नई दिल्ली। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में साल 2026 के नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया गया है. इस साल रॉबर्ट ई हॉल और माइकल वुडफोर्ड को संयुक्त रूप से यह प्रतिष्ठित पुरस्कार देने का फैसला लिया गया है. दोनों अर्थशास्त्रियों को मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरीकरण के माइक्रोइकॉनॉमिक आधार पर उनके काम के लिए चुना गया है.
स्वीडिश रॉयल एकेडमी ऑफ साइंसेज ने अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में दिए जाने वाले नोबेल पुरस्कार की घोषणा की है. यह पुरस्कार अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने और आर्थिक नीतियों को समझने में अहम योगदान देने वाले शोध को सम्मानित करता है.
किस काम के लिए मिला पुरस्कार?
रॉबर्ट ई हॉल और माइकल वुडफोर्ड को मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरीकरण के माइक्रोइकॉनॉमिक आधार पर काम करने के लिए चुना गया है. आसान भाषा में समझें तो इसका संबंध इस बात से है कि लोगों और कंपनियों के फैसले पूरी अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करते हैं.
महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए सरकार और केंद्रीय बैंक जो नीतियां बनाते हैं, उन्हें समझने में इस तरह का शोध मदद करता है.
केंद्रीय बैंकों को मिलेगा फायदा
पुरस्कार समिति के अध्यक्ष जॉन हैसलर के मुताबिक, दोनों अर्थशास्त्रियों के काम ने ऐसे मॉडल के लिए मजबूत सैद्धांतिक आधार दिया है, जिनका इस्तेमाल आज दुनिया भर के केंद्रीय बैंक और सरकारें करती हैं. इनकी मदद से आर्थिक झटकों का सामना करने के लिए बेहतर नीतियां बनाई जा सकती हैं.
गौरतलब है कि इकोनॉमिक्स का नोबेल पुरस्कार पहली बार 1969 में दिया गया था. यह अल्फ्रेड नोबेल के मूल पांच पुरस्कारों में शामिल नहीं था, बल्कि स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने इसकी शुरुआत की थी.
क्या है इकोनॉमिक्स का नोबेल पुरस्कार?
इकोनॉमिक्स का नोबेल पुरस्कार अर्थशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले लोगों को दिया जाता है. इसका आधिकारिक नाम अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में स्वेरिगेस रिक्सबैंक अर्थशास्त्र पुरस्कार है. दूसरे नोबेल पुरस्कारों की तरह इसकी भी दुनिया भर में खास पहचान है.







