Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home विश्व

शेख हसीना के बाद अब यूनुस सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्र!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
November 11, 2025
in विश्व
A A
Yunus government
15
SHARES
511
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली। बांग्लादेश में एक नीतिगत बदलाव अब एक सांस्कृतिक आंदोलन में बदल गया है. बांग्लादेश की प्रमुख यूनिवर्सिटीज में छात्र और शिक्षक सड़कों पर उतर आए हैं. इस बार बेहतर वेतन या राजनीतिक सुधार की मांग के लिए नहीं बल्कि उससे कहीं अधिक बुनियादी चीज के लिए: संस्कृति को बचाने के अधिकार के लिए.

शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद इस साल की शुरुआत में सत्ता में आई मोहम्मद यूनुस सरकार ने प्राइमरी स्कूलों में संगीत और शारीरिक शिक्षा (पीटी) के शिक्षकों की नियुक्ति की योजना रद्द कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला प्रशासनिक दिक्कतों और बजट की कमी के आधार पर लिया गया है.

इन्हें भी पढ़े

india-uk

99% सामानों पर ‘0’ टैरिफ… PF का लाभ, भारत-UK एफटीए के 5 बड़े फायदे

July 16, 2026
India-China

चीन हो गया बेचैन, आखिर इस रेस में भारत से कैसे पिछड़ गए?

July 15, 2026
Crude oil

रूस से तेल खरीदने में भारत ने सारे रिकॉर्ड तोड़े, ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा आयात

July 14, 2026
Ethanol

एथनॉल की दुनिया में किसका राज? जानिए किस देश में होता है सबसे ज्यादा इस्तेमाल

July 14, 2026
Load More

लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि असली कारण कहीं और है- सरकार का उन इस्लामिक समूहों के दबाव के आगे झुक जाना जिन्होंने इन विषयों को ‘गैर-इस्लामिक’ करार दिया है. ढाका विश्वविद्यालय, जो बांग्लादेश के छात्र आंदोलनों का प्रतीक केंद्र है, में सैकड़ों छात्र ‘अपराजेय बंगला’ प्रतिमा के नीचे राष्ट्रीय गान और 1971 के मुक्ति संग्राम के गीत गाते हुए जमा हुए.

पूरे बांग्लादेश में हो रहा संगीत बैन के खिलाफ प्रदर्शन

म्यूजिक बैन को लेकर बांग्लादेश में चटगांव से लेकर राजशाही तक, जगन्नाथ से ढाका तक, यूनिवर्सिटीज के कैंपस विरोधी नारों और गीतों से गूंज उठे. आर्ट्स और ह्यूमेनिटीज के छात्रों के नेतृत्व में यह आंदोलन अब पूरे देश में फैल चुका है.

उनकी मांग है कि स्कूलों में संगीत और पीटी टीचर्स की नियुक्ति बहाल की जाए. ढाका विश्वविद्यालय के थिएटर प्रोफेसर इसराफिल शाहीन ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, ‘संस्कृति कभी धर्म के खिलाफ नहीं होती. यही संस्कृति हमारी राष्ट्रीय पहचान बनाती है. इसके बिना शिक्षा खोखली हो जाती है.’

संगीत शिक्षक अजीजुर रहमान तुहिन ने भी कहा कि ‘कला ही सभ्यता की नींव है.’

लेकिन सरकार अभी तक इन विरोध-प्रदर्शनों के आगे झुकी नहीं है. हिफाजत-ए-इस्लाम और इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश जैसे समूह, जिन्होंने यूनुस की अंतरिम सरकार को सत्ता मजबूत करने में समर्थन दिया था म्यूजिक और पीटी टीचर्स की जगह धार्मिक शिक्षकों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं.

इस्लामिक कट्टरपंथियों के आगे झुक गई है यूनुस सरकार?

आलोचकों का कहना है कि यह फैसला सरकार के उसी कट्टरपंथी दबाव के आगे झुकने का संकेत है, जिसका विरोध करने का उसने वादा किया था.

सिंगर और एक्टिविस्ट शायन ने जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में एक छात्र रैली में कहा, ‘यह बजट या व्यवस्था का मुद्दा नहीं है. यह पहचान का सवाल है- हम कौन हैं, बांग्लादेशी होने का क्या मतलब है. धर्म और संस्कृति को आमने-सामने लाने की खतरनाक कोशिश की जा रही है, और हमें इसके झांसे में नहीं आना चाहिए.’

शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में इस तरह के विवाद की चिंता जताई जा रही थी और अब यह सामने भी आ गई है. एक समय धर्मनिरपेक्षता और सांस्कृतिक विविधता के लिए मशहूर यह देश अब उन कट्टर इस्लामिक धार्मिक समूहों के प्रभाव में आ रहा है जो सार्वजनिक शिक्षा को फिर से परिभाषित करना चाहते हैं.

राजनीतिक विश्लेषक रफीक हसन कहते हैं, ‘बांग्लादेश एक सांस्कृतिक क्रांति से पैदा हुआ था, लेकिन अब वह उसी विरासत को आस्था के नाम पर मिटाने के खतरे में है.’

संगीत के साथ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वो सिर्फ शिक्षकों के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश की आत्मा के लिए लड़ रहे हैं. एक छात्र ने कहा, ‘संस्कृति कभी धर्म के खिलाफ नहीं होती, लेकिन संस्कृति के बिना कोई राष्ट्र अपनी पहचान खो देता है.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
sanatan dharma

विश्व शांति के लिए आवश्यक है सनातन संस्कृति का पूरे विश्व में फैलाव

June 22, 2024
Joshimath in the Himalayas

हिमालय में जोशीमठ के भविष्य का अंधेरा

January 17, 2023
Bhushan Tiwari

भरत भूषण तिवारी को फर्जी एनकाउंटर में मारे जाने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गांधी प्रतिमा पर दी श्रद्धांजलि

June 23, 2026
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • 15 साल पुराना रिकॉर्ड स्वाहा, ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ कोहली बने सबसे बड़े भारतीय ‘रनवीर’
  • पीएम मोदी से अमित शाह, नितिन नवीन और बीएल संतोष की मीटिंग, यूपी के राजनीतिक गलियारों में क्या चर्चा?
  • मदरसे में ED की बड़ी कार्रवाई, 40 लाख नकद और 180 ग्राम सोने के सिक्के जब्त

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.