नई दिल्ली। दुनिया में पहली बार 5G नेटवर्क का इस्तेमाल करके किसी लोकेशन को सटीक ट्रैक किया गया है। यह सफलता एरिक्सन और मीडियाटेक को मिली है। दोनों कंपनियों ने मिलकर 5G नेटवर्क से बिल्कुल सटीक लोकेशन ट्रैक करने का सफल टेस्ट किया है। यह उपलब्धि भविष्य में सेल्फ ड्राइविंग कारों, डिलिवरी ड्रोन और फैक्ट्रियों में काम करने वाले रोबोट्स के लिए मददगार साबित हो सकती है। इस तकनीक को GNSS RTK कहा जा रहा है। आइए विस्तार से समझते हैं।
GPS तकनीक से कैसे अलग?
एरिक्सन की ओर NBT Tech को दी गई जानकारी के अनुसार, मौजूदा समय में हम मोबाइल में जिस जीपीएस का उपयोग करते हैं, वह किसी लोकेशन में 3 से 5 मीटर तक का फर्क दिखाता है। नई तकनीक से लोकेशन की एक्युरेसी 30 सेंटीमीटर से भी कम रह जाएगी। यानी अगर आप किसी के घर जा रहे हैं तो ठीक उसके घर पर ही पहुंचेंगे।
कैसे काम करती है GNSS RTK तकनीक?
जानकारी के अनुसार, जो सिग्नल सैटेलाइट से मिलते हैं, उनमें थोड़ा बहुत अंतर आ जाता है। RTK तकनीक इस अंतर को ठीक करती है और एकदम सटीक लोकेशन बताती है। खास बात है कि यह तकनीक मोबाइल के अंदर मौजूद नॉर्मल एंटीना और मीडियाटेक के 5G मोडेम पर काम कर लेती है। यानी अलग से कोई खर्चीला या मुश्किल उपकरण नहीं लगाना पड़ता।
क्या फायदा होगा GNSS RTK तकनीक का?
जानकारी के अनुसार, भविष्य में इस तकनीक की मदद से सेल्फ-ड्राइविंग कारों, डिलीवरी ड्रोन और फैक्ट्रियों में काम करने वाले रोबोट्स को चलने के लिए बिल्कुल सटीक रास्ते देने में मदद मिलेगी।
यह तकनीक दो तरीकों- Unicast और Broadcast पर काम करती है। यानी एक साथ हजारों डिवाइस को बिना नेटवर्क स्लो किए और एन्क्रिप्टेड तरीके से सटीक लोकेशन डेटा भेजा जा सकता है। (REF.)
कुल मिलाकर भविष्य में लोकेशन के लिए यूजर्स को सिर्फ जीपीएस पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। GNSS RTK जैसी तकनीकें अधिक सटीकता के साथ लोगों की मदद के लिए तैयार होंगी। स्मार्टफोन में इस तकनीक के आने से लोगों के लिए किसी लोकेशन तक पहुंचना और भी आसान हो जाएगा।






