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Home राष्ट्रीय

तीसरा बच्चा होने पर नहीं लड़ सकते चुनाव; सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त, कहा- बदल गया है देश

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 15, 2026
in राष्ट्रीय
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Supreme Court
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत और दूसरे लोकल बॉडी चुनाव लड़ने के लिए दो बच्चों के नियम को जारी रखने की वैधता पर सख्त सवाल उठाए हैं। कोर्ट का कहना है कि आबादी बढ़ने से रोकने के लिए बनाई गई यह पॉलिसी, भारत में घटती फर्टिलिटी रेट को देखते हुए शायद अपना मकसद पूरा कर चुकी है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने महाराष्ट्र के एक सरपंच को तीसरा बच्चा होने पर अयोग्य ठहराए जाने को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वह राज्य के कानूनों में ऐसे नियमों को बनाए रखने के पीछे के बड़े तर्क की जांच करने को तैयार है और वकील रुक्मिणी बोबडे से एमिकस क्यूरी के तौर पर मदद मांगी।

जस्टिस नरसिम्हा ने सुप्रीम कोर्ट के 2003 के फैसले का जिक्र करते हुए कहा, “यह कैसी बेकार पॉलिसी है? जावेद बनाम हरियाणा राज्य मामले पर फिर से विचार करने की जरूरत है। देश बदल गया है।” इस फैसले में लोकल बॉडी चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए दो बच्चों के नियम की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा गया था। कोर्ट ने कहा कि तब से भारत के डेमोग्राफिक प्रोफाइल में काफी बदलाव आया है, देश का टोटल फर्टिलिटी रेट अब 1.7 के आसपास है, जबकि केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में फर्टिलिटी रेट कई स्कैंडिनेवियाई देशों से भी कम है।

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जब कई राज्य अब गिरती फर्टिलिटी रेट से जूझ रहे हैं, तो…

बेंच ने कहा, “मौजूदा हालात में आबादी कम करने के लिए इस पॉलिसी को जारी रखना पूरी तरह से गैर-कानूनी हो सकता है।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब कई राज्य अब गिरती फर्टिलिटी रेट से जूझ रहे हैं, तो आबादी बढ़ने से रोकने के लिए बनाई गई पॉलिसी को जारी रखने का क्या मतलब है। बेंच ने यह भी कहा कि तीन बच्चे होना अपने आप में बहुत आम बात हो गई है। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, “आपकी पीढ़ी या मेरी पीढ़ी में, तीन बच्चे होना बहुत कम होता है। यह सिर्फ़ एक है। इस पॉलिसी का असर खत्म हो गया है। इसे तुरंत वापस ले लेना चाहिए। विरोधी उम्मीदवार इसे हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं। हम इस पॉलिसी को लेकर चिंतित हैं।”

पूर्व सरपंच मंगला भीमराव इंगले की याचिका पर सुनवाई

यह बात तब कही गई जब बेंच महाराष्ट्र की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव इंगले की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने महाराष्ट्र ग्राम पंचायत एक्ट, 1959 के सेक्शन 14(1)(j-1) के तहत उन्हें अयोग्य ठहराए जाने के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। यह नियम दो से ज्यादा बच्चों वाले लोगों को पंचायत सदस्य या सरपंच का चुनाव लड़ने या पद पर बने रहने से रोकता है। इंगले बुलढाणा जिले की काकोडा ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गईं।

हालांकि, उनके तीसरे बच्चे होने का आरोप लगाने वाली एक शिकायत के कारण एडिशनल कलेक्टर के सामने कार्रवाई हुई, जिन्होंने अक्टूबर 2024 में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया। एडिशनल कमिश्नर ने उनकी अपील खारिज कर दी, और बॉम्बे हाई कोर्ट ने अगस्त 2025 में फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने यह माना कि अधिकारियों ने जिस बर्थ सर्टिफिकेट पर भरोसा किया था, वह एक पब्लिक डॉक्यूमेंट था जिसका सबूतों से कोई लेना-देना नहीं था और इंगले इसे गलत साबित करने में नाकाम रहीं।

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