प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में क्या नकली भारतीय मुद्रा को प्रचलन में लाने की कोई साजिश रची गई है? पांच दिन पहले 9 जून को लखनऊ में 13.95 लाख रुपये की नकली करेंसी मिली थी। अब प्रयागराज के सिविल लाइंस क्षेत्र में स्थित श्रीहनुमत निकेतन मंदिर के दान पात्रों में नौ नकली नोट पाए गए हैं। इन मामलों की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) कर रहा है। इन घटनाओं को लेकर यह आशंका जाहिर की जा रही है कि यूपी के शहरों में जाली नोट चलन में आ गए हैं।
मंदिर प्रबंधन के पदाधिकारियों में विवाद
प्रयागराज के मंदिर के दान पात्रों में नौ नकली नोट पाए गए हैं। इनमें पांच सौ रुपये का एक, दो सौ रुपये के पांच और सौ रुपये के तीन नकली नोट हैं। बताया जाता है कि मंदिर प्रबंधन में विवाद चल रहा है। यह विवाद मंदिर में चढ़ावे के धन तथा व्यय को लेकर सन 2020 में शुरू हुआ था। इस विवाद के चलते 20 मार्च 2024 अदालत ने प्रयागराज के डीएम को मंदिर का रिसीवर बना दिया था। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने रिसीवर का जिम्मा एडीएम विजय शर्मा को दे दिया है।
एडीएम के पास है रिसीवर की जिम्मेदारी
बताया जाता है कि मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों में दान में आने वाली राशि में हिस्सेदारी को लेकर यह विवाद उपजा था। पदाधिकारियों के बीच वर्चस्व के लिए भी लड़ाई चल रही है। विवाद बढ़ने पर यह मामला कोर्ट में पहुंचा। करीब चार साल तक न्यायालय में इसकी सुनवाई चली। कोर्ट के निर्देश पर डीएम को मंदिर का रिसीवर बनाया गया। इसके बाद से जिला प्रशासन की ओर से रिसीवर की जिम्मेदारी संभाल रहे विजय शर्मा इस मंदिर का प्रबंधन संभाल रहे हैं। अब मंदिर में आने वाली दान राशि हर महीने ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा कराई जा रही है।
बैंक में राशि जमा करते समय पहचाने गए नकली नोट
जानकारी मिली है कि पिछले दो सालों से मंदिर के 24 दान पात्र सील हैं। इनमें रखी राशि की गणना नहीं हुई है। फिलहाल जनवरी, फरवरी और मार्च 2026 के 6 दान पात्रों से राशि निकालकर उसकी गिनती कर ली गई है। इन 6 दान पात्रों में से निकले करीब 13 लाख रुपये बैंक खाते में जमा कर दिए गए हैं। यह राशि जब बैंक में जमा कराई जा रही थी तब नोटों की गिनती के दौरान मशीन ने नकली नोटों की पहचान कर ली। इस पर बैंक की ओर से एडीएम शर्मा को इसकी जानकारी दी गई।
विजय शर्मा ने जब प्रशासन को इसकी रिपोर्ट दी तो फिर एनआईए ने इसकी जांच शुरू की। अधिकारियों का मत है कि मंदिर में नकली नोट दान करने वालों को यह नहीं पता था कि वे नोट फर्जी हैं। आशंका है कि वे नोट बाजार में चलन में आकर उन तक पहुंचे हैं। आशंका है कि यूपी में कोई गिरोह नकली नोट खपाने में जुटा है।
लखनऊ में गिरफ्तार 3 लोगों के पास मिले नकली नोट
उत्तर प्रदेश में प्रयागराज से पहले लखनऊ में 9 जून को 13.95 लाख रुपये की नकली करेंसी के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। लखनऊ के मड़ियांव थाना क्षेत्र में पुलिस ने नकली करेंसी के बड़े रैकेट का खुलासा किया था। पुलिस ने आरोपियों के पास से 13.95 लाख रुपये के जाली नोट बरामद किए थे। हालांकि पुलिस इस मामले के मुख्य आरोपी और उसके कुछ अन्य साथियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी। वह उनकी तलाश में जुटी है।
लाखों के नकली नोट मिले
मड़ियांव पुलिस को सूचना मिली थी कि क्षेत्र में कुछ लोग असली नोटों के बदले बड़ी मात्रा में नकली नोटों का लेनदेन करने वाले हैं। इस पर पुलिस सक्रिय हो गई। देर रात में पुलिस को सूचना मिली कि घैला पुल के पास एक खाली मैदान में बने टीन शेड के निकट तीन संदिग्ध युवक मौजूद हैं और वे किसी व्यक्ति का इंतजार कर रहे हैं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और तीनों को गिरफ्तार कर लिया। उनकी तलाशी लेने पर उनके पास से 500 रुपये के 1402 जाली नोट तथा 100 रुपये के 6946 जाली नोट मिले। बरामद नकली करेंसी की कुल कीमत 13 लाख 95 हजार 600 रुपए बताई गई।
गिरोह का सरगना आजमगढ़ का
गिरफ्तार आरोपी आजमगढ़ के जहानागंज का 21 साल का आलोक सिंह, आजमगढ़ के मुबारकपुर का 25 साल का सोनू गौंड उर्फ गोलू और आजमगढ़ के सिधारी का 35 साल का बृजेश विश्वकर्मा है। उन्होंने पुलिस को पूछताछ में बताया कि आजमगढ़ का निवासी मंजीत इस गिरोह का सरगना है। उसका साथी संतोष भी इस नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। वे दोनों फिलहाल फरार हैं। आरोपियों ने बताया कि मंजीत ने उन्हें नकली नोटों की खेप लेकर लखनऊ भेजा था। यहां उन्हें एक व्यक्ति को यह नोट सौंपने थे।







