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Home व्यापार

90% की रिकॉर्ड छलांग, फिर भी चीन के सामने पस्त

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
December 19, 2025
in व्यापार
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नई दिल्‍ली: चीन को भारत का निर्यात नवंबर 2025 में लगभग 90% बढ़ गया। लेकिन, जीटीआरआई की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यह छलांग व्यापक विकास का संकेत नहीं है। रिपोर्ट बताती है कि यह उछाल कुछ खास उत्पादों तक ही सीमित है। जबकि भारत अभी भी चीनी आयात पर बहुत ज्‍यादा निर्भर है। इस निर्भरता के कारण चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 106 अरब डॉलर (9.5 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचने के आसार हैं।

नवंबर में चीन को निर्यात 2.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 90% ज्‍यादा है। अप्रैल से नवंबर तक शिपमेंट 33% बढ़कर 12.2 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल के 9.2 अरब डॉलर से अधिक है। नेफ्था इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण था। इसका इस्‍तेमाल पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक के रूप में होता है। अक्टूबर में इसका निर्यात 512% और अप्रैल-अक्टूबर के दौरान 172% बढ़कर 1.4 अरब डॉलर हो गया।

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कहां बढ़ा है भारत का न‍िर्यात?
इलेक्ट्रॉनिक्स में भी तेज लेकिन बहुत चुनिंदा ग्रोथ देखी गई। प्रिंटेड सर्किट बोर्ड का निर्यात अक्टूबर में 8,577% बढ़कर 29.65 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि अप्रैल-अक्टूबर के दौरान यह 2,000% से ज्‍यादा बढ़कर 41.8 करोड़ डॉलर हो गया। मोबाइल फोन कंपोनेंट का निर्यात 82% बढ़कर 36.2 करोड़ डॉलर हो गया, जो एक असामान्य ट्रेंड है। कारण है कि भारत चीन से इन वस्तुओं का बड़ी मात्रा में आयात करता है।

इसके उलट लौह अयस्क का निर्यात अक्टूबर में 1.2% और अप्रैल-अक्टूबर के दौरान 30% गिर गया, जबकि झींगा निर्यात में मामूली बढ़ोतरी हुई। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘कुल मिलाकर, चीन को भारत के निर्यात में बढ़ोतरी व्यापक नहीं है। यह मुख्य रूप से नेफ्था और कुछ असामान्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों में केंद्रित है, न कि भारत के पारंपरिक निर्यात टोकरी में।’

भारत के चीन को शीर्ष तीन निर्यात – नेफ्था, लौह अयस्क और झींगा – में साल-दर-साल भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। नेफ्था निर्यात 2022 में 1.83 अरब डॉलर से बढ़कर 2023 में 1.91 अरब डॉलर हो गया। फिर 2024 में तेजी से गिरकर 1.26 अरब डॉलर हो गया। 2025 में यह स्थिर रहा। लौह अयस्क निर्यात 2022 में 2.49 अरब डॉलर से गिरकर 2023 में 1.40 अरब डॉलर हो गया। 2024 में यह 3.64 अरब डॉलर तक पहुंच गया। फिर 2025 में 1.89 अरब डॉलर पर आ गया। झींगा निर्यात तुलनात्मक रूप से स्थिर रहा। लेकिन, इसमें भी उतार-चढ़ाव आया, जो 2022 में 82.3 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2023 में 92.4 करोड़ डॉलर हो गया। फिर 2024 में 79.8 करोड़ डॉलर और 2025 में 77.3 करोड़ डॉलर हो गया।

चीन को न‍िर्यात में न‍िरंतरता की कमी
जीटीआरआई रिपोर्ट में कहा गया है, ‘यह असमान पैटर्न दिखाता है कि चीन को भारत के प्रमुख निर्यात में निरंतरता की कमी है। यह मुख्य रूप से चीनी मांग, कीमतों और नीतियों में बदलाव के साथ बढ़ता या घटता है, न कि निरंतर बाजार पहुंच या विविधीकरण को दर्शाता है।’

