नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विरोध अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है। गांधी जयंती के दिन दिल्ली और मुंबई समेत कई जगहों पर प्रदर्शन हुए। दिल्ली में जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया। मुंबई में शिवाजी पार्क में CJP और समर्थक संगठनों की ओर से प्रदर्शन किया गया। आइए इस पूरे मामले को एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से विस्तार में समझते हैं।
दिल्ली में जंतर-मंतर जाने की कोशिश, 500 से ज्यादा हिरासत में
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद AAP, छात्र संगठनों और अन्य सामाजिक-राजनीतिक समूहों से जुड़े लोग प्रदर्शन के लिए दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे। पुलिस ने नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए थे। इसके तहत बिना अनुमति सभा, जुलूस, धरना, प्रदर्शन और नारेबाजी जैसी गतिविधियों पर रोक थी। प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई और बैरिकेडिंग की गई।
रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में 500 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में AAP नेता सौरभ भारद्वाज, पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, सांसद संजय सिंह, आरजेडी सांसद मनोज झा और छात्र संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता शामिल बताए गए हैं। AISA, SFI और DYFI समेत छात्र संगठनों ने भी प्रदर्शन में भाग लेने का आह्वान किया था। कई प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया।
11 मेट्रो स्टेशन पर एंट्री-एग्जिट बंद
प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो ने नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के कई महत्वपूर्ण स्टेशनों पर प्रवेश और निकास अस्थायी रूप से बंद किया। इनमें जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, INA, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली शामिल थे।
हालांकि राजीव चौक, मंडी हाउस, नई दिल्ली और केंद्रीय सचिवालय जैसे स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहने की जानकारी दी गई।दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी जंतर-मंतर, संसद मार्ग, अशोका रोड, पटेल चौक और आसपास के इलाकों में यातायात को नियंत्रित और डायवर्ट किया।
आखिर विवाद किस बात पर है ?
प्रदर्शन के केंद्र में Special Intensive Revision यानी SIR है। चुनाव आयोग के अनुसार SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है, ताकि पात्र नागरिक छूट न जाएं और अपात्र या डुप्लीकेट प्रविष्टियां हटाई जा सकें। चुनाव आयोग ने 2026 में कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया शुरू की है।
विरोध कर रहे राजनीतिक दलों और संगठनों का आरोप है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और इससे पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार पर असर पड़ सकता है।
इसी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने हाल में उन मतदाताओं को दोबारा सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान शुरू करने की घोषणा की है, जिनके नाम प्रक्रिया के दौरान छूट गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ऐसे मतदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाना है।
चुनाव आयोग का क्या कहना है ?
विवाद के बीच चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े फैसले आयोग के स्तर पर सामूहिक रूप से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है।
चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी SIR-2026 से संबंधित मतदाता सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनके जरिए मतदाता अपना नाम खोज सकते हैं और आवश्यक प्रक्रियाओं के माध्यम से मतदाता सूची में सुधार या नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
यानी विवाद का एक पक्ष प्रक्रिया में संभावित त्रुटियों और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि आयोग इसे मतदाता सूची के पुनरीक्षण और शुद्धिकरण की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
आयोग की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
SIR विवाद केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं है। चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कुछ फैसलों को लेकर आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
इसी पृष्ठभूमि में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आयोग के संवैधानिक रूप से सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था का पालन नहीं हुआ। हालांकि ये याचिकाकर्ता के आरोप हैं और इन पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत फैसला होना बाकी है। ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था।
मुंबई में शिवाजी पार्क में प्रदर्शन
दिल्ली के साथ मुंबई में भी CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार शिवाजी पार्क में प्रदर्शनकारी जुटे और नारेबाजी की। CJP ने पहले मुंबई पुलिस से प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन पुलिस ने शिवाजी पार्क में सभा की अनुमति नहीं दी। पुलिस ने बॉम्बे हाई कोर्ट के पुराने आदेश और शिवाजी पार्क के साइलेंस जोन होने का हवाला दिया। इसके बावजूद संगठन ने प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस प्रदर्शन को आगे देश के अन्य हिस्सों तक ले जाने की बात कही है।
राजनीतिक दलों की भी सक्रिय भागीदारी
दिल्ली के प्रदर्शन में AAP नेताओं और छात्र संगठनों की भागीदारी रही। AAP नेता आतिशी ने लोगों से गांधी जयंती के दिन जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की थी। विपक्षी नेताओं की ओर से SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। दूसरी तरफ सत्ता पक्ष और चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की शुद्धता तथा पात्र मतदाताओं को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
सरकार-पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था
फिलहाल विवाद के तीन प्रमुख आयाम दिखाई दे रहे हैं पहला, SIR के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलाव और उन मतदाताओं की स्थिति, जिनके नाम सूची से छूटे या हटे हैं। दूसरा, चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और उससे जुड़ी पारदर्शिता का सवाल। तीसरा, इस पूरे मामले पर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का विरोध तथा सरकार-पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाए गए प्रतिबंध।
चुनाव आयोग की ओर से छूटे हुए मतदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया जाना इस विवाद का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज और SIR से संबंधित कानूनी सवालों पर न्यायिक प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।
इसलिए फिलहाल इस पूरे विवाद को केवल राजनीतिक टकराव के रूप में देखने के बजाय मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाता के अधिकार, चुनाव आयोग की संस्थागत पारदर्शिता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार—इन चार प्रमुख पहलुओं के संदर्भ में देखना अधिक महत्वपूर्ण है।







