बेंगलुरु: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नकली जीवन रक्षक दवाएं बनाने, उनकी दोबारा पैकेजिंग करने और बेचने से जुड़े एक कथित रैकेट के सिलसिले में बेंगलुरु में पांच जगहों पर छापेमारी की है. इन छापों के दौरान, एजेंसी ने आरोपी वीरेश कुमार के बैंक खातों में जमा लगभग 9 लाख रुपये फ्रीज कर दिए हैं. इसके साथ ही इस कथित अवैध गतिविधि से जुड़े डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य सबूत भी जब्त किए गए हैं.
यह छापेमारी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई. यह कार्रवाई नकली दवाओं के इस धंधे से कमाए गए काले धन और वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए अलग से दर्ज किए गए मामले का हिस्सा है.
ED के अनुसार, जांच में आर. प्रशांत को इस पूरे रैकेट का मुख्य सरगना पाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, वह बिदादी के पास एक फार्महाउस चला रहा था, जहां विभिन्न राज्यों से सस्ते दामों पर खरीदी गई घटिया क्वालिटी की दवाओं की रीपैकेजिंग की जाती थी. इसके बाद उन पर महंगे फाइजर एंटीबायोटिक्स जैसे ‘ज़ाविसेफ़्टा’ और ‘एम्बलेवियो’ के नाम के नकली लेबल लगाकर उन्हें बाजार में बेचा जाता था.
अस्पतालों को की गई नकली दवाओं की सप्लाई
ED की जांच से पता चला है कि इन दवाओं को नई बोतलों में भरा जाता था और उन पर असली फार्मास्युटिकल कंपनियों के उत्पादों जैसे दिखने वाले नकली लेबल लगा दिए जाते थे. इन नकली दवाओं को शुरुआत में ‘डीएम फार्मास्युटिकल्स’ के जरिए बांटा गया और बाद में ‘कृपा हेल्थकेयर’ को सप्लाई किया गया. आरोप है कि कृपा हेल्थकेयर ने इन नकली दवाओं को असली दवाओं के साथ मिला दिया और फिर उन्हें विभिन्न दवा दुकानों और अस्पतालों में सप्लाई कर दिया.
एजेंसी ने कहा कि हाल ही में की गई इस छापेमारी के दौरान कई लोगों से जुड़े डिजिटल उपकरण, आपत्तिजनक दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की गई है. वीरेश कुमार के बैंक खातों में 9 लाख रुपये फ्रीज करना इस रैकेट से हुई कथित अवैध कमाई की जांच का ही हिस्सा है.
पहले की छापेमारी में 5 करोड़ रुपये तक की नकली दवाएं बरामद हुई थीं
यह मामला सबसे पहले 18 अगस्त को तब सामने आया था, जब खाद्य सुरक्षा और औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी और दोद्देरी इलाकों में स्थित फार्महाउसों और अनधिकृत पैकेजिंग यूनिट्स पर छापेमारी की थी. उन कार्रवाइयों के दौरान, अधिकारियों ने कई नामी बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों के लेबल लगी नकली दवाएं और पैकेजिंग सामग्री जब्त की थी.
जब्त की गई इन नकली दवाओं की अनुमानित कीमत 4.5 करोड़ रुपये से 5 करोड़ रुपये के बीच थी. जांच में यह बात सामने आई थी कि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए इंटेंसिव केयर यूनिट्स में इस्तेमाल होने वाली महंगी और जीवन रक्षक दवाओं के नकली वर्जन कथित तौर पर तैयार किए जा रहे थे, और उन्हें लगभग 50 प्रतिशत तक के डिस्काउंट पर बाजार व अस्पतालों में सप्लाई किया जा रहा था.
इस रैकेट के जरिए आरोपियों द्वारा अवैध कमाई करने और उसे इधर-उधर ट्रांसफर करने के आरोपों के बाद, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की एक अलग जांच शुरू की. हाल ही में की गई यह छापेमारी वित्तीय लेन-देन का पता लगाने, इसमें शामिल लोगों की पहचान करने और इस कथित नकली दवा नेटवर्क के दायरे को पूरी तरह समझने के लिए एजेंसी द्वारा किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है.







