नई दिल्ली। जलवायु वैज्ञानिकों का एक नया आकलन है, जो पूरी दुनिया को चौंका देने वाला है. वैज्ञानिक दावा कर रहे हैं कि प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा अत्यंत शक्तिशाली अल नीनो अगले 6 महीनों में दुनिया को वो रूप दिखाने वाला है, जो झेल पाना मुश्किल हो जाएगा. दुनियाभर में अतिरिक्त गर्मी के कारण 4.5 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा सकती है. यह अनुमान जलवायु परिवर्तन के कारण पहले से बढ़ रही गर्मी से होने वाली मौतों के अतिरिक्त है. शिकागो विश्वविद्यालय के क्लाइमेट इंपैक्ट लैब ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है.
रिपोर्ट में प्रकाशित आकलन के मुताबिक अतिरिक्त गर्मी से होने वाली मौत का अनुमान अलग-अलग इलाकों के लिए अलग-अलग लगाया है. इसका उद्देश्य उन इलाकों की पहचान करना है, जहां समय रहते कदम उठाकर लोगों की जान बचाई जा सकती है. इनमें बेहतर गर्मी पूर्वानुमान, शीतलन केंद्रों की स्थापना, अत्यधिक गर्मी के दौरान चिकित्सा सुविधाओं में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना और खुले में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा जैसे उपाय शामिल हैं.
4.5 लाख की आबादी निगल जाएगा अल नीनो
जलवायु वैज्ञानिकों ने इस घटना की तीव्रता को बेहद असाधारण बताया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रशांत महासागर के कुछ क्षेत्रों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक हो गया है. इस गर्मी का असर पहले से गर्म हो रहे वैश्विक वातावरण पर पड़ रहा है. शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक और इस रिपोर्ट के को राइटर माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा कि 4,51,000 लोगों की संभावित मौत का अनुमान इतना बड़ा है कि इसे समझना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा माता-पिता, बच्चों, बुजुर्गों, पड़ोसियों और रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे लोगों से जुड़ा है.
क्या है अल नीनो?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु से जुड़ी घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है. इससे दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बारिश, तापमान और हवाओं के सामान्य पैटर्न में बदलाव आता है. मौजूदा घटना ऐसे समय में विकसित हो रही है, जब मानव गतिविधियों के कारण वैश्विक तापमान पहले ही बढ़ चुका है. से में वैज्ञानिक बताते हैं कि इस अतिरिक्त गर्मी के कारण अल नीनो से जुड़े प्रभाव और गंभीर हो सकते हैं. अल नीनो के कारण कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी और सूखे का खतरा बढ़ सकता है, जबकि दूसरे इलाकों में भारी बारिश, बाढ़ और तूफानों की स्थिति पैदा हो सकती है.
भारत भी अब नहीं बचेगा
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस असाधारण अल नीनो का असर इंडोनेशिया, भारत और नाइजीरिया से लेकर अमेरिका तक महसूस किया जा सकता है. इसके अलावा सूखा, जंगलों में आग और बाढ़ जैसी घटनाओं के कारण भी बड़ी संख्या में लोगों की मौत होने की आशंका है. इतना ही नहीं इसका असर कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि गर्मी से होने वाली मौतों का अनुमान किसी निश्चित भविष्यवाणी के बजाय संभावित खतरे का आकलन है. इसका इस्तेमाल सरकारें और स्थानीय प्रशासन पहले से तैयारी करने के लिए कर सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो के प्रभावों को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन बेहतर तैयारी और जलवायु जोखिमों की समय पर पहचान से इसके मानवीय नुकसान को कम किया जा सकता है.







