नई दिल्ली। तेज बुखार से तपता शरीर, सांस लेने में दिक्कत…ओहो-ताहाने की जान खतरे में थी। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की जारवा जनजाति के इस बच्चे को इलाज कैसे मुहैया कराया जाए, यह स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों के लिए समझना मुश्किल हो रहा था। एक्सपर्ट मौजूद न होने की वजह से हेल्थ वर्कर्स के सामने संकट सामने था। लेकिन उन्होंने दूर से सलाह लेने के लिए ‘ई-संजीवनी’ का सहारा लिया।
डॉक्टर ने पाया कि ओहो-ताहाने निमोनिया से पीड़ित हैं।समय रहते विशेषज्ञ की मदद मिलने से बच्चे की हालत में तेजी से सुधार हुआ। ओहो-ताहाने भारत के सबसे कमजोर जनजातीय समूहों में से एक का सदस्य है।यह मुमकिन हुआ ‘ई-संजीवनी’ सर्विस से। नवंबर 2019 में राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा की शुरुआत के बाद से, इसके जरिए 50 करोड़ से ज्यादा मामलों में मदद दी गई है, जिनमें से कई मामले दूर-दराज के इलाकों के हैं।
पीएम मोदी ने मन की बात में किया जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस सर्विस की उपलब्धि का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे ई-संजीवनी के जरिए एक डॉक्टर ने लक्षद्वीप के कल्पेनी में 60 साल के कुन्ही कोया के इलाज के लिए मेडिकल टीम का मार्गदर्शन किया। साथ ही, इसने हिमालयी क्षेत्र जंस्कार में गर्भवती कुंजांग डोलमा को मेडिकल हेल्प मुहैया कराने में भी मदद की।
36 राज्यों में 15 भाषाओं में ई-संजीवनी की सर्विस
- स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत C-DAC मोहाली द्वारा विकसित, ई-संजीवनी के माध्यम से रोजाना 2.5 से 3 लाख परामर्श दिए जाते हैं।
- 15 भाषाओं में सेवाएं मुहैया कराई जाती हैं। यह सर्विस सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध है।
- इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वालों में 57.1% महिलाएं हैं, जबकि 46 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 40.1% है।
- 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 16.2% है। इस प्लेटफॉर्म पर एक ही दिन में सबसे ज्यादा 6,30,315 परामर्श दर्ज किए गए हैं।
डॉक्टरों का समर्पण, लोगों का भरोसाः पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्लेटफॉर्म की सफलता का श्रेय डॉक्टरों के समर्पण, लोगों के भरोसे और तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल को दिया। उन्होंने 1.9 लाख ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’ का जिक्र करते हुए कहा कि
ई-संजीवनी सर्विसेस गांव के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बना रहे हैं और ग्राम पंचायतों के लिए वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित हो रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में नियमित स्वास्थ्य जांच आम होती जा रही है, जिसमें ई-संजीवनी एक अहम भूमिका निभा रही है।
ब्रेन इमेजिंग टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म
प्रधानमंत्री ने ब्रेन रिसर्च में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने IIT-मद्रास स्थित ‘सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर’ का उल्लेख किया, जिसका उद्घाटन उन्होंने इसी महीने किया था। इस केंद्र ने मानव मस्तिष्क की हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल 3D तस्वीरें बनाने के लिए एक ‘ब्रेन इमेजिंग टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म’ विकसित किया है। इसका लक्ष्य ‘परम शक्ति’ सुपरकंप्यूटर का उपयोग करके 100 मानव मस्तिष्कों का विस्तृत अध्ययन और मैपिंग करना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस पहल से मस्तिष्क के बारे में हमारी समझ और गहरी हो सकती है, खासकर इसलिए क्योंकि अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का अभी तक कोई पक्का इलाज नहीं है। उन्होंने बताया कि इन 100 मस्तिष्कों से प्राप्त डेटा शोधकर्ताओं के लिए एक ‘ओपन-सोर्स’ संसाधन के रूप में उपलब्ध होगा।







