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Home राज्य

सरकारी जमीन पर कैसे घुस गए? TMC सांसद यूसुफ पठान पर हाईकोर्ट सख्त!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 9, 2026
in राज्य, राष्ट्रीय
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Yusuf Pathan
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नई दिल्ली। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मौजूदा लोकसभा सांसद यूसुफ पठान की मुश्किलें कानूनी मोर्चे पर बढ़ती नजर आ रही हैं. गुजरात हाई कोर्ट ने वडोदरा नगर निगम (VMC) की एक कीमती जमीन पर कथित तौर पर अवैध कब्जा करने और घेराबंदी करने के मामले में पठान पर कड़ी नाराजगी जताई है. चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डी.एन. रे की डिवीजन बेंच ने मौखिक रूप से बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि बिना किसी औपचारिक आवंटन या भुगतान के कोई सार्वजनिक संपत्ति को अपने कब्जे में कैसे ले सकता है?

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच यूसुफ पठान की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एकल पीठ (सिंगल जज) ने उन्हें अतिक्रमणकारी घोषित किया था. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है.

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बेंच ने कहा कि आप औपचारिकताएं पूरी किए बिना किसी संपत्ति का भौतिक कब्जा नहीं ले सकते. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जो कोई उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना सरकारी जमीन पर बैठता है, वह कोर्ट से राहत की उम्मीद न करे. अदालत ने संकेत दिए हैं कि यूसुफ पठान को दो हफ्ते के भीतर ये जमीन खाली करनी पड़ सकती है, साथ ही इतने समय तक सार्वजनिक संपत्ति का उपयोग करने के बदले हर्जाना भी देना पड़ सकता है. कोर्ट ने सिर्फ पठान ही नहीं, बल्कि वडोदरा नगर निगम के उन अधिकारियों को भी आड़े हाथों लिया जिन्होंने बिना मंजूरी इस जमीन की घेराबंदी करने दी. अदालत ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की चेतावनी दी है.

वकील का दावा: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को जमीन देने की थी नीति

यूसुफ पठान की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील शालिन मेहता ने अदालत में बचाव करते हुए अक्टूबर 1999 की गुजरात सरकार की एक नीति का हवाला दिया. उन्होंने तर्क दिया कि इस नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को कुछ शर्तों के साथ जमीन आवंटन का अधिकार था. वडोदरा नगर निगम (VMC) की आम सभा ने बाजार मूल्य पर पठान को यह 978 वर्ग मीटर का प्लॉट आवंटित करने का प्रस्ताव भी मंजूर कर लिया था. हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि निगम के इस प्रस्ताव को कभी भी राज्य सरकार की अंतिम और जरूरी मंजूरी नहीं मिली. इसलिए यह आवंटन कभी वैध हुआ ही नहीं.

चुनाव जीतने के ठीक दो दिन बाद मिला था कब्जा हटाओ नोटिस

ये पूरा विवाद वडोदरा के टंडालजा इलाके का है, जहां क्रिकेटर भाई इरफान पठान और यूसुफ पठान अपने संयुक्त परिवार के साथ रहते हैं. जून 2024 में जब यूसुफ पठान पश्चिम बंगाल के बहरामपुर से टीएमसी के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीते, तो उसके ठीक दो दिन बाद (6 जून 2024 को) वीएमसी के लैंड एस्टेट डिपार्टमेंट ने उन्हें नोटिस थमा दिया था.

क्या था नोटिस का गणित?

दरअसल, साल 2012 में पठान ने अपने बंगले के पास की 978 वर्ग मीटर की इस जमीन के लिए आवेदन किया था. नगर निगम ने 99 साल की लीज का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजा, लेकिन 9 जून 2014 को गुजरात शहरी विकास विभाग ने इस अनुरोध को सिरे से खारिज कर दिया था. इसके बावजूद जमीन पर घेराबंदी बनी रही. इससे पहले अगस्त 2025 में एकल जज ने भी सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए कहा था कि सेलिब्रिटीज जनता के रोल मॉडल होते हैं, उन्हें ऐसी रियायत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा. मामले की अगली सुनवाई अब 15 जून को होगी.

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