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Delhi IIT और AIIMS ने तैयार किया नया एल्गोरिदम, कैंसर के इलाज में ला सकता है क्रांति

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
October 31, 2022
in दिल्ली
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नई दिल्ली। शरीर में मौजूद कैंसर ट्यूमर के बारे में जानकारी करने में अभी तक सीटी स्कैन, एमआरआइ जैसी रेडियोलाजी जांच का प्रयोग होता है। अब एम्स और आइआइटी दिल्ली के विशेषज्ञों ने मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) की मदद से एल्गोरिदम तैयार किया है, जो मल्टी पैरामेट्रिक एमआरआइ से ही न सिर्फ जांच, बल्कि कैंसर का इलाज तय करने में भी डाक्टरों की मदद करेगा।

एम्स में हड्डियों, प्रोस्टेट व पैंक्रियाज कैंसर के करीब 130 मरीजों पर किए गए अलग-अलग तीन अध्ययनों में इस प्रयोग के सकारात्मक परिणाम देखे गए हैं। इसलिए आने वाले समय में बगैर कोई चीरा लगाए मल्टी पैरामेट्रिक एमआरआइ से डाक्टर यह तय कर सकेंगे कि मरीज को कौन सी दवा देनी है। डाक्टर यह पूर्वानुमान भी लगा सकेंगे कि कीमो से मरीज को कितना फायदा होगा। हालांकि, अभी इसपर आगे और शोध की जरूरत है।

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कैंसर उपचार में आ सकता है बड़ा बदलाव

शोध सफल होने के बाद चिकित्सा जगत में इसका प्रयोग आरंभ हुआ तो कैंसर के उपचार में बड़ा बदलाव आ सकता है। यह विधि भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में कैंसर के इलाज में बेहद अहम साबित हो सकती है। मौजूदा समय में कैंसर की पुष्टि होने के बाद हिस्टोपैथोलाजी परीक्षण से डाक्टर यह तय करते हैं कि मरीज को कीमोथेरेपी में कौन सी दवा देनी। हिस्टोपैथोलाजी परीक्षण में ट्यूमर से सैंपल लिया जाता है। सर्जरी के बगैर यह परीक्षण संभव नहीं है।

जांच से पता चलती है यह बात

इस जांच से पैथोलाजी के डाक्टर यह पता लगाते हैं कि ट्यूमर में किस तरह की कैंसर कोशिकाएं हैं। इसके अलावा मालिक्यूलर जांच के जरिये भी कैंसर के लिए जिम्मेदार जीन का पता लगाकर डाक्टर टारगेट थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी की सलाह देते हैं।

मालिक्यूलर जांच महंगी होती है और इसकी सुविधा भी सीमित है। ऐसे में आइआइटी के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग सेंटर व एम्स के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा किए गए इस शोध के शुरुआती नतीजे उत्साहित करने वाले हैं।

यूरोपीय रेडियोलाजी मेडिकल जर्नल में प्रकाशन

हड्डियों के कैंसर से संबंधित शोध आस्टियोसरकोमा के 30 मरीजों पर किया गया है। उन मरीजों को तीन बार कीमोथेरेपी देने से पहले और बाद में एमआरआइ जांच की गई। इसके बाद उनकी सर्जरी हुई और सर्जरी के दौरान निकाले गए ट्यूमर का हिस्टोपैथोलाजी परीक्षण किया गया। इसके अलावा, इस शोध के लिए एम्स व आइआइटी के विशेषज्ञों ने एसएलआइसीएस (सिंपल लीनियर इंटरेटिव क्लस्टरिंग सुपरवोक्सेल्स) और मल्टीथ्रेशहोल्डिंग (एमटीएच) को मिलकर नया एल्गोरिदम तैयार किया।

इसकी मदद से उन मरीजों की एमआरआइ जांच के डाटा का परीक्षण किया गया। इस शोध में एम्स के रेडियोलाजी, पैथोलाजी विभाग और एम्स के कैंसर सेंटर आइआरसीएच (इंस्टीट्यूट-रोटरी कैंसर हास्पिटल) के डाक्टर भी शामिल हैं। परीक्षण के बाद विशेषज्ञ इस नतीजे पर पहुंचे कि मल्टी पैरामेट्रिक एमआरआइ आधारित जांच से हड्डियों के कैंसर के इलाज के लिए कीमोथेरेपी के मानक तय किए जा सकते हैं। प्रोस्टेट कैंसर के 60 और पैंक्रियाज कैंसर के 40 मरीजों पर भी इसी तरह का शोध किया गया। यह शोध यूरोपियन रेडियोलाजी मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हो चुका है।

सकारात्मक परिणाम से बढ़ा उत्साह

शोध में अहम भूमिका निभाने वाले आइआइटी दिल्ली के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग सेंटर और एम्स के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के संयुक्त फैकल्टी डा. अमित मेहंदीरत्ता ने कहा कि शोध से इस बात की संभावना प्रबल हुई है कि एआइ आधारित रेडियोलोजी जांच की मदद से यह पता चल सकता है कि कौन सी दवा मरीज पर असर करेगी। इसके आधार पर इलाज में बदलाव भी किया जा सकता है। अभी यह शोध सिर्फ एक अस्पताल एम्स में किया गया है। अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कई अस्पतालों में अधिक मरीजों पर ट्रायल जरूरी है। यदि बहुकेंद्रित ट्रायल में भी यही परिणाम आते हैं तो इलाज में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

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