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Home व्यापार

RBI ने बदले डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के नियम, ऐसे मिलेगा मुआवजा

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 25, 2026
in व्यापार
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नई दिल्ली। अगर आप डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए अहम है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के शिकार ग्राहकों के लिए मुआवजा व्यवस्था में बदलाव करते हुए सीमित देनदारी (Limited Liability) के दायरे को बढ़ा दिया है, ताकि धोखाधड़ी की स्थिति में ग्राहकों को बेहतर सुरक्षा मिल सके।

केंद्रीय बैंक के मुताबिक, अगर कोई ग्राहक धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन (EBT) की वजह से 50,000 रुपये तक के कुल नुकसान की शिकायत दर्ज कराता है, तो उसे जिंदगी में एक बार कुल नुकसान की रकम का 85% या 25,000 रुपये, जो भी कम हो, मुआवज़ा दिया जाएगा।

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (कमर्शियल बैंक-रिस्पॉन्सिबल बिज़नेस कंडक्ट) थर्ड अमेंडमेंट डायरेक्शन्स, 2026 में कहा गया है कि पीड़ित को फ्रॉड वाले ईबीटी की रिपोर्ट नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर और बैंक को इसके होने के पांच कैलेंडर दिनों के अंदर करनी चाहिए।

आरबीआई ने कहा कि 29,412 रुपये से कम के नुकसान वाले फ्रॉड वाले ईबीटी से जुड़ी शिकायत के लिए, जहां 85% का मुआवजा दिया जाता है, 65% आरबीआई 10% कस्टमर का बैंक और बाकी 10% बेनिफिशियरी बैंक उठाएगा।

क्रॉस-बॉर्डर फ्रॉड वाले ईबीटी से होने वाली शिकायत के मामले में 65% आरबीआई और बाकी 20% कस्टमर का बैंक उठाएगा।

इसमें कहा गया है कि अगर धोखाधड़ी वाले ईबीटी से जुड़ी शिकायत में 29,412 रुपये या उससे ज्यादा लेकिन 50,000 रुपये तक का नुकसान होता है और 25000 रुपये का मुआवजा दिया जाता है, तो घरेलू धोखाधड़ी वाले ईबीटी से जुड़ी शिकायत के मामले में आरबीआई, कस्टमर के बैंक और बेनिफिशियरी बैंक को मुआवजे के लिए क्रम से 19,118 रुपये, 2,941 रुपये और 2,941 रुपये देने होंगे।

अगर क्रॉस-बॉर्डर धोखाधड़ी वाले EBT से कोई शिकायत आती है, तो आरबीआई और कस्टमर के बैंक मुआवजे के लिए क्रम से 19,118 रुपये और 5,882 रुपये देंगे।

बेनिफिशियरी बैंक का मतलब उस बैंक से है जहां धोखाधड़ी से डेबिट की गई रकम सबसे पहले क्रेडिट की जाती है। ऐसे मामलों में जहां एक से ज्यादा बेनिफिशियरी बैंक हैं, हर बैंक को दिया जाने वाला लागू मुआवजा उनके अकाउंट में जमा की गई रकम के अनुपात में होगा।

आरबीआई ने कहा कि अगर कम्पेनसेशन देने के बाद फ्रॉड EBT से जुड़ी किसी शिकायत के संबंध में रिकवरी होती है, तो कस्टमर के बैंक को नेट लॉस अमाउंट पर दिए जाने वाले कम्पेनसेशन को फिर से कैलकुलेट करना चाहिए और रिकवरी से पहले दिए गए कम्पेनसेशन की ज्यादा रकम, अगर कोई हो, को ध्यान में रखते हुए रिकवर की गई रकम से एक्स्ट्रा पेमेंट करना चाहिए।

आरबीआई ने कहा कि क्रेडिट कार्ड में फ्रॉड EBT से जुड़ी शिकायत के मामले में, बैंक को कस्टमर से नोटिफिकेशन मिलने की तारीख से पांच कैलेंडर दिनों के अंदर आरबीआई में शामिल रकम के बराबर शैडो रिवर्सल देना चाहिए।

आरबीआई ने कहा कि अनऑथराइज़्ड इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन का मतलब है ऐसा ट्रांज़ैक्शन जो कस्टमर द्वारा ऑथराइज्ड नहीं है और इसमें बैंक की लापरवाही या किसी थर्ड-पार्टी ब्रीच के कारण हुआ आरबीआई शामिल है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और रेगुलेटेड एंटिटीज द्वारा वित्तीय उत्पादों या सेवाओं की बिक्री से जुड़े नियम कड़े कर दिए। इस कदम का उद्देश्य लेंडर्स द्वारा फाइनेंशियल प्रोडक्ट की गलत बिक्री को रोकना, गलत मार्केटिंग तरीकों पर रोक लगाना और कस्टमर की सहमति, डिस्क्लोजर और बिक्री के तरीकों के नियमों को कड़ा करना है।

केंद्रीय बैंक ने टेक्निकल और ऑपरेशनल बदलावों की जरूरत को देखते हुए रिवाइज्ड गाइडलाइंस लागू करने की तारीख बढ़ा दी है। अब ये नियम जुलाई 2026 के बजाय 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

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