी सरकार?

राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा भी की जा रही है कि इस बिल को जल्दीबाजी में आगे बढ़ाने के बजाय, सरकार कुछ समय के लिए धीमी गति से आगे बढ़ा रही है. माना जा रहा है कि सरकार ऐसा करके डीएमके और एनसीपी (एसपी) जैसे विपक्षी दलों को साधने का काम कर रही है.

चूंकि, सरकार की प्राथमिकता परिसीमन बिल है. ऐसे में परिसीमन पक्रिया और 2029 से महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी. डीएमके और NCP (SP) FCRA बिल का विरोध कर रही हैं और सरकार इन दोनों दलों को परिसीमन और महिला आरक्षण पर संभावित समर्थन के रूप में देख रही है. यही कारण है कि सरकार FCRA बिल पर थोड़ी नरम नजर आ रही है.

क्या है एफसीआरए बिल?

Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) Amendment Bill भारत में विदेशों से मिलने वाले चंदे या आर्थिक सहायता को नियंत्रण करने वाला एक कानून है. यह बिल साल 1976 में आए एफसीआरए कानून में संशोधन से जुड़ा है. तत्कालीन कांग्रेस सरकार में आए FCRA कानून का उद्देश्य विदेशी धन से देश के आंतरिक मामलों या किसी संस्था पर कोई  गलत प्रभाव पड़ने से रोकना था.

FCRA बिल में किए जाने वाले संशोधन

केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए FCRA संशोधन बिल में एक तय अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव है. इसका सीधा मतलब है कि किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन अगर समाप्त हो जाता है, तो यह अथॉरिटी विदेशी चंदे का पूरा कंट्रोल ले लेगी. ऐसे में विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियां शुरू में तय अथॉरिटी के ही कंट्रोल में रहेंगी.

सबसे खास बात है कि इसके बाद भी अगर संस्था एक निर्धारित समय के भीतर अपना रजिस्ट्रेशन फिर से नहीं हासिल कर पाती है, तो बाद में इन्हीं संपत्तियों को पूरी तरीके से ट्रांसफर किया जा सकेगा. आवश्यकता पड़ने पर अथॉरिटी के पास संपत्तियों को मैनेज करने का अधिकार भी इन संस्थाओं पर होगा.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

सड़क किनारे पड़ी थी नोटों की कतरन से भरी बोरी, खोलते ही राहगीरों के उड़े होश!

May 16, 2024
brics 2024

BRICS सम्मेलन में अपने हितों को रखते विश्व के देश!

October 25, 2024
Guldar

गुलदार से गगवाड़स्यूँ  पट्टी में दशहत, लगाया गया पिंजरा 

November 15, 2022
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • CM रेखा गुप्ता का ओखला लैंडफिल दौरा, 2026 के अंत तक कूड़े के पहाड़ को खत्म करने का किया दावा
  • न अमेरिका-ईरान के बीच डील हुई, न होर्मुज खुला, फिर भी गिरे कच्चे तेल के दाम
  • भारत सरकार ने लद्दाख की 28 जगहों के आधिकारिक नाम तय किए, अक्साई चिन भी शामिल

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.