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Home राष्ट्रीय

ग्रीन एनर्जी मिशन में भारत-अफ्रीका सहयोग से खुलेगी विकास की नई राह

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 16, 2026
in राष्ट्रीय, विश्व
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green energy
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नई दिल्ली। भारत अफ्रीका के ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तनकारी भूमिका निभाने की क्षमता रखता है, विशेषकर रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार में। पिछले एक दशक में भारत ने 130 गीगावाट से अधिक सोलर और पवन ऊर्जा क्षमता जोड़कर उल्लेखनीय प्रगति की है। आज देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता का लगभग आधा हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से आता है, जो इसे विकासशील देशों के लिए एक सफल मॉडल बनाता है।

एक विश्लेषण के अनुसार, अफ्रीका में ऊर्जा परिवर्तन अब केवल नीतिगत लक्ष्य नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक आवश्यकता बन चुका है। यहां सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और खनिज संसाधनों की प्रचुरता को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति में बदलने की कोशिशें तेज हो रही हैं। इसका उद्देश्य अस्पतालों, कृषि और उद्योगों को डीजल जैसे महंगे और अस्थिर स्रोतों से मुक्त कर टिकाऊ ऊर्जा प्रदान करना है।

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अफ्रीका में अभी भी लगभग 60 करोड़ लोग बिजली से वंचित हैं, हालांकि ऊर्जा पहुंच में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। ऐसे में भारत का तकनीकी अनुभव, नीतिगत ढांचा और संस्थागत क्षमता इस परिवर्तन को गति देने में बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सफलता के पीछे प्रतिस्पर्धी बोली प्रणाली, स्पष्ट नीतियां और विकेंद्रीकृत सौर मॉडल का बड़ा योगदान रहा है, जिसने छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाई। अफ्रीकी देश इन अनुभवों से सीख लेकर पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया, पूर्व-निर्धारित टैरिफ और मजबूत घरेलू इंजीनियरिंग ढांचा विकसित कर सकते हैं, हालांकि उन्हें अपने स्थानीय हालात के अनुसार नीतियों में बदलाव भी करना होगा।

अफ्रीका को दुनिया के अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक सौर विकिरण प्राप्त होता है। 2020 से 2025 के बीच अफ्रीकी देशों और निजी निवेशकों ने लगभग 25 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा है, जबकि 11 गीगावाट क्षमता निजी क्षेत्र के माध्यम से पहले ही सुनिश्चित की जा चुकी है। वर्तमान में नई ऊर्जा परियोजनाओं में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।

आर्थिक दृष्टि से भी सौर ऊर्जा कई अफ्रीकी देशों में गैस आधारित संयंत्रों की तुलना में अधिक किफायती साबित हो रही है, खासकर तब जब ईंधन की कीमतों और ट्रांसमिशन लागत में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखा जाए।

अफ्रीका वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां कोबाल्ट, तांबा, मैंगनीज, प्लैटिनम समूह धातुएं और लिथियम जैसे आवश्यक खनिजों के विशाल भंडार हैं, जो बैटरी, इलेक्ट्रोलाइजर और पवन टर्बाइन के निर्माण के लिए अनिवार्य हैं। इससे अफ्रीका को वैश्विक औद्योगिक अर्थव्यवस्था में अपनी भागीदारी बढ़ाने का अवसर मिलता है।

भारत और अफ्रीका के बीच सहयोग पहले ही शुरू हो चुका है। भारतीय ऊर्जा कंपनियां ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण और नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण जैसे क्षेत्रों में अफ्रीकी देशों के साथ अपने अनुभव साझा कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने अफ्रीका 50 और अन्य संस्थानों के साथ मिलकर ट्रांसमिशन परियोजनाओं में साझेदारी की है, जिससे सौर और पवन ऊर्जा के बेहतर एकीकरण में मदद मिल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत यदि वित्तीय सहयोग बढ़ाए, ग्रिड एकीकरण और सौर पंप योजनाओं के अनुभव साझा करे, तथा खनिज संसाधनों के मूल्य संवर्धन में अफ्रीका का समर्थन करे, तो यह साझेदारी एक आदर्श मॉडल बन सकती है। मजबूत संस्थागत ढांचे और पारदर्शी नीतियों के साथ भारत-अफ्रीका ग्रीन एनर्जी सहयोग न केवल आर्थिक विकास को गति देगा, बल्कि टिकाऊ और स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

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