नई दिल्ली। C430L. ये नंबर याद कर लीजिए. क्योंकि इन नंबर पर अमेरिका आंख गड़ाए बैठा है. पल-पल की अपडेट डोनाल्ड ट्रंप इस नंबर के बारे में चाहते हैं. अमेरिका की जांच एजेंसियां भी इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने में लगी हैं. दरअसल, ये कोई आम नंबर नहीं है. रूस गुप्त तरीके से ईरान को एक एडवांस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने में मदद कर रहा है. पिछले कई वर्षों से रूस एक खुफिया प्रोग्राम चला रहा है.फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स इसे मॉस्को से तेहरान को सामरिक टेक्नोलॉजी मिलिट्री ट्रांसफर बता रहे हैं.
फाइनेंशियल टाइम्स (FT) इन्वेस्टिगेशन की रिपोर्ट रूस के लीक हुए कम्युनिकेशन और मिलिट्री पेटेंट के एनालिसिस पर आधारित है. यह प्रोग्राम 2023 में शुरू हुआ था. यानी US-ईरान युद्ध से काफी पहले. लेकिन मिडिल ईस्ट में चल रहे मौजूदा संघर्ष के दौरान भी यह जारी रहा है.
ईरान को रूस दे रहा मदद
रिपोर्ट में कहा गया कि C430L प्रोग्राम से रूस ईरान की रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम बनाने में मदद कर रहा है. यह एक इंजन है,जिससे कोई क्रूज मिसाइल आवाज की रफ्तार से कई गुना ज्यादा तेज रफ्तार पकड़ लेती है. मिसाइल और मिलिट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह टेक्नोलॉजी लगभग निश्चित रूप से एंटी-शिप और जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइलों के लिए बनाई गई थी.
FT को ईरानी मिसाइलों के एक्सपर्ट फैबियन हिन्ज ने बताया, ‘यह रूस की तरफ से ईरान को एक बेहद रणनीतिक और संवेदनशील मिलिट्री टेक्नोलॉजी ट्रांसफर है, जिसे ईरान दशकों से हासिल करना चाहता है. इस तरह के प्रोग्राम के लिए रूस के बहुत बड़े नेता के पॉलिटिकल क्लियरेंस की जरूरत पड़ती है.’
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम को बनाकर फ्लाइट टेस्ट कर चुका है. हालांकि, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि रूस की मदद से बनी सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल को तैनात किया गया है या नहीं.
सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की जरूरत क्यों?
सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल में खासियत होती है कि वह न सिर्फ बेहद तेज रफ्तार से उड़ सकती है बल्कि कम ऊंचाई पर भी उड़ सकती है. इससे एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को उनको पकड़ने और इंटरसेप्ट करने के लिए समय बहुत कम मिलता है. ईरान के लिए खाड़ी में यह बेहद अहम रहने वाली है क्योंकि यहां अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी आधुनिक जमीन और समुद्र से ऑपरेट करने वाले डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं.
सीआई में ईरान मामलों पर पकड़ रखने वाले पूर्व मिलिट्री एनालिस्ट जिम लैमसन ने कहा, ‘इससे उन्हें (ईरान) एक ऐसा नया और असरदार रणनीतिक हथियार सिस्टम मिलेगा जो अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए खतरा बन सकता है.’ रूस की सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी, रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया और रूसी रॉकेट डिजाइन ब्यूरो, NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट में कॉर्डिनेशन किया.
कैसे हुआ प्रोग्राम का खुलासा ?
C430L में कई NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया के सीनियर मिसाइल इंजीनियर्स शामिल हैं, जिन्होंने कई बार ईरान का दौरा किया ताकि कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत किए जा सकें. साल 2025 तक NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया को रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम को लेकर ईरान की ओर से टेक्निकल मैटेरियल मिला. रूस के इंजीनियर्स ने ईरान की टेस्ट फ्लाइट के डेटा का एनालिसिस किया और फिर तेहरान को सिस्टम की परफॉर्मेंस को लेकर सवालों की लंबी लिस्ट भेजी. उन्होंने फ्यूल सिस्टम, कम्ब्यूशन स्टैबिलिटी, एयर इनटेक और इंजन नोजल को लेकर जानकारी मांगी.
उन्होंने यह भी जानने की कोशिश की कि क्या ईरान की ओर से मुहैया कराए गए टेलेमेट्री के बाद रैमजेट इंजन ऑपरेट कर पा रहा है. टेलेमेट्री फ्लाइट के दौरान इंजन की परफॉर्मेंस का डेटा बताता है. अप्रैल 2025 में रूस ने इस प्रोग्राम पर बातचीत के लिए कुछ रूसी स्पेशलिस्ट्स को ईरान भेजा. लीक हुई जानकारी से पता चलता है कि यह प्रोग्राम 2026 तक भी चालू था. उस वक्त भी जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था. जून 2026 में रोसोबोरॉनएक्सपोर्ट के एक खत से पता चलता है कि दोनों ही पक्ष अभी भी अगले फेज की चीजों पर बात कर रहे हैं.







