प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: संसद परिसर में हुए विरोध-प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद बांसुरी स्वराज शुक्रवार को नई दिल्ली के संसद मार्ग स्थित डीसीपी कार्यालय पहुंचीं और विपक्षी नेताओं राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की।
भाजपा का आरोप है कि “संसद परिसर में हुए प्रदर्शन के दौरान सनातन धर्म, संत समाज और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का अपमान किया गया, जिससे करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।” इसी संबंध में बांसुरी स्वराज ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर मामले की जांच कराने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
बांसुरी स्वराज ने क्या कहा ?
डीसीपी कार्यालय पहुंचने के बाद मीडिया से बातचीत में बांसुरी स्वराज ने कहा कि संसद परिसर में विपक्षी नेताओं द्वारा किया गया प्रदर्शन लोकतांत्रिक विरोध नहीं था, बल्कि धार्मिक परंपराओं का उपहास उड़ाने का प्रयास था।
उन्होंने कहा कि “सांसद पप्पू यादव, अवधेश प्रसाद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिस प्रकार का प्रदर्शन किया, वह सनातन संस्कृति और संत समाज के सम्मान के खिलाफ था। उनके अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम से देश की सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। इसी कारण भाजपा ने पुलिस से एफआईआर दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।”
करनैल सिंह ने भी उठाई गिरफ्तारी की मांग
भाजपा विधायक करनैल सिंह ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान ब्राह्मणों, पुजारियों और संत समाज की छवि खराब करने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि किसी ने जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत किया है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। करनैल सिंह ने सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ संसदीय स्तर पर भी कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला ?
भाजपा के आरोपों की पृष्ठभूमि में संसद परिसर में हुआ वह प्रदर्शन है, जिसमें सांसद पप्पू यादव संत की वेशभूषा में संसद पहुंचे और राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित घोटाले का आरोप लगाते हुए विरोध-प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों पर सवाल उठाए।
भाजपा का कहना है कि “प्रदर्शन की शैली और उसमें इस्तेमाल किए गए प्रतीक धार्मिक परंपराओं का मज़ाक उड़ाने वाले थे, जबकि विपक्ष का उद्देश्य कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे को उठाना था।”
मामले पर बढ़ सकती है सियासी गर्माहट
इस विवाद के बाद संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा जहां इसे धार्मिक आस्था और सनातन संस्कृति के अपमान का मामला बता रही है, वहीं विपक्ष सरकार पर जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगा सकता है। अब सभी की नजर पुलिस की कार्रवाई और इस शिकायत पर होने वाली आगे की प्रक्रिया पर टिकी हुई है।







