नई दिल्ली। रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका द्वारा 100% तक टैरिफ यानी आयात शुल्क लगाने की तैयारी से भारत के निर्यात को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, प्रमुख अर्थशास्त्री डॉ. एसपी शर्मा का कहना है कि भारतीय निर्यातकों के पास अमेरिका के अलावा 15 अन्य वैकल्पिक बाजार यानी देश मौजूद हैं, जहां 200 अरब डॉलर (करीब 19 लाख करोड़ रुपये) का बड़ा अवसर भारत का इंतजार कर रहा है।
डॉ. एसपी शर्मा के अनुसार, भारत अपने निर्यात के लिए पूरी तरह से अमेरिकी बाजार पर निर्भर नहीं है। अमेरिका को भारत से करीब 87 से 88 अरब डॉलर का मर्चेंडाइज निर्यात होता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इन्हीं सामानों के लिए 15 अन्य देशों में 200 अरब डॉलर का विशाल बाजार उपलब्ध है। इन 15 प्रमुख देशों में नीदरलैंड्स, फ्रांस, ब्रिटेन, लैटिन अमेरिका के देश, सऊदी अरब, यूएई और नेपाल शामिल हैं।
अन्य देशों में निर्यात की रफ्तार तेज
- वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का अमेरिका को मर्चेंडाइज निर्यात बढ़कर 87.3 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष (2024-25) में 86.5 अरब डॉलर था।
- अमेरिका के साथ भारत का निर्यात 10 से 15% की दर से बढ़ रहा है, जबकि अन्य वैकल्पिक बाजारों में भारतीय निर्यात की ग्रोथ रेट 20 से 25% बनी हुई है।
- भारतीय उत्पाद श्रम-केंद्रित और लागत के मामले में काफी प्रतिस्पर्धी हैं, जिससे इनकी मांग वैश्विक स्तर पर बनी हुई है।
अमेरिका को भी नुकसान
शर्मा ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत कारोबारी संबंध हैं और दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में 100% तक टैरिफ लगाना खुद अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए भी नुकसानदायक होगा। उनके मुताबिक, भारतीय सामान पर भारी शुल्क लगाने से अमेरिका में इन उत्पादों की कीमत बढ़ सकती है। इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ेगा।
शर्मा ने कहा कि भारत कम लागत पर कई उत्पादों की सप्लाई करता है। इसलिए व्यापार को टकराव का जरिया बनाने के बजाय दोनों देशों के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना ज्यादा फायदेमंद होगा।