हालिया निर्यात बढ़ोतरी के बावजूद चीन के साथ भारत का व्यापार असंतुलन लगातार बढ़ रहा है। 2021 में 23 अरब डॉलर से निर्यात घटकर 2022 में 15.2 अरब डॉलर हो गया। 2023 में 14.5 अरब डॉलर पर रहा। 2024 में 15.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। 2025 में निर्यात का अनुमान 17.5 अरब डॉलर है, जो अभी भी पिछले स्तरों से कम है। आयात में भारी बढ़ोतरी हुई है, जो 2021 में 87.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में अनुमानित 123.5 अरब डॉलर हो गया है। इससे चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 106 अरब डॉलर (9.5 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच जाएगा। चीनी सीमा शुल्क डेटा एक व्यापक अंतर का सुझाव देता है। इसमें भारतीय निर्यात 19.1 अरब डॉलर, आयात 134.3 अरब डॉलर और घाटा 115.2 अरब डॉलर है।

भारत-चीन व्यापार डेटा में भी उल्लेखनीय अंतर दिखाई देते हैं। नवंबर में चीन ने भारतीय निर्यात 1.9 अरब डॉलर दर्ज किया। जबकि भारत ने 2.2 अरब डॉलर बताया। जनवरी-नवंबर के लिए चीन का डेटा निर्यात 17.5 अरब डॉलर दिखाता है। जबकि भारत का 16 अरब डॉलर है। आयात पर चीन ने नवंबर में 11.1 अरब डॉलर और इस साल अब तक 123.1 अरब डॉलर दर्ज किया, जो भारत के 10.3 अरब डॉलर और 113.2 अरब डॉलर के आंकड़ों से ज्‍यादा है।

चीन से भारत ने क्‍या-क्‍या खरीदा?
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘आम तौर पर आयात मूल्य निर्यात मूल्य से अधिक होते हैं। कारण है कि आयात में माल ढुलाई और बीमा (CIF) शामिल होता है, जबकि निर्यात एफओबी (FOB) आधार पर दर्ज किए जाते हैं। उस तर्क के अनुसार, भारत की ओर से चीन से कम आयात की रिपोर्ट करना, जितना चीन निर्यात के रूप में रिपोर्ट करता है, असामान्य है। यह सीमा शुल्क कम करने के लिए आयात के कम-मूल्यांकन का संकेत दे सकता है – एक ऐसा मुद्दा जिसकी जांच की जानी चाहिए।’

भारत के लगभग 80% आयात चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, ऑर्गेनिक रसायन और प्लास्टिक में केंद्रित हैं। अकेले इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात जनवरी-अक्टूबर 2025 में 38 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें मोबाइल फोन कंपोनेंट (8.6 अरब डॉलर), इंटीग्रेटेड सर्किट (6.2 अरब डॉलर), लैपटॉप (4.5 अरब डॉलर), सौर सेल और मॉड्यूल (3.0 अरब डॉलर), फ्लैट-पैनल डिस्प्ले (2.6 अरब डॉलर), लिथियम-आयन बैटरी (2.3 अरब डॉलर) और मेमोरी चिप्स (1.8 अरब डॉलर) शामिल हैं। मशीनरी आयात 25.9 अरब डॉलर था, जिसमें ट्रांसफार्मर अकेले 2.1 अरब डॉलर के थे। ऑर्गेनिक रसायन 11.5 अरब डॉलर तक पहुंच गए, जिसमें एंटीबायोटिक्स 1.7 अरब डॉलर के थे। प्लास्टिक आयात 6.3 अरब डॉलर था, जिसमें पीवीसी रेजिन 87.1 करोड़ डॉलर का था। स्टील और स्टील उत्पाद 4.6 अरब डॉलर के थे और चिकित्सा और वैज्ञानिक उपकरण 2.5 अरब डॉलर के थे।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘ये आंकड़े बताते हैं कि चीन से भारत का आयात बिल इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, रसायन और ऐसी सामग्री पर टिका है जिन्हें जल्दी से बदला नहीं जा सकता है, जो सप्‍लाई चेन में विविधता लाने के प्रयासों के बावजूद बड़े द्विपक्षीय व्यापार घाटे के बने रहने की व्याख्या करता है।’

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