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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला, 40 दिनों में 70 बार चोरी, एसआईटी की रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 7, 2026
in राज्य, विशेष
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राम मंदिर
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प्रकाश मेहरा


अयोध्या(स्पेशल डेस्क) : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि की गणना के दौरान बड़े पैमाने पर चोरी और गबन के मामले ने सभी को चौंका दिया है। राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मात्र 40 दिनों के भीतर चढ़ावे की गिनती के दौरान 70 बार चोरी जैसी घटनाएं हुईं। जांच में छह कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई है।

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27 अप्रैल से 5 जून तक की फुटेज में सामने आईं घटनाएं

एसआईटी के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच में कई कर्मचारी नोटों की गड्डियां और खुले नोट अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और अन्य स्थानों पर छिपाते दिखाई दिए। कई मामलों में अन्य कर्मचारियों को भी सहयोग करते हुए देखा गया।हालांकि, 24 अप्रैल 2026 से पहले की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने के कारण कुल चोरी की वास्तविक राशि और घटनाओं का सटीक आकलन नहीं हो सका है। जांच एजेंसियों का मानना है कि चोरी का सिलसिला लंबे समय से जारी हो सकता है।

सरकार ने गठित की थी तीन सदस्यीय एसआईटी

चढ़ावा चोरी के मामले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने 15 जून से जांच शुरू की और एक सप्ताह के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी।

करोड़ों रुपये के गबन की आशंका

रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करोड़ों रुपये के चढ़ावे के गबन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। चूंकि पूरी अवधि की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं है, इसलिए वास्तविक नुकसान का आकलन अभी संभव नहीं हो पाया है।

छह कर्मचारी प्रथम दृष्टया दोषी

एसआईटी जांच में जिन छह कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उनमें शामिल हैं— अविनाश शुक्ला। मनीष कुमार यादव। करुणेश पांडेय। अनुकल्प मिश्रा। लवकुश मिश्रा। रमाशंकर मिश्रा। इनके खिलाफ चोरी, आपराधिक षड्यंत्र, चोरी की संपत्ति रखने और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की गई है।

78.94 लाख रुपये पहले ही बरामद

रिपोर्ट के अनुसार, एसआईटी जांच शुरू होने से पहले ही मंदिर ट्रस्ट ने संदिग्ध कर्मचारियों से लगभग 78.94 लाख रुपये बरामद कर लिए थे। इसके अलावा विदेशी मुद्रा, कुछ बहुमूल्य वस्तुएं और गणना कक्ष से सटे शौचालय से 2.25 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए। जांच में कर्मचारियों और उनके परिजनों के बैंक खातों में भारी मात्रा में नकद जमा, एफडी और अन्य संदिग्ध वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं। एसआईटी ने विस्तृत आर्थिक जांच की सिफारिश की है।

सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र में भारी लापरवाही

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट और बैंक की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि “गणना कक्ष में प्रवेश और निकास पर तलाशी नहीं ली जाती थी। जेब रहित निर्धारित वर्दी लागू नहीं की गई। कर्मचारियों को निजी सामान ले जाने से नहीं रोका गया। बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली प्रभावी नहीं थी। अलग-अलग हुंडियों की राशि को मिलाकर गिनती की जाती थी। नकदी ले जाने वाले बक्सों की ट्रैकिंग व्यवस्था कमजोर थी। इन खामियों के कारण जवाबदेही तय करना मुश्किल हो गया और चोरी की घटनाओं को बढ़ावा मिला।

वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

रिपोर्ट में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. अनिल मिश्रा पर निर्धारित दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन की निगरानी नहीं करने का आरोप लगाया गया है। वहीं गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को सुरक्षा व्यवस्था लागू न करने और नियमित तलाशी नहीं कराने के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है। इसके अलावा रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना औपचारिक प्राधिकरण के हुंडियों की चाबियां होने और उनके रिश्तेदार को गणना कार्य में लगाने को भी गंभीर अनियमितता माना गया है।

ऑडिट रिपोर्ट की चेतावनी भी हुई नजरअंदाज

जांच में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सोशल मीडिया पर वायरल चांदी की ईंटों और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे के गायब होने के दावों की पुष्टि नहीं हुई। एसआईटी के अनुसार संबंधित वस्तुएं रिकॉर्ड में सुरक्षित पाई गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि “पूर्व ऑडिट रिपोर्ट में 180 दिन तक सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की सिफारिश पहले ही की गई थी, लेकिन इन सुझावों का पालन नहीं किया गया।”

एसआईटी की प्रमुख सिफारिशें

छह आरोपित कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर। संबंधित पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारी तय की जाए। संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच हो। चढ़ावा गणना प्रक्रिया के लिए नई और सख्त एसओपी लागू की जाए। सीसीटीवी निगरानी और फुटेज संरक्षण व्यवस्था को मजबूत किया जाए। गणना कक्ष में अनिवार्य तलाशी और जेब रहित वर्दी लागू की जाए।

जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई

एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि “यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है और अंतिम जांच अभी जारी है। आगे की जांच में चोरी की वास्तविक राशि, अन्य संभावित आरोपितों और संस्थागत लापरवाही के दायरे को लेकर और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं। अयोध्या के राम मंदिर जैसे देश की आस्था के सबसे बड़े केंद्र में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला न केवल वित्तीय अनियमितता का विषय है, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास से भी जुड़ा हुआ है। अब सभी की नजर सरकार और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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