नई दिल्ली। चीन ने शुक्रवार को तिब्बत-नेपाल सीमा पर चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को अचानक रोक दिया। सरकारी मीडिया के मुताबिक, इलाके में एक बैरियर लेक के ओवरफ्लो होने से अचानक बाढ़ आने का खतरा पैदा हो गया है। इसी वजह से बचाव दलों को वापस बुलाने का आदेश दिया गया है।
चीन के सरकारी चैनल CCTV ने बताया कि अधिकारियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन सस्पेंड करने और बचाव टीमों को वापस बुलाने का निर्देश दिया है। सभी रेस्क्यू टीमों को फिलहाल अपनी जगह पर रहने और आगे के निर्देशों का इंतजार करने को कहा गया है। जो बचावकर्मी पहले ही प्रभावित इलाके में पहुंच चुके थे, उन्हें भी वहां से एक किलोमीटर पीछे हटने का आदेश दिया गया है।
72 घंटे में फिर आ सकती है बाढ़
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने गुरुवार को चेतावनी दी थी कि बुधवार को आई अचानक बाढ़ के बाद भोटे कोशी नदी पर एक बैरियर लेक बन गई है। यह झील अब ओवरफ्लो भी होने लगी है। चीन ने चेताया था कि अगर यह बैरियर लेक टूटती है तो अगले 72 घंटे में एक और बाढ़ आ सकती है।
अब तक 469 लोगों की मौत
शुक्रवार सुबह 10:30 बजे तक के ताजा अपडेट के मुताबिक, बाढ़ में कम से कम 469 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 667 लोग लापता हैं। लापता लोगों में 127 नेपाली नागरिक भी शामिल हैं।
तिब्बत के भीतर सरकारी मीडिया ने गुरुवार शाम तक कम से कम 558 लोगों के लापता होने की जानकारी दी थी। इनमें 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं। तिब्बत में तीन लोगों की मौत की भी जानकारी दी गई है। चीनी अधिकारी नेपाल सरकार की तरह नियमित रूप से आंकड़े जारी नहीं कर रहे हैं।
बाढ़ के बीच समय के खिलाफ रेस्क्यू
बाढ़ के बाद तीसरे दिन भी भोटे कोशी-त्रिशूली-नारायणी नदी तंत्र के किनारे बसे गांवों, कस्बों और टूरिस्ट कैंपों में फंसे लोगों को खोजने के लिए बचावकर्मी तेजी से काम कर रहे हैं। हालांकि, दूसरी बाढ़ के खतरे ने रेस्क्यू अभियान को और मुश्किल बना दिया है।
बुधवार को तिब्बत से उफनती भोटे कोशी नदी नेपाल के सीमा जिले रसुवा में दाखिल हुई थी। तेज बहाव अपने रास्ते में कई इमारतों, पुलों और तटबंधों को बहा ले गया। इसके बाद नदी के किनारे बसे गांव और कस्बे कीचड़ और मलबे में दब गए।
चीनी अधिकारियों के साथ-साथ स्वतंत्र सैटेलाइट आकलन में भी चेतावनी दी गई है कि इस मलबे ने नदी के कुछ हिस्सों में पानी का रास्ता रोक दिया है और इसके कारण बैरियर लेक बन गई है।
क्या होती है बैरियर लेक?
बैरियर लेक ऐसी झील होती है जो किसी नदी के रास्ते में प्राकृतिक रुकावट आने से बनती है। रुकावट के पीछे पानी जमा होता जाता है और झील का रूप ले लेता है। भोटे कोशी के मामले में बुधवार को आई भारी बाढ़ के बाद कीचड़ और मलबे ने नदी के प्राकृतिक बहाव को रोक दिया। इसी वजह से यह झील बनने की बात कही गई है।
20.25 हेक्टेयर में फैली है झील
चीन के मुताबिक, गुरुवार सुबह इस बैरियर लेक में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा था। अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख घन मीटर और पानी आने की आशंका जताई गई थी।
चीन ने बताया था कि झील गुरुवार सुबह तक ओवरफ्लो होने लगी थी और शनिवार तक बाढ़ आने की संभावना काफी ज्यादा थी। स्पेस एनालिटिक्स कंपनी सुहोरा टेक्नोलॉजीज के मुताबिक, नेपाल के ऊंचाई वाले ल्हेंडे खोला क्षेत्र में बनी यह झील करीब 20.25 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली है।







