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Home राज्य

कैसी थी शिवाजी महाराज की नौसेना जिसकी बहादुरी का पीएम मोदी ने किया जिक्र!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
September 3, 2022
in राज्य, राष्ट्रीय
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Shivaji Maharaj's navy
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कोच्चि: भारतीय नौसेना को अपना नया निशान यानी नया झंडा मिल गया है। जो क‍ि छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसेना के निशान से प्रेरित है। नए झंडे में ऊपर बाएं तरफ तिरंगा और नीचे दाएं तरफ नेवी ब्लू- सुनहरा अष्टकोण है। अष्टकोण की दो सुनहरी लाइन हैं। इसमें सुनहरा अशोक चिह्न है और इसके नीचे नीले रंग से सत्यमेव जयते लिखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कोच्चि में देश के पहले स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत संग नए ध्वज का अनावरण किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने गुलामी के एक बोझ को अपने सीने से उतार दिया। अभी तक भारतीय नौसेना के झंडे में गुलामी की निशानी थी। इसे छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरित एक नए ध्वज से बदल दिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी ने ऐसी नौसेना का निर्माण किया, जो दुश्मनों की नींद उड़ाकर रखती थी। अंग्रेज भारत की समुद्री ताकत और व्यापार की ताकत से घबराए रहते थे। इसलिए उन्होंने कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। हमारे लोग इस कुटिल चाल के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थे। फिर गुलामी में हम अपनी समंदर की ताकत को धीरे-धीरे भुला बैठे। अब फिर से देश उस ताकत को जगा रहा है। आज भारत ने गुलामी के एक बोझ को अपने सीने से उतार दिया है। आज से नेवी को नया ध्वज मिला है। अब तक उसमें गुलामी की पहचान बनी हुई थी। अब से छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरित नया ध्वज समंदर और आसमान में लहराएगा। मैं नौसेना के जनक छत्रपति शिवाजी महाराज को यह ध्वज समर्पित करता हूं। आइए छत्रपत‍ि शिवाजी महाराज और उनकी बनाई नौसेना के बारे में जानते हैं…

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छत्रपति शिवाजी को कहते हैं ‘फादर ऑफ मॉर्डन नेवी’
छत्रपति शिवाजी को फादर ऑफ इंडियन नेवी कहा जाता है क्योंकि भारत की नौसेना यानी मॉर्डन नेवी को शिवाजी की नेवी का ही हिस्सा माना जाता है। मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज को आमतौर पर भारतीय नौसेना की नींव रखने का क्रेडिट दिया जाता है। मॉर्डन महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों के आसपास शिवाजी के नेवल अड्डों को हिंदू और मुस्लिम दोनों एडमिरलों की ओर से कंट्रोल किया जाता था जो कई मौकों पर पुर्तगालियों और अंग्रेजी आक्रमणकारियों को हराने के लिए जाने जाते हैं। 17वीं और 18वीं शताब्दी के बीच मराठा योद्धा एडमिरल कान्होजी आंग्रे के कारनामों का ज‍िक्र विशेष रूप से इतिहास में मिलता है। उनके नाम पर एक भारतीय नौसेना जहाज का नाम भी रखा गया है।

श‍िवाजी ने नौसेना की अहमियत को पहचाना

दरअसल छत्रपत‍ि शिवाजी महाराज पहले ऐसे हिंदुस्तानी शासक थे जिन्होंने नौसेना की अहमियत को पहचाना। इसके बाद उन्होंेने अपनी मजबूत नौसेना का गठन किया। उन्होंने महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र की रक्षा के लिए तट पर कई किले बनाए। इसमें जयगढ़, विजयदुर्ग, सिंधुदुर्ग और अन्य स्थानों पर बने किले शामिल थे। दरअसल अंग्रेज, पुर्तगाल और डच भी कोंकण तट प्रभावित थे और नौसेना के लिए प्रोत्साहन आर्थिक के बजाय राजनीतिक था। विदेशी को रोकने के लिए और दुश्मनों को मातृभूमि से उखाड़ फेंकने के लिए एक नौसेना जरूरी थी। यही कारण था कि मराठा नौसेना का गठन किया गया। ये भी माना जाता है कि उस फोर्स में करीब 5,000 सैनिक थे। एक बार जब मराठों ने कोंकण में प्रवेश किया, तो वे यूरोपीय लोगों के साथ मुख्य रूप से पुर्तगालीयों से सीधे लड़ाई में थे। लेकिन फिर भी छत्रपति शिवाजी ने कान्होजी आंग्रे की मदद से पुर्तगालियों के खिलाफ अपने बहादुर अभियानों के साथ समुद्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

श‍िवाजी ने बदली परंपरा, क‍िया समर्पित सेना का गठन
कहा जाता है क‍ि शिवाजी से पहले उनके पिता और पूर्वज सूखे मौसम में आम नागरिकों और किसानों को लड़ाई के लिए भर्ती करते थे। उन लोगों ने कभी भी संगठित सेना का गठन नहीं किया। शिवाजी ने इस परंपरा को बदलकर समर्पित सेना का गठन किया जिनको साल भर प्रशिक्षण और वेतन मिलता था। दरअसल युद्ध कई मोर्चों पर लड़ा जाता है और आज के समय में केवल जमीन, समुद्र और हवा के बीच रक्षा रणनीतियों वाली ताकत ही दूसरे देश पर जीत हासिल कर सकती है। इस रक्षा रणनीति की नींव, भारत जैसे देश में, जो तीन तरफ से पानी से घिरा है वो 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज की ओर से नौसैनिक शक्ति पर जोर दिया गया।

कब पैदा हुए श‍िवाजी
छत्रपति शिवाजी देश के महान शासकों में से एक थे। उनका जन्म 19 फरवरी, 1630 को हुआ था। वह एक अच्छे सेनानायक के साथ एक अच्छे कूटनीतिज्ञ भी थे। कई जगहों पर उन्होंने सीधे युद्ध लड़ने की बजाय युद्ध से बच निकलने को प्राथमिकता दी थी। यही उनकी कूटनीति थी, जो हर बार बड़े से बड़े शत्रु को मात देने में उनका साथ देती रही।

धर्मनिरपेक्ष शासक थे शिवाजी
शिवाजी एक समर्पित हिन्दू होने के साथ-साथ धार्मिक सहिष्णु भी थे। उनके साम्राज्य में मुसलमानों को पूरी तरह से धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त थी। कई मस्जिदों के निर्माण के लिए शिवाजी ने अनुदान दिया। उनके मराठा साम्राज्य में हिन्दू पंडितों की तरह मुसलमान संतों और फकीरों को भी पूरा सम्मान प्राप्त था। उन्होंने मुस्लिमों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखा। उनकी सेना में 1,50,000 योद्धा थे जिनमें से करीब 66,000 मुस्लिम थे।

 

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