नई दिल्ली। करियर ब्रेक लेने का मतलब यह नहीं है कि आपका EPF खाता बंद हो गया या उसमें ब्याज मिलना रुक गया। अगर पैसा EPF में जमा है, तो वह ब्याज कमाता रहेगा, लेकिन नौकरी छोड़कर ब्रेक लेने वाले लोगों को एक बात समझनी जरूरी है। पांच साल की नौकरी पूरी कर लेने का मतलब यह नहीं कि आगे का हर ब्याज अपने आप टैक्स फ्री हो गया।
ClearTax की टैक्स एक्सपर्ट सीएस चांदनी आनंदन के मुताबिक, ITAT के कुछ फैसलों में कहा गया है कि नौकरी खत्म होने के बाद ईपीएफ बैलेंस पर जो ब्याज बनता है, वह टैक्सेबल हो सकता है। यह तब भी हो सकता है, जब कर्मचारी पांच साल की सर्विस पूरी कर चुका हो। यहां असली बात यह है कि पांच साल की सर्विस का नियम और नौकरी छूटने के बाद मिलने वाले ब्याज का टैक्स, दोनों अलग-अलग तरीके से काम करते हैं।
सेक्शन 10(12) के तहत क्या छूट मिलती है
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(12) के तहत नौकरी छोड़ने की तारीख तक जमा हुआ ईपीएफ बैलेंस कुछ शर्तों के साथ टैक्स छूट के लिए पात्र हो सकता है। लेकिन ITAT के कुछ फैसलों में माना गया है कि नौकरी खत्म होने के बाद जो ब्याज जमा होता है, उसे यही छूट नहीं मिलती। उस ब्याज को इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज माना जाता है और जिस साल वह ब्याज बनता है, उसी साल उस पर टैक्स लगता है।
नौकरी बीच में छूटी तो टैक्स की गणना अलग होगी
मान लीजिए किसी कर्मचारी के पास नौकरी छोड़ते समय 10 लाख रुपये का EPF बैलेंस है। इसके बाद वह दो साल तक बिना नौकरी रहता है। इन दो सालों में EPF बैलेंस पर ब्याज मिलता रहता है। अब यहां 10 लाख रुपये और ब्रेक के दौरान बने ब्याज को अलग-अलग देखना होता है।
अगर बाद में वह नई नौकरी करता है और पांच या ज्यादा साल की लगातार सर्विस पूरी करता है, तो अंतिम विड्रॉल पर जमा बैलेंस छूट के लिए पात्र हो सकता है, लेकिन नियम और शर्तें लागू रहेंगी। फिर भी दो साल के गैप में जो ब्याज बना, ITAT की व्याख्या के हिसाब से वह इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज के रूप में टैक्सेबल रहेगा। क्योंकि, वह ब्याज नौकरी में रहते हुए नहीं, बल्कि नौकरी छूटने के बाद बना है।
10 लाख पर 80 हजार ब्याज
अगर 10 लाख रुपये पर दो साल के करियर ब्रेक में 80,000 रुपये का EPF ब्याज बनता है, तो 10 लाख और 80,000 को अलग-अलग समझना होगा। मूल 10 लाख रुपये पांच साल की सेवा शर्त पूरी होने पर छूट के दायरे में आ सकते हैं। लेकिन, नौकरी छूटने के बाद बना 80,000 रुपये का ब्याज जिस साल वह बना, उसी साल टैक्सेबल हो सकता है।
यानी पांच साल की नौकरी ने पूरे भविष्य के ब्याज को अपने आप टैक्स फ्री नहीं कर दिया। इसलिए अगर आप करियर ब्रेक के दौरान EPF बैलेंस को खाते में छोड़ रहे हैं, तो ब्याज की टैक्स एलीजिबिलिटी को नजरअंदाज न करें।
ब्रेक के दौरान EPF निकालें या ट्रांसफर करें तो क्या होगा
अगर करियर ब्रेक के बीच EPF निकाल लिया जाता है, तो टैक्स का मामला और पेचीदा हो जाता है। जब कर्मचारी की लगातार पांच साल की सर्विस पूरी नहीं हुई हो, तो जमा EPF बैलेंस की विड्रॉल टैक्सेबल हो सकती है। अगर पांच या ज्यादा साल की लगातार सर्विस पूरी हो चुकी है, तो जमा बैलेंस कुछ शर्तों के साथ छूट के लिए पात्र हो सकता है।
आनंदन के मुताबिक, नौकरी छूटने के बाद बने ब्याज का टैक्स अलग मुद्दा है। नई नौकरी जॉइन करते समय EPF बैलेंस ट्रांसफर करने से पांच साल की शर्त के लिए सर्विस की निरंतरता बनी रहती है, लेकिन इससे उस ब्याज की टैक्स स्थिति पीछे जाकर नहीं बदलती, जो उस दौरान बना जब आप बेरोजगार थे।
EPF वालों को क्या याद रखना चाहिए
नौकरी बीच में छूटने का मतलब यह नहीं कि पूरा EPF बैलेंस अचानक टैक्सेबल हो जाता है। असली फर्क यह है कि नौकरी छोड़ने की तारीख तक जमा बैलेंस और उसके बाद बने ब्याज को अलग-अलग देखा जाए। पांच साल का नियम मुख्य रूप से यह तय करता है कि जमा EPF बैलेंस छूट पाएगा या नहीं।
ITAT के अनुसार, यह नियम नौकरी के ब्रेक में बने ब्याज को अपने आप टैक्स फ्री नहीं बनाता। इसलिए अगर आप करियर ब्रेक ले रहे हैं और EPF बैलेंस खाते में छोड़ रहे हैं, तो ब्याज की टैक्स योग्यता को जरूर समझें। जरूरत पड़े तो टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लें, क्योंकि हर मामले में सर्विस की अवधि, विड्रॉल का समय और नियमों की शर्तें अलग असर डाल सकती हैं।







