नई दिल्ली। भारत और ईरान के बीच हालिया मुलाकातों यानी बढ़ती नजदीकी के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और ईरान के बीच किसी ट्रेड डील जैसी नई संभावना और बातचीत से इनकार किया है. इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के कथित ‘इकोनॉमिक D-Day’ की याद दिलाते हुए ये चेतावनी भी दी है कि ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचाने में मदद करने वाले देशों पर भी अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है. रुबियो ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच फिलहाल किसी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है.
आपको बताते चलें कि रुबियो का ये बयान पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की मुलाकात के दो दिन बाद आया है. जब दोनों नेताओं ने किर्गिस्तान में आयोजित एससीओ समिट से इतर मुलाकात की थी. उस बैठक को लेकर यह दावा किया गया था कि दोनों देशों के बीच संबंधों, व्यापार और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई.
भारत-ईरान पर ईरान की नजर
‘द ब्रायन किल्मीड शो’ में ब्रायन किल्मीड से बातचीत के दौरान होस्ट ने रूबियो से पूछा- ‘प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति और अधिकारियों से मुलाकात की, लग रहा था कि वो किसी तरह की ट्रेड डील कर रहे हैं. पाकिस्तान ने भी दो हफ्ते पहले ऐसा किया था. दोनों देशों से क्या कहेंगे?
इसके जवाब में रूबियो ने कहा- ‘देखिए, मुझे नहीं लगता भारत और ईरान के बीच कोई ट्रेड डील हो रही है. हर देश अपनी विदेश नीति बनाता है. कई देश ईरानी सरकार से बातचीत करते हैं. मेरा मतलब हमने भी ईरानी सरकार के लोगों से मुलाकात की है, कभी कुछ चर्चाओं के सिलसिले में और उनसे संपर्क भी रहा है. लेकिन असल बात यह है जो राष्ट्रपति ट्रंप ने एकदम साफ और दो टूक कही है कि किसी को भी ईरान को बचाने में मदद नहीं करनी चाहिए, जिससे वो आतंकवाद को बढ़ावा देकर परमाणु हथियार बना सकें. जो हमारी मुहिम में बाधा बनेगा, हम उस पर एक्शन लेंगे.’
पीएम मोदी ने क्या कहा था?
रूबियो को जो कहना था कह चुके, लेकिन उनसे इस बयान के आते ही पीएम मोदी का वो बयान याद आया जो उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद दिया था.
प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स और एससीओ सहित बहुपक्षीय संगठनों में ईरान के साथ भारत के घनिष्ठ सहयोग की तत्परता दोहराते हुए कहा था कि वो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पेजेशकियान का भारत में स्वागत करने को उत्सुक हैं. द्विपक्षीय बैठक में दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों पर चर्चा के साथ पश्चिम एशिया संघर्ष के हाल के घटनाक्रमों पर भी बातचीत की थी.
उस बैठक के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था- ‘राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की. हमनें विभिन्न क्षेत्रों में भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. अब हम आने वाले समय में अपने व्यापार को बढ़ाना और उसमें विविधता लाना चाहते हैं.’
ईरान के साथ भारत का कितना कारोबार?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.68 बिलियन डॉलर था. भारत ने ईरान को 1.24 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि ईरान से आयात 0.44 बिलियन डॉलर का था. दोनों देश ऊर्जा जरूरतों से इतर कृषि के क्षेत्र में भी एक-दूसरे के साथ महत्वपूर्ण व्यापार करते हैं.
भारत मुख्य रूप से ईरान को चावल, चाय, चीनी, दवाएं और इलेक्ट्रिकल मशीनरी निर्यात करता है. भारत के बासमती चावल की ईरान में भारी डिमांड है. 2023 में ईरान ने भारत से 734 मिलियन डॉलर का बासमती चावल निर्यात किया था. वहीं बदले में भारत ईरान से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के अलावा ड्राईफ्रूट्स यानी सूखे मेवे, केमिकल्स और कांच के प्रोडक्ट खरीदता है.







