नई दिल्ली। देश के अन्नदाताओं की आर्थिक स्थिति को सुधारने और खेती के बढ़ते खर्चों को कम करने के लिए सरकारें लगातार प्रयासरत हैं। इसी दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ योजना देशभर के किसानों के लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभरी है। लेकिन मध्य प्रदेश के किसानों के लिए खुशखबरी इससे भी बड़ी है।
राज्य सरकार ने अपनी विशेष पहल ‘मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना’ के माध्यम से केंद्र की मदद को दोगुना कर दिया है। अब मध्य प्रदेश के पात्र किसानों को सालाना 6,000 नहीं, बल्कि कुल 12,000 रुपये की सीधी वित्तीय सहायता मिल रही है। यह राशि सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को बीज, खाद और अन्य कृषि उपकरणों के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता।
केंद्र सरकार की पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत देश के करोड़ों किसानों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से तीन बराबर किस्तों में भेजी जाती है:
- प्रत्येक किस्त में 2,000 रुपये दिए जाते हैं।
- हर चार महीने के अंतराल पर यह पैसा किसानों के खाते में आता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य बुवाई के समय किसानों को नकद राशि की उपलब्धता सुनिश्चित कराना है।
मध्य प्रदेश में डबल फायदा
मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में कदम बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना लागू की है। इस योजना की खास बात यह है कि यह केंद्र की योजना के पूरक के रूप में काम करती है।
- राज्य सरकार भी किसानों को सालाना 6,000 रुपये अतिरिक्त देती है।
- इस तरह, केंद्र के 6,000 और राज्य के 6,000 मिलाकर मध्य प्रदेश के किसानों को कुल 12,000 रुपये साल के मिलते हैं।
- हाल ही में सरकार ने इस राशि को 4,000 से बढ़ाकर 6,000 रुपये किया है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है।
किसे मिलेगा इस ‘डबल बोनस’ का लाभ?
- दोनों योजनाओं का संयुक्त लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी पात्रता शर्तें तय की गई हैं:
- जमीन का स्वामित्व: किसान के नाम पर खेती योग्य भूमि होना अनिवार्य है।
- अनिवार्य पंजीकरण: सीएम किसान योजना का लाभ केवल उन्हीं को मिलता है जो पहले से पीएम किसान योजना के लाभार्थी हैं।
- आय और पेशा: सरकारी कर्मचारी, आयकर दाता (Income Tax Payers) और उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति इसके पात्र नहीं हैं।
- दस्तावेज: आधार कार्ड, बैंक खाता (डीबीटी इनेबल्ड) और भू-अभिलेख अपडेट होना आवश्यक है।
खेती की राह हुई आसान
यद्यपि यह राशि देखने में बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन सीमांत किसानों के लिए यह ‘संजीवनी’ से कम नहीं है। खेती के पीक सीजन में जब खाद और बीज के लिए नकदी की किल्लत होती है, तब यह 12,000 रुपये की मदद किसानों को कर्ज के जाल से बचाती है। मध्य प्रदेश की यह मॉडल योजना अब अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन रही है, जहां किसान अपनी आर्थिक मजबूती के साथ स्वाभिमान से खेती कर पा रहे हैं।







