नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग पर गंभीरता से बात चल रही है। ब्रिक्स शिखर सम्मलेन के लिए जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले हफ्ते दिल्ली आएंगे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी जो बातचीत होगी, उसमें इसबार यह एक अहम एजेंडा रहने वाला है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान जब पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों देशों के बीच सहयोग के आपसी मुद्दों पर चर्चा करेंगे तो रूस के आर्कटिक क्षेत्र बहुत बड़ा मुद्दा रहने वाला है। हमारे सहयोगी अंग्रेजी अखबार ET ने यह खबर दी है। हाल ही में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इसको लेकर एक आर्टिकल भी लिखा है।
आर्कटिक क्षेत्र पर रूस भारत के लिए क्या कर रहा
आर्कटिक डॉट आरयू के लिए लिखे गए लेख में सर्गेई लावरोव ने कहा कि ‘रूस और भारत हाई लैटिट्यूड को लेकर सक्रिय बातचीत में लगे हुए हैं।’
‘संसाधनों से भरपूर आर्कटिक क्षेत्र को लेकर अगस्त में व्यापारिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग से संबंधित रूस और भारत के अंतरसरकारी आयोग में भी चर्चा हुई है।’
‘कुछ एक्सपर्ट ने तो कहा है कि आने वाले 20 वर्षों में आर्कटिक भारत और रूस के बीच सहयोग का एक बड़ा क्षेत्र बन जाएगा।’
बुधवार को ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस इलाके में एक शिपयार्ड का भी दौरा किया है, जहां आर्कटिक क्षेत्र के लिए ही जहाजों का निर्माण होता है। उन्होंने एक भाषण में आर्कटिक क्षेत्र में भारत और रूप के बीच बन रही साझेदारी का संकेत भी दिया है।
रूस का आर्कटिक क्षेत्र भारत के लिए क्यों है अहम
- भारत के लिए रूस का आर्कटिक क्षेत्र कई मायने में अहम साबित होगा, जिनमें से एक नॉर्दर्न सी रूट (NSR) भी शामिल है।
- नॉर्दर्न सी रूट पूर्वी और उत्तरी यूरोप तक भारतीय जहाजों के लिए परंपरागत स्वेज नहर के मुकाबले 40% तक दूरी घटा देगा और यात्रा में लगने वाला समय भी लगभग दो हफ्ते कम हो जाएगा।
- पिछले महीने की रिपोर्ट में भी बताया गया था कि भारत और रूस के बीच आर्कटिक क्षेत्र में इस्तेमाल लायक जहाज बनाने और भारतीय कार्गो के लिए पोर्ट सुविधाएं विकसित करने को लेकर बातचीत चल रही है।
रूस के आर्कटिक क्षेत्र का नॉर्दर्न सी रूट क्या है
नॉर्दर्न सी रूट 5,600 किलोमीटर का समुद्री मार्ग है, जो रूस के बर्फीले आर्कटिक क्षेत्र से होकर गुजरता है।
साल के ज्यादातर समय इस क्षेत्र में मोटी बर्फ जमी रहती है। लेकिन, जलवायु परिवर्तन की वजह से यह बर्फ अब ज्यादा पिघलने लगी है, जिससे आवाजाही के लिए अब साल में ज्यादा समय मिलने लगा है।
इस वजह से नॉर्दर्न सी रूट से गुजरने के लिए बर्फ से निपटने में सक्षम विशेष मजबूत जहाजों की आवश्यकता होती है।
रूस के न्यूक्लियर क्षेत्र की बड़ी कंपनी रोसाटॉम इस तरह की जहाज बनाती है और एनएसआर के लिए भारत के साथ करार भी करेगी।
रूस के आर्कटिक क्षेत्र में किन चीजों को भंडार है
रूस का आर्कटिक क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों का भंडार है, जिनमें-
- एलएनजी समेत हाइड्रोकार्बन
- निकेल
- तांबा
- प्लेटिनम
- पैलेडियम
- रेअर अर्थ एलिमेंट







