नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले हजारों युवाओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी के संस्थापक एवं संयोजक अभिजीत दीपके ने किया, जो शनिवार सुबह अमेरिका से दिल्ली पहुंचे और सीधे आंदोलन में शामिल हो गए। आइए इस पूरे मामले को एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से विस्तार में समझते हैं।
प्रदर्शन में देशभर के कई छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने भाग लिया। इस दौरान प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन में शामिल हुए और प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया।
डर की राजनीति अब नहीं चलेगी — अभिजीत दीपके
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि “देश में सरकार की आलोचना करने वाले युवाओं और छात्रों के भीतर भय का माहौल बनाया जा रहा है।”
उन्होंने कहा, “पिछले दो-तीन दिनों से मेरी मां और बहन लगातार रो रही थीं। उन्हें डर था कि मैं वापस भारत आऊंगा तो मुझे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यह सिर्फ मेरी मां का डर नहीं है, बल्कि इस देश के हर उस परिवार का डर है जिसका बेटा या बेटी सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाता है।”
राजनीति से हम डरने वाले नहीं हैं : दीपके
दीपके ने आगे कहा कि “लोकतंत्र में असहमति और सवाल पूछना अपराध नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “जो भी छात्र, युवा या आम नागरिक सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है, उसके परिवार को यह डर सताने लगता है कि कहीं उसे जेल न भेज दिया जाए। आखिर हम कब तक इस डर के माहौल में जीते रहेंगे? अब समय आ गया है कि हम सत्ता को बता दें कि उनकी डर की राजनीति से हम डरने वाले नहीं हैं।”
इसके बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ मिलकर नारे लगाए—
“नहीं डरेंगे, नहीं डरेंगे, तुम्हारी राजनीति से नहीं डरेंगे।”
“धर्म की राजनीति बंद करो, हिंदू-मुसलमान की राजनीति बंद करो।”
दिल्ली पुलिस से मिली प्रदर्शन की अनुमति
अभिजीत दीपके ने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचते ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति प्रदान की है।
विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने का स्वागत किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “शायद पहली बार दिल्ली पुलिस ने सही काम किया है, सीजेपी को प्रदर्शन की अनुमति देकर।”
वहीं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि देश के युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि देश में परीक्षा पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार, बढ़ती बेरोजगारी और विभिन्न घोटालों जैसे मुद्दे युवाओं को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में युवाओं के आंदोलन को समझदारीपूर्ण समर्थन और सही दिशा-निर्देशन की आवश्यकता है।
मीम से शुरू हुई थी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान के रूप में हुई थी। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से बातचीत में इसके पीछे की कहानी बताई थी।
दीपके ने बताया कि “उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक बयान देखा था, जिसमें देश के युवाओं की तुलना कथित तौर पर कॉकरोच और परजीवियों से की गई थी।
व्यंग्यात्मक राजनीतिक मंच बनाने की प्रेरणा
उन्होंने कहा, “मुझे यह बेहद विचित्र और हास्यास्पद लगा क्योंकि संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है। यदि युवाओं की आवाज उठाने पर उन्हें इस तरह संबोधित किया जाए तो यह बेहद चिंताजनक है।”
दीपके के अनुसार, इसी घटना ने उन्हें एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक मंच बनाने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा, “मैंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा? इसके बाद बड़ी संख्या में युवाओं की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। तब हमें लगा कि इसे एक पैरोडी राजनीतिक पार्टी के रूप में शुरू किया जा सकता है और हमने इसका नाम ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ रखा।”
व्यंग्य से आंदोलन तक का सफर
अभिजीत दीपके के अनुसार, शुरुआत में यह केवल एक ऑनलाइन व्यंग्य अभियान था, लेकिन धीरे-धीरे यह युवाओं की नाराजगी और असंतोष का प्रतीक बन गया। उन्होंने बताया कि पार्टी का घोषणापत्र तैयार किया गया, वेबसाइट बनाई गई और युवाओं को एक साझा मंच देने का प्रयास किया गया।
दीपके के मुताबिक,”इंस्टाग्राम पर पार्टी के 2 करोड़ 21 लाख से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं, जबकि दो लाख से ज्यादा लोग खुद को कॉकरोच जनता पार्टी का सदस्य बता चुके हैं। भारतीय राजनीति में इतने कम समय में किसी व्यंग्यात्मक अभियान का इस स्तर तक पहुंचना असाधारण माना जा सकता है।”
युवाओं की राजनीति में नए प्रयोग की चर्चा
जंतर-मंतर पर हुआ यह प्रदर्शन केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह युवाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर भी केंद्रित रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह अभियान अब वास्तविक राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कॉकरोच जनता पार्टी का यह आंदोलन केवल प्रतीकात्मक विरोध तक सीमित रहता है या देश के युवा आंदोलनों में एक नए अध्याय की शुरुआत करता है।







