नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की सरकार के विस्तार के बाद विवाद बढऩे का अंदाजा लगाया जा रहा है। तेजस्वी की पार्टी राजद में ज्यादा दिक्कत नहीं है लेकिन जदयू और कांग्रेस में विवाद शुरू हो गया है और इसके आगे बढऩे की आशंका जताई जा रही है। जदयू संसदीय दल के नेता उपेंद्र कुशवाहा मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज हैं। हालांकि उनकी नाराजगी का कोई कारण नहीं है क्योंकि वे पिछली सरकार में भी मंत्री नहीं थे। वे संगठन का काम देख रहे हैं और उनको बड़ी जिम्मेदारी मिली हुई है इसलि उनके नाराज होने का कारण नहीं है। संभव है कि राजद के साथ पुराने टकराव और वोट बैंक की राजनीति से वे परेशान हों। ध्यान रहे यादव और कुशवाहा का जमीनी स्तर पर मेल नहीं होता है। इसके बावजूद वे तत्काल पार्टी के लिए कोई संकट खड़ा करेंगे, इसकी आशंका कम है।
जहां तक कांग्रेस की बात है तो उसका ज्यादा मतलब नहीं है। कांग्रेस के 19 विधायक हैं, जिसमें से दो को मंत्री बनाया जा रहा है- एक दलित और एक मुस्लिम। उम्मीद की जा रही थी कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा और विधायक दल के नेता अजित शर्मा को मंत्री बनाया जाएगा। लेकिन ब्राह्मण और भूमिहार दोनों को छोड़ देने से नाराजगी बढ़ी है। लेकिन कांग्रेस के विधायक कहीं जा नहीं सकते हैं। उनको झक्ख मार कर कांग्रेस में ही रहना है। अगर भाजपा बहुत प्रयास करे और 13 विधायकों को तोड़ कर अलग गुट बनवा दे तब भी सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि राजद और जदयू को मिला कर सरकार को पूर्ण बहुमत है। ऊपर से 16 वामपंथी विधायकों का समर्थन भी सरकार को है और एक निर्दलीय विधायक भी सरकार के साथ हैं। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के इकलौते विधायक का समर्थन भी सरकार के साथ ही रहना है।






