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Home राज्य

छात्र नेताओं को रास आ रही बगावत

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 2, 2022
in राज्य
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जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनावों में बगावत छात्रनेताओं को बहुत रास आ रही है। पिछले चार छात्रसंघ चुनावों की बात करें तो अपेक्स अध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने वाले प्रत्याशी वहीं रहे हैं, जिन्होंने अपने संगठन से बगावत कर चुनाव लड़ा। फिर चाहे एबीवीपी हो या एनएसयूआई, बगावत करने वाले प्रत्याशी छात्रों की पसंद भी बने हैं। फिर वह पूजा वर्मा हो या फिर विनोद जाखड़ , अंकित धायल या पवन यादव।

1967 में हुई थी छात्रसंघ चुनाव की शुरुआत
दरअसल राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव 1967 से हुई थी। पहले छात्रसंघ अध्यक्ष आदर्श किशोर सक्सेना अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए थे। अध्यक्ष पद पर कब्जा करने वाली अकेली छात्रा रही है प्रभा चौधरी। प्रभा ने साल 2011-12 में चुनाव जीत कर इतिहास बनाया था। प्रभा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और एबीवीपी और एनएसयूआई को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की।

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एबीवीपी ने नहीं दिया टिकट तो हुए बागी
2016-17 में निर्दलीय प्रत्याशी अंकित धायल ने जीता चुनाव। एबीवीपी से बागी होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में धायल ने चुनाव लड़ा था। उन्होंने अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के अखिलेश पारीक को हराया
2017-18 में निर्दलीय प्रत्याशी पवन यादव ने अध्यक्ष पद पर विजय प्राप्त की। परिषद से टिकट नहीं मिलने पर यादव ने निर्दलीय चुनाव लड़ कर एनएसयूआई के दीपक मीणा को शिकस्त दी।

एनएसयूआई ने नकारा, बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा
2018-19- निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विनोद जाखड़़़ ने चुनाव जीता। एनएसयूआई से टिकट नहीं मिलने पर जाखड़ ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया और चुनाव लड़ा। उसने एनएसयूआई के रणबीर सिंघानिया को बड़े अंतर से हराया।

2019-20 में एनएसयूआई ने बागी हुई पूजा वर्मा ने चुनाव जीता। उन्होंने उत्तम चौधरी को हराया और राजस्थान विवि की दूसरी छात्रसंघ अध्यक्ष बनी।
पूजा वर्मा लंबे समय से राजस्थान विश्वविद्यालय में बतौर एनएसयूआई कार्यकर्ता सक्रिय रही, लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्होंने संगठन से बगवात कर दी। दरअसल, संगठन ने पूजा की अध्यक्ष पद पर चुनाव लडऩे की मांग को दरकिनार करते हुए उसके प्रतिनिधित्व का नकार दिया। ऐसे में पूजा ने निर्दलीय चुनाव लडऩे का फैसला लिया और एनएसयूआई के ही उत्तम चौधरी को हराकर राजस्थान विवि की पहली दलित छात्रसंघ अध्यक्ष बनीं।

पिछले पांच सालों में जहां अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से जिन प्रत्याशियों को अपेक्स अध्यक्ष पद का टिकट दिया गया उनमें से किसी को जीत हासिल नहीं हुई, उसी तरह से पिछले चार साल से एनएसयूआई ने जिन प्रत्याशियों को टिकट दिया वह भी पार्टी की हार की वजह बने। अब दो साल बाद इस साल होने जा रहा छात्र संघ चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी भी दम ठोंकते नजर आ रहे हैं। साथ ही दोनों छात्रसंगठनों के कई छात्रनेता भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

एनएसयूआई से इस बार सबसे अधिक छात्र नेता दावेदारी कर रहे हैं। जिसमे राजस्थान कॉलेज से अध्यक्ष रहे महेंद्र देगड़ा, महारानी कॉलेज से अध्यक्ष रही रितु बराला के अलावा रोहिताश मीणा, महेश चौधरी,रविंद्र महलावत, मोहित यादव सहित करीब एक दर्ज छात्रनेता चुनावी प्रचार में लगे हुए हं। वहीं परिषद ने देव पलसानिया, नरेंद्र यादव, महेंद्र चौधरी, राजेंद्र प्रजापत, रोहित मीणा और मनु दाधीच दावेदारी जता रहे हैं। दोनों ही छात्र संगठनों को टक्कर देने के लिए निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी तैयारी में जुटे हुए हैं। इनमें सबसे आगे निर्मल चौधरी और लोकेन्द्र सिंह रायथलिया का नाम है।

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