लखनऊ : उत्तर प्रदेश में पहली बार बाढ़ के दौरान लोगों के रेस्क्यू के लिए खास SHERP रेस्क्यू व्हीकल का इस्तेमाल किया जाएगा. करीब 3 करोड़ रुपये की कीमत वाली इस गाड़ी को भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने गोंडा जिला प्रशासन को सौंपा है. इसे ‘हनुमान रथ’ नाम दिया गया है. यह वाहन जमीन के साथ पानी और दलदल में भी चल सकता है और एक बार में 8 से 9 लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में सक्षम है.
पानी से दलदल तक आसानी से पहुंचने में सक्षम
SHERP को ऐसे मुश्किल इलाकों में रेस्क्यू के लिए तैयार किया गया है, जहां सामान्य वाहन, ट्रैक्टर या नाव आसानी से काम नहीं कर पाते. यह जमीन पर करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है, जबकि पानी में इसकी रफ्तार करीब 5 किलोमीटर प्रति घंटे है. वाहन लगातार करीब 40 घंटे तक बाढ़ प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू अभियान चला सकता है. इसकी मदद से जमीन से सीधे पानी और फिर दलदल या कीचड़ वाले क्षेत्र में पहुंचा जा सकता है.
दो लीवर से 360 डिग्री घूम सकता है वाहन
SHERP में सामान्य कारों की तरह गोल स्टीयरिंग व्हील नहीं दिया गया है. इसे दो लीवर की मदद से नियंत्रित किया जाता है. चालक एक तरफ के पहियों की गति को रोककर या बदलकर वाहन को मौके पर ही 360 डिग्री तक घुमा सकता है. इसमें ऑयल-डिप्ड चेन ड्राइव सिस्टम भी लगाया गया है, जिससे बड़े टायरों को बेहतर ग्रिप मिलती है और वाहन कीचड़, दलदल व चिकनी मिट्टी में आगे बढ़ सकता है.
रात और खराब मौसम में भी निगरानी
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान आसपास की स्थिति पर नजर रखने के लिए वाहन में 360 डिग्री कैमरा सिस्टम दिया गया है. इससे रात, धुंध और खराब मौसम में भी आसपास की स्थिति और पानी के बहाव को देखा जा सकता है. इसमें इन-बिल्ट एयर कंप्रेसर भी है, जिसकी मदद से चालक अंदर बैठे-बैठे टायरों में हवा कम या ज्यादा कर सकता है. इमरजेंसी की स्थिति में सनरूफ को वैकल्पिक निकास के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. वाहन में लाइफ जैकेट और सेफ्टी बेल्ट भी उपलब्ध हैं.
ऑपरेटरों को दी गई दो हफ्ते की ट्रेनिंग
SHERP को चलाने के लिए प्रशिक्षित ऑपरेटरों की जरूरत होती है. गाड़ी सौंपने से पहले मुख्य ऑपरेटर अतुलेंद्र और उनके साथी को चंडीगढ़ में दो सप्ताह की विशेष तकनीकी ट्रेनिंग दी गई. रिपोर्ट के अनुसार, इस वाहन का निर्माण भारत में JSW ग्रुप और आर्चा एडवेंचर ने चंडीगढ़ प्लांट में मिलकर किया है. ‘हनुमान रथ’ नाम देने के पीछे बाढ़ के दौरान संकट में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाने की भावना बताई गई है.







